गणेशजी की सूंड कैसी हो,लक्ष्मीजी के चेहरे पर कैसी मुस्कान:मूर्ति खरीदने में लोग हर बात का रख रहे ध्यान, 10 करोड़ के कारोबार की उम्मीद
दीपावली पर घरों को रोशन करने और सुख-समृद्धि की कामना के लिए कानपुर के बाजारों में मिट्टी के दीयों और लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों की खूब खरीदारी हो रही है। धनतेरस से शुरू हुई रौनक दीपावली के दिन भी बाजारों में दिखाई दे रही है। कलक्टरगंज, आर्यनगर, नवीन मार्केट समेत शहर के अलग-अलग बाजारों में मिट्टी से बनी मूर्तियों, दीयों और सजावटी सामान की दुकानें खरीदारों से गुलजार हैं। खास बात यह है कि इस बार लोग पारंपरिक मिट्टी की मूर्तियों और दीयों की डिमांड कर रहे हैं। इससे कुम्हारों और मिट्टी के सामान के कारोबारियों के चेहरे भी खिले हुए हैं। देखिए 3 तस्वीरें… करीब 10 करोड़ तक के कारोबार का अनुमान कारोबारियों के मुताबिक, पिछले साल की तुलना में इस बार मिट्टी के लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों और दीयों की बिक्री बेहतर है। बाजार में पारंपरिक दीयों के साथ रंग-बिरंगे, डिजाइनर और आकर्षक आकार वाले दीयों की भी खूब मांग है। घरों को सजाने के लिए लोग मिट्टी के दीयों के अलावा गुल्लक, खिलौने और दूसरे सजावटी सामान भी खरीद रहे हैं। कारोबारियों को उम्मीद है कि दीपावली पर मिट्टी के दीयों और लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों का कारोबार करीब 10 करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है। कोलकाता की लक्ष्मी-गणेश मूर्तियों की खास डिमांड इस बार बाजारों में कोलकाता की बनी लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां खरीदारों को खासा आकर्षित कर रही हैं। इनके आकर्षक चेहरे, रंगों और बारीक डिजाइन के कारण लोग इन्हें पसंद कर रहे हैं। हालांकि कानपुर में तैयार की गई मिट्टी की मूर्तियों की भी अच्छी डिमांड है। इसके अलावा राजस्थान और लखनऊ से भी आकर्षक प्रतिमाएं बाजार में आई हैं। दुकानों पर छोटी से लेकर बड़ी मूर्तियों की कीमत 100 रुपए से शुरू होकर 2100 रुपए और कुछ खास डिजाइन वाली मूर्तियों की कीमत 11 हजार रुपए तक है। वस्त्र पहनाने या माला से मूर्तियां सजाने की जरूरत नहीं आर्यनगर के दुकानदार वीरेंद्र ने बताया कि इस बार बाजार में डिजाइनर लक्ष्मी-गणेश की ऐसी मूर्तियां आई हैं, जिन्हें अलग से वस्त्र पहनाने या माला से सजाने की जरूरत नहीं है। मूर्तियां पहले से ही पूरी तरह सजी हुई हैं। इनमें आकर्षक रंगों और डिजाइन का इस्तेमाल किया गया है। उन्होंने बताया कि छोटी मूर्तियां 500 से 5100 रुपए तक की हैं, जबकि कुछ विशेष डिजाइन वाली प्रतिमाओं की कीमत 11 हजार रुपए तक है। कोलकाता से आई मूर्तियों को लोग खास पसंद कर रहे हैं। इस बार ग्राहक मिट्टी की मूर्तियों की मांग अधिक कर रहे हैं। गणेशजी की सूंड और लक्ष्मीजी की मुस्कान भी देख रहे खरीदार मूर्तियां खरीदने पहुंचे लोग सिर्फ कीमत और आकार ही नहीं, बल्कि उनकी बनावट और धार्मिक मान्यताओं का भी ध्यान रख रहे हैं। कोई गणेशजी की दाईं सूंड वाली मूर्ति पसंद कर रहा है तो किसी को बाईं सूंड वाली प्रतिमा चाहिए। लक्ष्मीजी की मूर्तियों में भी हाथी पर सवार और उल्लू पर विराजमान प्रतिमाओं की मांग है। दुकानदार विश्ववीर कुरील ने बताया कि कानपुर के अलावा कोलकाता, राजस्थान और लखनऊ की मूर्तियां बाजार में आई हैं। ग्राहक अपनी पसंद और मान्यताओं के अनुसार मूर्तियां खरीद रहे हैं। किसी को दाईं ओर सूंड वाली गणेशजी की प्रतिमा चाहिए तो कोई बाईं ओर सूंड वाली मूर्ति मांगता है। लक्ष्मीजी की हाथी और उल्लू पर सवार प्रतिमाओं की भी मांग है। हालांकि विश्ववीर कुरील ने ऑनलाइन बाजार से कारोबार प्रभावित होने की चिंता भी जताई। उनका कहना है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर सस्ते सामान की उपलब्धता के चलते दुकानदारों और स्थानीय कारीगरों के सामने प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है। इससे कारोबार पर असर पड़ रहा है। मिट्टी की मूर्ति ऐसी हो, जिसे देखकर मन खुश हो जाए आर्यनगर बाजार में मूर्ति खरीदने पहुंचीं रिधिमा गुप्ता ने बताया कि वह हर साल लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति खरीदते समय उनके चेहरे और रंगों का विशेष ध्यान रखती हैं। उनका कहना है कि मूर्ति ऐसी होनी चाहिए, जिसे देखकर मन में खुशी और सकारात्मकता का एहसास हो। गणेशजी की सूंड सही दिशा में हो और लक्ष्मीजी के चेहरे पर मुस्कान होनी चाहिए। मूर्ति के रंग भी आकर्षक होने चाहिए। रिधिमा ने बताया कि वह मिट्टी की मूर्ति खरीदना पसंद करती हैं, ताकि पूजा के बाद विसर्जन करने में परेशानी न हो और पर्यावरण को भी नुकसान कम पहुंचे। उन्होंने बताया कि इस बार बाजार में छोटी-बड़ी हर तरह की मूर्तियां उपलब्ध हैं। घर के आकार और अपनी पसंद के हिसाब से मूर्ति चुनना आसान हो गया है। मिट्टी के दीये, गुल्लक और खिलौनों की भी मांग दीपावली पर मिट्टी के दीयों की खरीदारी भी जोरों पर है। बाजार में सामान्य मिट्टी के दीये 100 रुपए सैकड़ा और सांचे से तैयार दीये 140 रुपए सैकड़ा बिक रहे हैं। वहीं मिट्टी की गुल्लक 15 से 150 रुपए तक और खिलौने आकार के हिसाब से 10 से 60 रुपए तक में उपलब्ध हैं। दुकानदारों के मुताबिक, इस बार लोग पूजा के लिए पारंपरिक दीयों के साथ सजावट के लिए रंगीन और डिजाइनर दीये भी खरीद रहे हैं। सीसामऊ निवासी सुबोध वर्मा नवीन मार्केट में परिवार के साथ मूर्ति खरीदने पहुंचे। उन्होंने बताया कि वह हर साल गणेश-लक्ष्मी की आकर्षक मूर्ति खरीदते हैं। उन्हें ऐसी प्रतिमा पसंद है, जिसमें गणेशजी की सूंड ऊपर की ओर हो और उनके दोनों पैर आगे की तरफ हों। उन्होंने कहा कि मिट्टी की मूर्ति से पूजा करना श्रेष्ठ माना जाता है, इसलिए वह मिट्टी की प्रतिमा को ही प्राथमिकता देते हैं।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)