जापान ने भारतीय आमों पर लगाया बैन...

जापान ने भारतीय आमों के आयात पर 20 साल बाद फिर प्रतिबंध लगा दिया है। जांच टीम को भारतीय ट्रीटमेंट फैसिलिटी में तकनीकी खामियां मिलीं, जिसके बाद यह फैसला लिया गया। इससे भारतीय निर्यातकों और आम कारोबारियों में चिंता बढ़ गई है।

जापान ने भारतीय आमों पर लगाया बैन...

दि राइजिंग न्यूज़। नई दिल्ली। 29 मई 2026

जांच में खामियां मिलने के बाद भारत के आमों पर सख्ती, एक्सपोर्टर्स में हड़कंप

भारत के आमों को दुनिया भर में पसंद किया जाता है, लेकिन अब जापान ने भारतीय आमों के आयात पर बड़ा प्रतिबंध लगा दिया है। करीब 20 साल बाद जापान ने एक बार फिर भारत से आने वाले आमों पर बैन लगाया है, जिससे निर्यातकों और किसानों में चिंता बढ़ गई है। जापान की जांच टीम ने भारत की ट्रीटमेंट फैसिलिटी में गंभीर खामियां मिलने का दावा किया है। इसके बाद जापान ने साफ कर दिया कि 25 मार्च 2026 या उसके बाद जारी निरीक्षण प्रमाणपत्र वाले आमों की खेप अब स्वीकार नहीं की जाएगी।


जांच टीम को मिलीं कई खामियां

रिपोर्ट्स के मुताबिक जापानी क्वारंटीन अधिकारियों की टीम ने मार्च 2026 में उत्तर प्रदेश के रहमानपुर स्थित भारतीय ट्रीटमेंट फैसिलिटी का निरीक्षण किया था। जांच के दौरान फ्यूमिगेशन और डिसइंफेक्शन सिस्टम में कई तकनीकी कमियां सामने आईं। जापानी अधिकारियों ने इन खामियों को गंभीर मानते हुए भारतीय आमों के आयात पर रोक लगाने का फैसला कर लिया। इस फैसले के बाद भारतीय आम निर्यातकों में हड़कंप मच गया है।


केसर, अल्फांसो और लंगड़ा आम पर असर

भारत से हर साल जापान में केसर, अल्फांसो, लंगड़ा और बंगनपल्ली जैसे प्रीमियम आम भेजे जाते हैं। जापान अपने सख्त गुणवत्ता मानकों के लिए जाना जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए भारत ने वर्षों पहले वेपर हीट ट्रीटमेंट यानी वीएचटी सिस्टम विकसित किया था ताकि भारतीय आम अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों को पूरा कर सकें। 2007 में तिरुपति में पहला बड़ा वीएचटी प्लांट शुरू किया गया था। इसके बाद कई आधुनिक सुविधाएं बनाई गईं।


निर्यातकों ने फैसले पर उठाए सवाल

उत्तर प्रदेश के निर्यातक और डॉ नेचर कंपनी के मालिक अकरम बेग ने जापान के फैसले पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि अगर किसी एक फैसिलिटी में कमी मिली है तो पूरे सिस्टम को कैसे खारिज किया जा सकता है। उनका कहना है कि भारतीय निर्यातक लंबे समय से जापानी नियमों का पालन करते आ रहे हैं। निर्यातकों का आरोप है कि इस फैसले से तकनीकी मानकों को लेकर नई बहस शुरू हो सकती है।


भारतीय आम उद्योग को बड़ा झटका

भारत के लिए जापान भले सबसे बड़ा बाजार नहीं है, लेकिन यह प्रीमियम कैटेगरी का बेहद महत्वपूर्ण बाजार माना जाता है। पिछले साल भारत ने जापान को करीब 20 लाख डॉलर के आम निर्यात किए थे, जिनमें गुजरात के केसर आम की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा थी। ऐसे समय में जब घरेलू बाजार में भी कारोबार दबाव में है, जापान का यह फैसला भारतीय आम उद्योग के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।


सरकार ने शुरू की बातचीत

मैंगो ग्रोवर एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष एस इंसराम अली ने बताया कि केंद्र सरकार इस मुद्दे पर जापानी अधिकारियों से बातचीत कर रही है। हालांकि आम का सीजन अंतिम चरण में पहुंच चुका है, इसलिए जल्द राहत मिलने की उम्मीद कम दिखाई दे रही है।


1986 में भी लगा था बैन

यह पहली बार नहीं है जब जापान ने भारतीय आमों पर रोक लगाई हो। इससे पहले 1986 में फल मक्खी संक्रमण का खतरा बताते हुए जापान ने भारतीय आमों पर प्रतिबंध लगाया था। करीब 20 साल बाद 2006 में यह प्रतिबंध हटाया गया था और फिर भारतीय आमों का निर्यात शुरू हुआ था। अब दो दशक बाद फिर से लगा यह बैन भारतीय आम उद्योग के लिए नई चुनौती बन गया है। जापान का यह फैसला सिर्फ आम व्यापार पर असर नहीं डालता, बल्कि यह भारत की कृषि निर्यात व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है। अगर अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों में कहीं भी लापरवाही हुई तो इसका नुकसान सीधे किसानों और निर्यातकों को उठाना पड़ेगा। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या भारत समय रहते अपनी निर्यात व्यवस्था को सुधार पाएगा या फिर दूसरे देश भी ऐसे कदम उठाने लगेंगे।