सोनम वांगचुक पर कांग्रेस का बड़ा हमला!
सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाकर अस्पताल ले जाने की कार्रवाई पर कांग्रेस ने केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय पर निशाना साधा। पवन खेड़ा ने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है और लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान किया जाना चाहिए।
दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 18 जुलाई 2026
दिल्ली के जंतर-मंतर से सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने की कार्रवाई के बाद राजनीतिक विवाद लगातार गहराता जा रहा है। इस मामले पर अब कांग्रेस ने भी केंद्र सरकार और केंद्रीय गृह मंत्रालय पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन वर्तमान सरकार इस अधिकार को सीमित करने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई, नए पुलिस आयुक्त की नियुक्ति और सरकार की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं।
सोनम वांगचुक को हटाने पर कांग्रेस का पहला बड़ा हमला, पवन खेड़ा ने सरकार से पूछे तीखे सवाल
दिल्ली के जंतर-मंतर पर कई दिनों से आमरण अनशन कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को शनिवार सुबह स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए प्रशासन ने अस्पताल में भर्ती कराया। इस कार्रवाई के बाद पूरे देश में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। विभिन्न विपक्षी दल लगातार केंद्र सरकार की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं और इस पूरे घटनाक्रम को लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़कर देख रहे हैं।इसी क्रम में कांग्रेस ने भी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा ने कहा कि शांतिपूर्ण आंदोलन किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की पहचान होता है। यदि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले लोगों के साथ बलपूर्वक कार्रवाई की जाती है, तो इससे लोकतंत्र की मूल भावना कमजोर होती है। उन्होंने कहा कि सरकार को विरोध करने वालों से संवाद स्थापित करना चाहिए, न कि उन्हें हटाने का प्रयास करना चाहिए।
पवन खेड़ा ने गृह मंत्रालय और दिल्ली पुलिस की भूमिका पर उठाए सवाल
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने अपने बयान में कहा कि दिल्ली पुलिस सीधे केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन कार्य करती है। उन्होंने इस बात का भी उल्लेख किया कि हाल ही में दिल्ली पुलिस के नए आयुक्त की नियुक्ति की गई थी और उसके तुरंत बाद जंतर-मंतर पर यह कार्रवाई सामने आई। उनके अनुसार घटनाओं का यह क्रम कई गंभीर सवाल खड़े करता है।उन्होंने कहा कि यदि किसी नए प्रशासनिक नेतृत्व की पहली बड़ी कार्रवाई शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर सख्ती करना हो, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए अच्छा संकेत नहीं माना जा सकता। उन्होंने सरकार से मांग की कि पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक की जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि आखिर किन परिस्थितियों में यह निर्णय लिया गया।
'संविधान ने हर नागरिक को विरोध का अधिकार दिया है'
पवन खेड़ा ने कहा कि भारतीय संविधान प्रत्येक नागरिक को अपनी बात रखने और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराने का अधिकार देता है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत यही होती है कि सरकार और जनता के बीच संवाद बना रहे। यदि असहमति जताने वालों को केवल कानून-व्यवस्था की समस्या मानकर कार्रवाई की जाएगी, तो इससे लोकतांत्रिक संस्थाओं पर लोगों का भरोसा कमजोर हो सकता है।उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को विरोध की आवाज सुननी चाहिए और संवाद के माध्यम से समाधान निकालना चाहिए। किसी भी लोकतांत्रिक देश में मतभेद होना स्वाभाविक है और सरकार का दायित्व होता है कि वह हर पक्ष की बात धैर्यपूर्वक सुने।
महिला पहलवानों और पूर्व सैनिकों के आंदोलनों का भी किया उल्लेख
कांग्रेस नेता ने अपने बयान में पिछले कुछ वर्षों के कई आंदोलनों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि महिला पहलवानों के आंदोलन के दौरान भी पुलिस कार्रवाई देखने को मिली थी। इसके अलावा उन्होंने पूर्व सैनिकों के विरोध प्रदर्शन का उदाहरण देते हुए दावा किया कि सरकार लगातार विरोध प्रदर्शनों को कानून-व्यवस्था का विषय बनाकर देख रही है।उन्होंने आरोप लगाया कि अब सोनम वांगचुक के मामले में भी वही स्थिति दोहराई गई है। कांग्रेस का कहना है कि लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन को अधिकार के रूप में स्वीकार किया जाना चाहिए, न कि उसे प्रशासनिक कार्रवाई के माध्यम से नियंत्रित करने का प्रयास किया जाना चाहिए।
सरकार की कार्यशैली पर कांग्रेस ने जताई चिंता
पवन खेड़ा ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है और यहां प्रत्येक नागरिक को अपनी बात रखने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि शांतिपूर्ण आंदोलनों पर भी कठोर कार्रवाई होगी, तो इससे भारत की लोकतांत्रिक छवि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि आंदोलनकारियों के साथ बातचीत कर समाधान निकाला जाए। उनका कहना था कि लोकतंत्र में संवाद सबसे प्रभावी माध्यम होता है और टकराव से किसी समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है। कांग्रेस ने पूरे मामले में पारदर्शिता बरतने और कार्रवाई के कारणों को सार्वजनिक करने की भी मांग की।
सोनम वांगचुक का उपचार जारी, राजनीतिक विवाद बढ़ने के आसार
प्रशासन की ओर से सोनम वांगचुक को स्वास्थ्य संबंधी कारणों का हवाला देते हुए अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां चिकित्सकों की निगरानी में उनका उपचार जारी है। प्रशासन का कहना है कि यह कदम उनके स्वास्थ्य की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया।दूसरी ओर विपक्षी दल लगातार सरकार पर सवाल उठा रहे हैं और पूरे मामले की निष्पक्ष जानकारी सार्वजनिक करने की मांग कर रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति में और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है तथा सरकार और विपक्ष के बीच बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।