सीमा पर बड़ा एक्शन प्लान, 5 साल के जमीन रिकॉर्ड की होगी जांच

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने त्रिपुरा में भारत-बांग्लादेश सीमा सुरक्षा को लेकर उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में सीमावर्ती क्षेत्रों के पांच वर्षों के भूमि रिकॉर्ड की जांच, जमीन खरीद-बिक्री और बड़े निर्माण कार्यों की निगरानी, आधुनिक कैमरा प्रणाली लागू करने तथा हथियार और नशीले पदार्थों की तस्करी पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए गए।

सीमा पर बड़ा एक्शन प्लान, 5 साल के जमीन रिकॉर्ड की होगी जांच

दि राइजिंग न्यूज़। अगरतला। 07 जून 2026

 भारत-बांग्लादेश सीमा सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने त्रिपुरा में उच्चस्तरीय बैठक की। सीमावर्ती इलाकों में जमीन खरीद-बिक्री, बड़े निर्माण कार्य और वित्तीय गतिविधियों की निगरानी के साथ पिछले 5 वर्षों के भूमि रिकॉर्ड की जांच के निर्देश दिए गए हैं।


भारत-बांग्लादेश सीमा सुरक्षा के लिए नई रणनीति

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने त्रिपुरा के सालबगान में भारत-बांग्लादेश सीमा की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करते हुए कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। बैठक में सीमा पार से होने वाली घुसपैठ, हथियारों की तस्करी, मादक पदार्थों की अवैध आवाजाही और संदिग्ध गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार की गई। गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि सीमा सुरक्षा केवल सीमा सुरक्षा बल की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि पूरे प्रशासन को इसमें सक्रिय भूमिका निभानी होगी।


पूरे प्रशासन को मिलेगी जिम्मेदारी

बैठक में कहा गया कि जिला प्रशासन, पुलिस विभाग, राजस्व विभाग, स्थानीय निकायों और ग्राम स्तर तक के अधिकारियों को सीमा सुरक्षा व्यवस्था से जोड़ा जाएगा। अमित शाह ने निर्देश दिए कि सीमावर्ती क्षेत्रों में एक ऐसा सुरक्षा तंत्र विकसित किया जाए जिसमें हर सरकारी विभाग समन्वय के साथ काम करे। इसका उद्देश्य सीमा के आसपास किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तत्काल पहचान और कार्रवाई सुनिश्चित करना है।


लागू होगा संपूर्ण क्षेत्रीय सुरक्षा मॉडल

सरकार अब केवल तारबंदी और चौकियों पर निर्भर नहीं रहना चाहती। बैठक में "संपूर्ण क्षेत्रीय सुरक्षा मॉडल" लागू करने पर जोर दिया गया। इस मॉडल के तहत सीमा से जुड़े गांवों, बस्तियों और संवेदनशील इलाकों को सुरक्षा तंत्र का हिस्सा बनाया जाएगा। स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ाई जाएगी और उन्हें सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रमों से जोड़ा जाएगा।


सीमा क्षेत्र के लोगों को दी जाएगी विशेष प्रशिक्षण

बैठक में निर्णय लिया गया कि सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को विशेष प्रशिक्षण शिविरों के माध्यम से जागरूक किया जाएगा। उन्हें हथियारों की तस्करी, नशीले पदार्थों की अवैध गतिविधियों, संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान और सुरक्षा एजेंसियों को सूचना देने की प्रक्रिया के बारे में प्रशिक्षित किया जाएगा। सरकार का मानना है कि स्थानीय नागरिक सीमा सुरक्षा की सबसे मजबूत कड़ी बन सकते हैं।


तकनीक से मजबूत होगी निगरानी

सीमा सुरक्षा को आधुनिक बनाने के लिए निगरानी प्रणाली को भी मजबूत किया जाएगा। गृह मंत्रालय द्वारा विकसित विशेष निगरानी कैमरा प्रणाली को पहली बार त्रिपुरा में लागू करने का फैसला लिया गया है। सीमा सुरक्षा बल के पुराने कैमरों को उन्नत तकनीक से लैस किया जाएगा और उन्हें जिला प्रशासन की निगरानी प्रणाली से जोड़ा जाएगा। इससे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों तक पहुंच सकेगी।


हथियार और नशीले पदार्थों की तस्करी पर सख्ती

बैठक में सीमा पार से होने वाली अवैध गतिविधियों पर कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए गए। गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि हथियारों की तस्करी, नशीले पदार्थों के कारोबार और संगठित अपराध से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरती जाएगी। सभी एजेंसियों को समन्वित अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं।


जमीन खरीद-बिक्री पर रहेगी विशेष नजर

बैठक का सबसे महत्वपूर्ण निर्णय सीमावर्ती क्षेत्रों में जमीन खरीद-बिक्री और बड़े निर्माण कार्यों की निगरानी को लेकर रहा। सरकार का मानना है कि कई बार संदिग्ध तत्व सीमा के नजदीक जमीन खरीदकर या बड़े निर्माण कार्यों के माध्यम से अपनी गतिविधियां संचालित करने की कोशिश करते हैं। ऐसे मामलों की पहचान के लिए विशेष निगरानी तंत्र विकसित किया जाएगा।


पांच साल के भूमि रिकॉर्ड की होगी गहन जांच

गृह मंत्री ने सीमावर्ती क्षेत्रों के पिछले पांच वर्षों के भूमि रिकॉर्ड की विस्तृत जांच कराने के निर्देश दिए हैं। जांच के दौरान यह देखा जाएगा कि किन लोगों ने जमीन खरीदी, किन उद्देश्यों से खरीदी गई और वहां किस प्रकार के निर्माण कार्य किए गए। आवश्यकता पड़ने पर संदिग्ध मामलों की अलग से जांच भी कराई जाएगी।


संदिग्ध वित्तीय गतिविधियां भी जांच के दायरे में

सरकार ने केवल भूमि रिकॉर्ड ही नहीं बल्कि वित्तीय लेनदेन पर भी नजर रखने का फैसला किया है। नकली मुद्रा, संदिग्ध धन हस्तांतरण और अवैध आर्थिक गतिविधियों की पहचान के लिए विभिन्न एजेंसियां मिलकर काम करेंगी। उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सीमा क्षेत्रों का इस्तेमाल किसी भी अवैध नेटवर्क द्वारा न किया जा सके।


सीमा क्षेत्रों को सुरक्षित और मजबूत बनाने पर फोकस

बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों में सुरक्षा का भरोसा बढ़ाया जाए। केंद्र और राज्य सरकार की एजेंसियां मिलकर ऐसी व्यवस्था तैयार करेंगी जिससे सीमा क्षेत्र न केवल सुरक्षित रहें, बल्कि वहां रहने वाले नागरिक भी खुद को अधिक सुरक्षित और सशक्त महसूस करें।