जागरूकता रैली बनी आफत, डेढ़ घंटे जाम में कराहा शहर:7 एंबुलेंस फसी, कचहरी के आसपास के रास्तों पर वाहनों की कतारें, दौड़ी ट्रैफिक पुलिस
मेरठ शहर में बुधवार को निकाली गई एक जागरूकता रैली लोगों के लिए मुसीबत बन गई। रैली के चलते कचहरी और आसपास के प्रमुख मार्गों पर करीब डेढ़ घंटे तक भीषण जाम लगा रहा। हालात ऐसे हो गए कि मरीजों को लेकर जा रही और मरीजों को लेने के लिए निकलीं सात एंबुलेंस भी जाम में फंस गईं। पुलिस लाइन रोड से लेकर नेहरू रोड, वेस्टर्न कचहरी रोड, मेघदूत चौराहा, अंबेडकर चौराहा और सहकारी बैंक चौराहे तक वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। फूलबाग कॉलोनी चौराहे से लेकर इवज चौराहा और बच्चा पार्क तक यातायात प्रभावित रहा। हैरानी की बात यह रही कि इतने बड़े जाम के दौरान प्रमुख चौराहों पर इक्का-दुक्का ट्रैफिक पुलिसकर्मी ही नजर आए। जब जाम की सूचना पर अफसरों के फोन घनघनाने लगे, तब ट्रैफिक पुलिस सक्रिय हुई और टीमों को मौके पर भेजा गया। एंबुलेंस फंसीं, मरीजों की बढ़ी परेशानी
जाम का सबसे गंभीर पहलू एंबुलेंस का फंसना रहा। इनमें कुछ एंबुलेंस मरीजों को लेकर जा रही थीं, जबकि कुछ को कॉल मिलने के बाद मरीजों को लेने पहुंचना था। सड़कों पर वाहनों की लंबी कतारों के कारण एंबुलेंस को रास्ता मिलने में परेशानी हुई। ऐसे में सवाल उठने लगे कि जब शहर के प्रमुख मार्गों पर यातायात का दबाव बढ़ रहा था, तब एंबुलेंस के लिए रास्ता सुनिश्चित करने की व्यवस्था क्यों नहीं दिखाई दी। जागरूकता के उद्देश्य से निकाली गई रैली के कारण आम लोगों के साथ मरीजों को भी परेशानी झेलनी पड़ी। प्रमुख चौराहों पर बिगड़े हालात
रैली के दौरान पुलिस लाइन रोड, नेहरू रोड और वेस्टर्न कचहरी रोड पर वाहनों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई। मेघदूत चौराहा, अंबेडकर चौराहा और सहकारी बैंक चौराहे पर भी जाम के हालात बने रहे।
इसका असर फूलबाग कॉलोनी चौराहे तक पहुंच गया। इवज चौराहा और बच्चा पार्क की तरफ भी वाहन जाम में फंसे रहे। एक मार्ग पर यातायात का दबाव बढ़ने से आसपास के रास्तों पर भी वाहनों की रफ्तार थम गई। लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए इंतजार करना पड़ा। फोन घनघनाए तो हरकत में आई ट्रैफिक पुलिस
जाम के दौरान यातायात व्यवस्था संभालने के लिए पुलिसकर्मियों की पर्याप्त मौजूदगी नहीं दिखने पर लोगों ने नाराजगी जताई। जब जाम की शिकायतें अफसरों तक पहुंचीं और उनके फोन घनघनाने लगे, तब ट्रैफिक पुलिस हरकत में आई।
ट्रैफिक प्रभारी संतोष कुमार सिंह टीम के साथ मेघदूत चौराहे पर पहुंचे और यातायात सुचारु कराने का प्रयास किया। रैली निकलने के बाद भी जाम से राहत मिलने में समय लगा। लोगों को करीब एक घंटे तक और परेशानी का सामना करना पड़ा। रैली का रूट तय था तो ट्रैफिक प्लान कहां था?
जाम में फंसे लोग यातायात प्रबंधन पर सवाल उठाते नजर आए। उनका कहना था कि इस तरह की रैलियों का रूट और समय पहले से निर्धारित होता है। ऐसे में संबंधित मार्गों पर यातायात का दबाव बढ़ने की आशंका भी पहले से रहती है।
इसके बावजूद प्रमुख चौराहों पर पर्याप्त ट्रैफिक पुलिसकर्मी क्यों नहीं तैनात थे? क्या रैली के लिए यातायात डायवर्जन की व्यवस्था बनाई गई थी?
यदि प्लान तैयार था तो उसे जमीन पर लागू क्यों नहीं किया गया? लोगों का सवाल था कि जागरूकता फैलाने के लिए निकाली गई रैली के कारण आम जनता और मरीजों को परेशानी उठानी पड़े, तो यातायात प्रबंधन की जिम्मेदारी कौन लेगा?
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