तेल नहीं, बाईस करोड़ टन जस्ता-सीसा का खजाना!

ईरान के पास बाईस करोड़ टन से अधिक जस्ता और सीसा अयस्क का विशाल भंडार है। विशेषज्ञों का मानना है कि तेल के अलावा इन महत्वपूर्ण खनिजों पर वैश्विक प्रतिस्पर्धा भी ईरान से जुड़े बढ़ते तनाव का एक महत्वपूर्ण कारण हो सकती है।

तेल नहीं, बाईस करोड़ टन जस्ता-सीसा का खजाना!

दि राइजिंग न्यूज़ | तेहरान | 10 जुलाई 2026

दुनिया भर में ईरान की चर्चा अक्सर तेल और हॉर्मुज जलडमरूमध्य तक सीमित रहती है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि देश की विशाल खनिज संपदा भी वैश्विक शक्तियों के लिए उतनी ही महत्वपूर्ण है। ईरान के पास बाईस करोड़ टन से अधिक जस्ता और सीसा अयस्क का भंडार मौजूद है। ऐसे में यह सवाल फिर चर्चा में है कि क्या ईरान को लेकर बढ़ते तनाव के पीछे केवल ऊर्जा संसाधन ही नहीं, बल्कि बहुमूल्य खनिजों पर नियंत्रण की प्रतिस्पर्धा भी एक बड़ा कारण है।


ईरान के विशाल खनिज भंडार पर दुनिया की नजर

ईरान लंबे समय से तेल और प्राकृतिक गैस के कारण वैश्विक राजनीति का केंद्र बना हुआ है, लेकिन अब उसके खनिज संसाधनों की चर्चा भी तेज हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि देश के पास जस्ता, सीसा और तांबे जैसे महत्वपूर्ण खनिजों का विशाल भंडार मौजूद है। आधुनिक उद्योगों, ऊर्जा परियोजनाओं और रक्षा क्षेत्र में इन खनिजों की बढ़ती आवश्यकता के कारण दुनिया की बड़ी शक्तियां इन संसाधनों को रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मान रही हैं। यही वजह है कि ईरान का महत्व केवल ऊर्जा तक सीमित नहीं रह गया है।


प्रतिबंधों के बावजूद खनिज निर्यात जारी

पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों के कारण अमेरिका और यूरोप के बाजार ईरान के लिए लगभग बंद हैं। इसके बावजूद ईरान ने एशियाई देशों के साथ अपने व्यापारिक संबंध मजबूत बनाए हुए हैं। विशेष रूप से चीन के माध्यम से ईरान अपने खनिजों का निर्यात लगातार जारी रखे हुए है। इससे स्पष्ट होता है कि अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बावजूद ईरान ने अपने खनिज व्यापार को पूरी तरह रुकने नहीं दिया है।


विशेषज्ञों ने बताई संघर्ष की दूसरी बड़ी वजह

विदेश मामलों के जानकारों का मानना है कि ईरान को लेकर चल रहा तनाव केवल तेल या हॉर्मुज जलडमरूमध्य तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार यह संघर्ष विचारधारा, सामरिक प्रभाव और महत्वपूर्ण खनिज संसाधनों पर बढ़ती वैश्विक प्रतिस्पर्धा से भी जुड़ा हुआ है। आने वाले वर्षों में उद्योगों और नई तकनीकों के लिए इन खनिजों की मांग तेजी से बढ़ने वाली है। इसी कारण ईरान की खदानें विश्व की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।


बाईस करोड़ टन से अधिक जस्ता-सीसा का विशाल भंडार

ईरान के पास बाईस करोड़ टन से अधिक जस्ता और सीसा अयस्क का भंडार मौजूद बताया जाता है। यह विश्व के कुल भंडार का लगभग पांच प्रतिशत माना जाता है। इसी कारण ईरान एशिया के प्रमुख जस्ता और सीसा उत्पादक देशों में शामिल हो चुका है। इन खनिजों की उपलब्धता ने ईरान को वैश्विक खनिज मानचित्र पर विशेष स्थान दिलाया है।


इन खदानों से मिलती है सबसे बड़ी ताकत

ईरान की अंगौरान और मेहदियाबाद खदानें देश की सबसे महत्वपूर्ण खनन परियोजनाओं में गिनी जाती हैं। अंगौरान खदान को पश्चिम एशिया की सबसे बड़ी जस्ता और सीसा खदानों में शामिल किया जाता है। यहां बड़ी मात्रा में उच्च गुणवत्ता वाला अयस्क उपलब्ध है, जिससे ईरान के खनन उद्योग को लगातार मजबूती मिल रही है। यही खदानें देश की निर्यात क्षमता को भी बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।


हर वर्ष अरबों रुपये का खनिज निर्यात

ईरान प्रतिवर्ष बड़ी मात्रा में जस्ता धातु का उत्पादन करता है, जिसका अधिकांश हिस्सा अनेक देशों को निर्यात किया जाता है। इस निर्यात से देश को भारी विदेशी आय प्राप्त होती है। ऊर्जा क्षेत्र के साथ-साथ खनिज उद्योग भी ईरान की अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार बन चुका है। यही कारण है कि खनिज संपदा को लेकर अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ती दिखाई दे रही है।


चीन और रूस बने सबसे बड़े सहयोगी

आर्थिक प्रतिबंधों के बीच चीन और रूस ईरान के सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार बनकर उभरे हैं। चीन ईरान से बड़ी मात्रा में खनिज खरीदता है और धातु प्रसंस्करण से जुड़ी परियोजनाओं में भी सहयोग करता है। वहीं रूस निवेश और नई खनन परियोजनाओं में साझेदारी बढ़ाने की दिशा में सक्रिय माना जाता है। इन दोनों देशों के सहयोग ने ईरान के खनिज क्षेत्र को नई मजबूती दी है।


जस्ता और सीसा क्यों हैं इतने महत्वपूर्ण

जस्ता और सीसा आधुनिक उद्योगों की सबसे आवश्यक धातुओं में शामिल हैं। सीसा का उपयोग मुख्य रूप से बैटरियां, ऊर्जा भंडारण, चिकित्सा उपकरण और विकिरण सुरक्षा से जुड़े कार्यों में किया जाता है। वहीं जस्ता का सबसे अधिक उपयोग लोहे और इस्पात को जंग से बचाने, पीतल बनाने, रंग, औषधि तथा अनेक औद्योगिक उत्पादों के निर्माण में होता है। इन धातुओं की बढ़ती मांग के कारण भविष्य में इनका रणनीतिक महत्व और अधिक बढ़ने की संभावना है।


वैश्विक राजनीति पर पड़ सकता है गहरा प्रभाव

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि खनिज संसाधनों को लेकर प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ती रही तो पश्चिम एशिया की राजनीति और अधिक जटिल हो सकती है। ऊर्जा संसाधनों के साथ-साथ महत्वपूर्ण खनिजों पर नियंत्रण भी विश्व शक्तियों की प्राथमिकता बनता जा रहा है। ऐसे में ईरान आने वाले समय में केवल तेल उत्पादक देश ही नहीं, बल्कि खनिज संपदा के कारण भी वैश्विक राजनीति का प्रमुख केंद्र बना रह सकता है।