एक थप्पड़... और बंगाल की राजनीति में भूचाल!
कोलकाता में रैली के दौरान ममता बनर्जी द्वारा एक कार्यकर्ता को कथित थप्पड़ मारने का मामला राजनीतिक विवाद बन गया है। सौगत रॉय ने उनका बचाव किया, जबकि भारतीय जनता पार्टी ने इस घटना को लेकर मुख्यमंत्री पर तीखा हमला बोला है।
दि राइजिंग न्यूज़ | कोलकाता | 09 जुलाई 2026
कोलकाता में तृणमूल कांग्रेस की रैली के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा एक कार्यकर्ता को कथित रूप से थप्पड़ मारने का मामला राजनीतिक विवाद का विषय बन गया है। तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सौगत रॉय ने ममता बनर्जी का बचाव करते हुए कहा कि वह अपने कार्यकर्ताओं के साथ आत्मीय संबंध रखती हैं, जबकि भारतीय जनता पार्टी ने इस घटना को लेकर मुख्यमंत्री पर तीखा हमला बोला है। तृणमूल कांग्रेस का दावा है कि भीड़भाड़ और अफरा-तफरी के बीच यह घटना अनजाने में हुई, वहीं विपक्ष इसे मुख्यमंत्री के व्यवहार पर गंभीर सवाल बता रहा है।
ममता बनर्जी के कथित थप्पड़ पर छिड़ा राजनीतिक विवाद
इस घटना का दृश्य विभिन्न माध्यमों पर तेजी से प्रसारित होने लगा, जिसके बाद विपक्ष ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया। भारतीय जनता पार्टी ने इसे सत्ता के अहंकार का उदाहरण बताया, जबकि तृणमूल कांग्रेस ने पूरे घटनाक्रम को अलग परिस्थिति में हुई अनजानी घटना बताया है।घटना के सामने आने के बाद राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया। दोनों पक्ष अपने-अपने तर्कों के साथ जनता के सामने आए हैं। इस विवाद ने एक बार फिर पश्चिम बंगाल की राजनीति को गरमा दिया है और इस पर लगातार प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
सौगत रॉय ने किया ममता बनर्जी का बचाव
तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद सौगत रॉय ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का खुलकर समर्थन किया। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा हुआ भी है तो इसमें असामान्य बात नहीं है। उनके अनुसार ममता बनर्जी अपने कार्यकर्ताओं के साथ पारिवारिक संबंध रखती हैं और उनके प्रति स्नेह भी उसी प्रकार व्यक्त करती हैं।सौगत रॉय ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री अपने कार्यकर्ताओं के साथ जिस प्रकार व्यवहार करना उचित समझें, वह उनका विषय है। उनके इस बयान के बाद विपक्ष ने और अधिक तीखी प्रतिक्रिया दी तथा इसे लोकतांत्रिक मर्यादा के विपरीत बताया। राजनीतिक गलियारों में उनके बयान पर भी व्यापक चर्चा शुरू हो गई है।
भारतीय जनता पार्टी ने मुख्यमंत्री पर साधा निशाना
भारतीय जनता पार्टी की नेता केया घोष ने इस घटना को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि राज्य की मुख्यमंत्री एक वरिष्ठ नेता हैं, लेकिन हाल के समय में उनकी राजनीतिक निराशा लगातार बढ़ती दिखाई दे रही है। उनके अनुसार यही निराशा अब सार्वजनिक व्यवहार में भी दिखाई देने लगी है।भारतीय जनता पार्टी का कहना है कि जनता के बीच इस प्रकार का व्यवहार किसी भी जनप्रतिनिधि के लिए उचित नहीं माना जा सकता। विपक्ष ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार जनता और अपने ही कार्यकर्ताओं के साथ सम्मानजनक व्यवहार करने में असफल साबित हो रही है। इस मुद्दे को लेकर विपक्ष ने सरकार से जवाब भी मांगा है।
आखिर क्या हुआ था रैली के दौरान
बताया जा रहा है कि कोलकाता के कालीघाट क्षेत्र में आयोजित रैली के दौरान अचानक भीड़ बढ़ जाने से अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। कई लोगों की तबीयत बिगड़ने लगी, जिसके बाद उन्हें अस्पताल भेजने की व्यवस्था की जा रही थी। इसी दौरान भीड़ को पीछे हटाने के प्रयास में यह कथित घटना हुई।तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि मुख्यमंत्री भीड़ को नियंत्रित करने और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का प्रयास कर रही थीं। पार्टी का दावा है कि किसी कार्यकर्ता को जानबूझकर थप्पड़ नहीं मारा गया, बल्कि भीड़ और अव्यवस्था के बीच अनजाने में ऐसा हुआ। हालांकि विपक्ष इस स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं है।
बारुईपुर घटना के विरोध में निकाली गई थी रैली
यह रैली बारुईपुर में एक नाबालिग के साथ दुष्कर्म और हत्या की घटना के विरोध में आयोजित की गई थी। तृणमूल कांग्रेस के छात्र और युवा संगठनों ने इस प्रदर्शन का आयोजन किया था। बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और समर्थक इसमें शामिल हुए थे।रैली के दौरान लगातार नारेबाजी और भीड़ के कारण कई स्थानों पर तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। प्रशासन और पुलिस व्यवस्था के बावजूद कार्यक्रम के दौरान अव्यवस्था की खबरें भी सामने आईं। इसी माहौल में थप्पड़ विवाद ने पूरे कार्यक्रम का केंद्र बिंदु बना दिया।
तृणमूल कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी पर लगाए आरोप
तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया कि रैली को न्यायालय से अनुमति प्राप्त थी, लेकिन इसके बावजूद भारतीय जनता पार्टी के समर्थकों ने जुलूस में घुसकर माहौल बिगाड़ने का प्रयास किया। पार्टी का दावा है कि इसी कारण स्थिति नियंत्रण से बाहर हुई और दोनों पक्षों के कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हुई।तृणमूल कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस और सुरक्षा बलों की मौजूदगी के बावजूद समय रहते हालात पर पूरी तरह नियंत्रण नहीं किया जा सका। पार्टी के अनुसार कई कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट हुई, जबकि विपक्ष ने इन आरोपों को निराधार बताया है। इस पूरे मामले को लेकर राजनीतिक विवाद लगातार गहराता जा रहा है।