जौनपुर में श्रीराम कथा के चौथे दिन राम-सीता विवाह:आचार्य शांतनु महाराज ने जनकपुर, पुष्पवाटिका और धनुष यज्ञ की कथा सुनाई
जौनपुर के बीआरपी मैदान में सेवा भारतीय संस्थान काशी प्रान्त के तत्वावधान में समाजसेवी ज्ञान प्रकाश सिंह के द्वारा आयोजित नौ दिवसीय श्री राम कथा के चौथे दिन शनिवार को दोपहर 3 बजे से 7:30 बजे तक भव्य आयोजन हुआ। कथा व्यास आचार्य शांतनु महाराज ने अपने प्रेरणादायक प्रवचनों से भगवान राम और माता सीता के पावन प्रसंगों को विस्तार से सुनाया। आज की कथा में जनकपुर की कथा के साथ आचार्य शांतनु महाराज ने भगवान राम, लक्ष्मण और गुरुदेव विश्वामित्र के जनकपुर जाने की कथा सुनाई। जनकपुर को भक्ति का प्रतीक बताते हुए उन्होंने कहा कि भक्ति का मार्ग गुरु के सानिध्य में ही तय होता है। भगवान के रूप को देखकर जनकपुरवासी आनंदित हो उठे। देखें, 5 तस्वीरें… पुष्पवाटिका भक्ति और ईश्वर का पहला मिलन पुष्पवाटिका के प्रसंग में महाराज ने बताया कि यही वह स्थान है, जहां भगवान और भक्ति का पहला मिलन हुआ। उन्होंने इसे संतों की सभा का प्रतीक बताया। राम और सीता के किशोरावस्था के इस प्रसंग में युवाओं को मर्यादा और गुणों का महत्व समझाया। धनुष यज्ञ के दौरान कई राजाओं ने धनुष तोड़ने का प्रयास किया, लेकिन असफल रहे। भगवान राम ने सहजता से धनुष तोड़कर यह संदेश दिया कि अहंकार का अंत केवल ईश्वर कर सकते हैं। जनकपुर में आनंद का माहौल छा गया जब राम-सीता का विवाह संपन्न हुआ। जानकी जी की विदाई पर महाराज ने कहा, बेटियां घर की लक्ष्मी होती हैं, और विदाई का क्षण पिता के लिए सबसे कठिन होता है।
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