दुकानें टूटने के बाद टेंट में सेंट्रल मार्केट का व्यापार:दुकानदारों ने सड़क किनारे लगाए पंडाल- बोले सामान बेचना मजबूरी
मेरठ की सेंट्रल मार्केट में हुए ध्वस्तीकरण के बाद जिन व्यापारियों की दुकानें टूटी हैं उनकी यह पहली दीपावली है। पिछले साल जहां सेंट्रल मार्केट त्यौहारों से 15 दिन पहले ही लाइटों से सज गया था तो इस बार वह सूना दिखाई दे रहा है। सेंट्रल मार्केट में जिन लोगों की दुकानें अब खत्म हो गई है उन्होंने सड़क के किनारे टेंट लगाने शुरू कर दिए हैं। कुछ व्यापारी जहां उनकी दुकान हुआ करती थी उनकी खाली जमीन पर टेंट लगा रहे हैं तो कुछ सड़क किनारे अपना पंडाल लगाकर अपनी दुकान को अस्थाई ठिकाना देने का प्रयास कर रहे हैं। ध्वस्तीकरण की चपेट में आने वाले लगभग 80 प्रतिशत व्यापारियों ने सड़क किनारे फड़ लगाकर सामान बेचना शुरू कर दिया है। खालसा कलेक्शन के नाम से कपड़ाें की दुकान चलाने वाले सनी आहुजा ने बताया कि सबसे पहले जो 666\6 कॉम्पलेक्स ध्वस्त हुआ था उसमें उनकी कपड़ों की दुकान थी। इसके बाद दूसरी जगह दुकान की तो वह भी आवास विकास द्वारा सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ध्वस्त कर दी गई है। अब त्यौहार पर ग्राहक बाजार में आते हैं तो उनके लिए सड़क पर टेंट लगाकर सामान बेच रहे हैं। पूराना स्टॉक क्लियर करने के साथ- साथ नया स्टॉक भी मंगाकर सड़क के किनारे ही बेच रहे हैं ताकि जो पुराने ग्राहक हैं उनको अस्थाई ही सही लेकिन सामान बेच सकें। सजावाट के सामान की दुकान करने वाले सचिन जैन ने बताया कि पहले बाजार में स्थाई दुकान थी जो ध्वस्त हो गई है। अब दीपावली के समय सजावट के सामान की मांग ज्यादा रहती है जिस कारण सड़क के किनारे पंडाल लगाकर अपनी अस्थाई दुकान लगाई है। व्यापार चलाने और परिवार को पालने के लिए दुकान लगाना जरूरी है। हालांकि बारिश के कारण सामान खराब होने का भी खतरा रहता है । साथ ही सुरक्षा के लिए रात में सोना भी इसी पंडाल में पड़ता है, पहले दुकान थी तो बंद कर घर चले जाते थे। मार्केट के लगभग सभी व्यापारियों का यही हाल है। कोई रात में सड़क किनारे जिस टेंट में सामान बेचता है उसी में सोता है तो कोई रात में पहले अपना सामान घर लेकर जाता है और बाद में सुबह फिर से लाकर अपना सामान यहां रखकर बेचता है।
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