E20 पेट्रोल से सच में घटता है माइलेज
ई-बीस मिश्रित ईंधन को लेकर देशभर में माइलेज पर बहस जारी है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे माइलेज में हल्की कमी आ सकती है, लेकिन नई पीढ़ी के वाहनों में इसका प्रभाव बहुत कम होता है। वहीं बेहतर इंजन प्रदर्शन, अधिक ऑक्टेन स्तर और पर्यावरण संरक्षण जैसे कई लाभ भी इससे जुड़े हैं।
दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 18 जुलाई 2026
देशभर में ई-बीस मिश्रित ईंधन को लेकर बहस लगातार तेज होती जा रही है। बड़ी संख्या में वाहन चालकों का कहना है कि इस ईंधन के इस्तेमाल के बाद उनकी गाड़ियों का माइलेज पहले की तुलना में कम हो गया है। दूसरी ओर विशेषज्ञों, वाहन निर्माता कंपनियों और सरकार का कहना है कि ई-बीस ईंधन के उपयोग से कुछ वाहनों में माइलेज में मामूली कमी आ सकती है, लेकिन इसके पीछे वैज्ञानिक कारण हैं और इसके साथ कई बड़े लाभ भी जुड़े हुए हैं। खासकर नई पीढ़ी के वाहनों को इसी ईंधन के अनुरूप तैयार किया गया है, जिससे उनके प्रदर्शन पर इसका असर बहुत कम पड़ता है।
देशभर में क्यों बढ़ी ई-बीस ईंधन को लेकर चर्चा
पिछले कुछ महीनों से देश के अधिकांश पेट्रोल पंपों पर ई-बीस मिश्रित ईंधन की उपलब्धता बढ़ाई गई है। इसके बाद अनेक वाहन मालिकों ने अनुभव साझा करते हुए कहा कि पहले की तुलना में अब उनकी गाड़ियां कम दूरी तय कर रही हैं। इसी वजह से सामाजिक माध्यमों, वाहन मंचों और विशेषज्ञों के बीच इस विषय पर लगातार चर्चा हो रही है। लोगों के मन में यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या वास्तव में इस ईंधन के कारण माइलेज कम हो रहा है या यह केवल एक भ्रम है।सरकार ने ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से एथेनॉल मिश्रित ईंधन को बढ़ावा देने की नीति अपनाई है। इसके साथ ही पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण में कमी लाने का लक्ष्य भी रखा गया है। हालांकि आम उपभोक्ताओं के लिए सबसे बड़ा सवाल अभी भी माइलेज को लेकर ही बना हुआ है, क्योंकि प्रतिदिन वाहन चलाने वालों के लिए ईंधन की खपत सीधे जेब पर असर डालती है।
क्या वास्तव में कम हो जाता है माइलेज
वाहन अनुसंधान से जुड़े कई संस्थानों और प्रमुख वाहन निर्माता कंपनियों ने स्वीकार किया है कि ई-बीस मिश्रित ईंधन के उपयोग से माइलेज में कुछ कमी आ सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि एथेनॉल की ऊर्जा क्षमता सामान्य पेट्रोल की तुलना में कम होती है। इसका अर्थ यह है कि समान शक्ति प्राप्त करने के लिए इंजन को अपेक्षाकृत अधिक ईंधन जलाना पड़ता है। यही कारण है कि वाहन पहले की तुलना में थोड़ी अधिक ईंधन खपत कर सकते हैं।विशेषज्ञों के अनुसार सामान्य परिस्थितियों में माइलेज में लगभग तीन से छह प्रतिशत तक की कमी देखी जा सकती है। हालांकि यह आंकड़ा हर वाहन के लिए समान नहीं होता। वाहन का इंजन, उसकी तकनीक, रखरखाव, सड़क की स्थिति, चलाने का तरीका और मौसम जैसी कई परिस्थितियां भी माइलेज को प्रभावित करती हैं। इसलिए सभी वाहनों में समान स्तर की कमी देखने को नहीं मिलती।
पुराने वाहनों पर अधिक दिखाई देता है इसका प्रभाव
विशेषज्ञों का मानना है कि अप्रैल दो हजार तेईस से पहले तैयार किए गए अधिकांश वाहन सामान्य पेट्रोल को ध्यान में रखकर विकसित किए गए थे। ऐसे वाहनों के इंजन और ईंधन प्रणाली में एथेनॉल की अधिक मात्रा के अनुसार बदलाव नहीं किए गए थे। इसी कारण ई-बीस मिश्रित ईंधन का प्रभाव इन गाड़ियों में अपेक्षाकृत अधिक दिखाई देता है।कुछ सर्वेक्षणों में पुराने वाहन मालिकों ने दस से पंद्रह प्रतिशत तक माइलेज घटने की शिकायत भी दर्ज कराई है। विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक उपयोग करने पर कुछ पुराने इंजनों में लगे रबर और प्लास्टिक के पुर्जों पर भी इसका असर पड़ सकता है। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि केवल ई-बीस ईंधन के कारण इंजन खराब होने के दावों की पुष्टि नहीं हुई है और ऐसे दावों को सही नहीं माना जा सकता।
नई पीढ़ी के वाहनों में क्यों नहीं होती अधिक परेशानी
वर्तमान समय में बनने वाले अधिकांश नए वाहन ई-बीस मिश्रित ईंधन को ध्यान में रखकर तैयार किए जा रहे हैं। इनके इंजन, ईंधन आपूर्ति प्रणाली, वाल्व, पाइप और अन्य तकनीकी हिस्सों को इस प्रकार विकसित किया गया है कि वे एथेनॉल मिश्रित ईंधन के साथ बेहतर ढंग से कार्य कर सकें। इसी कारण इन वाहनों में माइलेज पर प्रभाव बहुत कम दिखाई देता है।वाहन निर्माता कंपनियों का कहना है कि नई पीढ़ी के इंजनों को पहले से ही इस ईंधन के अनुरूप समायोजित किया गया है। इसलिए यदि वाहन ई-बीस के लिए उपयुक्त है तो चालक को माइलेज या प्रदर्शन में बहुत अधिक अंतर महसूस नहीं होगा। यही कारण है कि नई गाड़ियों में इस ईंधन को लेकर शिकायतें अपेक्षाकृत कम सामने आ रही हैं।
ई-बीस ईंधन के बड़े लाभ भी हैं महत्वपूर्ण
माइलेज में मामूली कमी के बावजूद विशेषज्ञ ई-बीस मिश्रित ईंधन के कई महत्वपूर्ण लाभ बताते हैं। एथेनॉल मिश्रित ईंधन का ऑक्टेन स्तर अधिक होता है, जिससे इंजन अधिक संतुलित तरीके से कार्य करता है। इसका परिणाम यह होता है कि वाहन का उठाव पहले की तुलना में बेहतर महसूस हो सकता है और इंजन की कार्यक्षमता भी सुधरती है।इसके अलावा इंजन से आने वाली खटखटाहट कम होती है तथा दहन प्रक्रिया अधिक प्रभावी बनती है। पर्यावरण की दृष्टि से भी यह ईंधन लाभकारी माना जाता है क्योंकि इससे प्रदूषण फैलाने वाले उत्सर्जन को कम करने में सहायता मिलती है। यही कारण है कि अनेक देशों में एथेनॉल मिश्रित ईंधन को बढ़ावा दिया जा रहा है।
सरकार इस ईंधन को क्यों दे रही है बढ़ावा
सरकार का उद्देश्य केवल पेट्रोल में एथेनॉल मिलाना नहीं, बल्कि देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना भी है। भारत अपनी आवश्यकता का बड़ा हिस्सा विदेशों से कच्चे तेल के रूप में आयात करता है। यदि एथेनॉल का उपयोग बढ़ता है तो आयात पर होने वाला खर्च कम किया जा सकता है और देश की विदेशी मुद्रा की बचत होगी।इसके अलावा एथेनॉल मुख्य रूप से कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है। इससे किसानों को अतिरिक्त आय का अवसर मिलता है और कृषि आधारित उद्योगों को भी बढ़ावा मिलता है। सरकार का मानना है कि यह नीति ऊर्जा, कृषि और पर्यावरण—तीनों क्षेत्रों के लिए लाभकारी सिद्ध हो सकती है।
वाहन मालिकों को किन बातों का रखना चाहिए ध्यान
यदि आपका वाहन नई पीढ़ी का है और निर्माता कंपनी ने उसे ई-बीस मिश्रित ईंधन के उपयोग के लिए उपयुक्त घोषित किया है, तो इस ईंधन का उपयोग सामान्य रूप से किया जा सकता है। ऐसे वाहनों में किसी विशेष परेशानी की संभावना बहुत कम रहती है और उनका इंजन इसी ईंधन के अनुसार तैयार किया गया होता है।वहीं यदि आपका वाहन पुराना है तो निर्माता कंपनी की सलाह का पालन करना बेहतर रहेगा। नियमित समय पर वाहन की जांच, इंजन की देखभाल, उच्च गुणवत्ता वाले ईंधन का उपयोग और समय-समय पर आवश्यक पुर्जों की जांच कराने से माइलेज और इंजन दोनों का प्रदर्शन बेहतर बनाए रखा जा सकता है।