इटावा में 17वां चंबल फिल्म फेस्टिवल:30 से ज्यादा कृतियों का प्रदर्शन, उत्कृष्ट कलाकारों को मिला सम्मान
इटावा में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) के नवीन सभागार में शनिवार और रविवार को 17वें चंबल इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल का आयोजन हुआ। दो दिवसीय समारोह में एक दर्जन से अधिक देशों की 30 से ज्यादा फिल्मों का प्रदर्शन किया गया। अंतरराष्ट्रीय और भारतीय श्रेणियों में विभिन्न फिल्मों, निर्देशकों और कलाकारों को पुरस्कार दिए गए। आयोजन चंबल संग्रहालय, पंचनद और ईऑन फिल्म्स की संयुक्त पहल पर हुआ। समारोह में कनाडा, ग्रीस, मैक्सिको, पाकिस्तान, दक्षिण कोरिया, स्विट्जरलैंड, ताइवान, अमेरिका और ब्रिटेन सहित विभिन्न देशों की फिल्मों की स्क्रीनिंग की गई। फीचर फिल्म, डॉक्यूमेंट्री, लघु फिल्म, एनिमेशन, वेब सीरीज और संगीत वीडियो श्रेणियों की प्रस्तुतियों में सामाजिक सरोकारों, मानवीय संवेदनाओं और सांस्कृतिक विविधता से जुड़े विषय सामने आए। अंतरराष्ट्रीय श्रेणी में ‘कैन आई हैव दिस डांस?’ को सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म और ‘बर्नार्ड एंड रश्मा: अ स्विस-इंडियन स्टोरी’ को सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री का पुरस्कार मिला। ‘रोहिड़ा’ को सर्वश्रेष्ठ लघु फिल्म और ‘मिस यू इन डांसिंग क्रॉस-स्टिच’ को सर्वश्रेष्ठ एनिमेशन फिल्म चुना गया। ‘द नॉर्मल एमएफर’ को सर्वश्रेष्ठ वेब सीरीज और ‘नी कोसम’ को सर्वश्रेष्ठ संगीत वीडियो का पुरस्कार दिया गया। भारतीय फीचर फिल्म श्रेणी में ‘अरुलवान’ को सर्वश्रेष्ठ फिल्म और ‘आदिशेष’ को सर्वश्रेष्ठ क्षेत्रीय फिल्म चुना गया। ‘आदिशेष’ के लिए अरुण नलावड़े को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता और ‘अरुलवान’ के लिए कृतिका को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार मिला। ‘रेड- द कलर ऑफ साइलेंस’ को सर्वश्रेष्ठ लघु फिल्म और इसी फिल्म के लिए संजय मैथ्यू को सर्वश्रेष्ठ निर्देशक चुना गया। ‘पहला तिरंगा (फर्स्ट ट्राइकलर)’ को सर्वश्रेष्ठ संगीत वीडियो का पुरस्कार मिला। फेस्टिवल के दौरान चंबल संग्रहालय, पंचनद की विशेष प्रदर्शनी भी लगाई गई। इसमें क्षेत्र के इतिहास, संस्कृति और स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े दस्तावेज, तस्वीरें, पांडुलिपियां, पुरानी पत्र-पत्रिकाएं और पुस्तकें प्रदर्शित की गईं। प्रदर्शनी के जरिए युवाओं को चंबल की सांस्कृतिक विरासत से परिचित होने का अवसर मिला। समारोह समिति के अध्यक्ष प्रो. डॉ. मोहन दास ने कहा कि फिल्म फेस्टिवल का उद्देश्य नई कहानियों और प्रतिभाओं को मंच देना तथा सिनेमा के माध्यम से विभिन्न संस्कृतियों को जोड़ना है। कार्यक्रम का संचालन चंबल म्यूजियम के संरक्षक डॉ. कमल कुशवाहा ने किया। लोकगायक सुनील पंडित ने स्थानीय भाषा में गीत प्रस्तुत किए। समारोह में विभिन्न फिल्मों के चयन और प्रदर्शन को लेकर फिल्मकारों ने भी अनुभव साझा किए।
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