झांसी में सड़कों पर उतरे किसान, सड़क पर लगा जाम:कलेक्ट्रेट में धरने पर बैठे लोग बोले-आवास विकास की योजना वापस नहीं की तो चुनाव बहिष्कार करेंगे
झांसी में आवास विकास परिषद की योजना-4 के विरोध में किसानों का आंदोलन तेज हो गया है। शनिवार को सैकड़ों किसान हाथों में तख्तियां लेकर इलाइट चौराहे पहुंचे। यहां से नारेबाजी करते हुए कलेक्ट्रेट तक पैदल मार्च किया। किसान अपनी जमीन बचाने और योजना निरस्त करने की मांग कर रहे थे। प्रदर्शन के चलते सड़कों पर जाम की स्थिति बन गई और यातायात प्रभावित हुआ। दरअसल, आवास विकास परिषद पैरामेडिकल कॉलेज के पास 1044 एकड़ जमीन पर नई टाउनशिप विकसित करने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए टांकोरी, मुस्तरा, कोछाभांवर और पिछोर गांवों की जमीन प्रस्तावित है। परिषद की ओर से भूमि अधिग्रहण की अधिसूचना जारी किए जाने के बाद से ही किसान और भू-स्वामी इसका विरोध कर रहे हैं। छह हजार आपत्तियों के बाद भी नहीं थमा विरोध योजना को लेकर पहले भी कई बार विरोध प्रदर्शन हो चुके हैं। जनवरी में आपत्तियों की सुनवाई के दौरान दीनदयाल सभागार में लोगों ने हंगामा किया था। कुछ लोगों ने खुद पर ज्वलनशील पदार्थ डालकर विरोध जताया था। चारों गांवों से करीब छह हजार आपत्तियां मिलने की बात भी सामने आई थी। किसानों का कहना है कि प्रस्तावित जमीन सिंचित, उपजाऊ और बहुफसली है। इसी जमीन से उनके परिवारों का भरण-पोषण होता है। प्रभावित लोगों का यह भी कहना है कि क्षेत्र में पहले से मकान और व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हैं। ऐसे में जमीन का अधिग्रहण उनके सामने आजीविका और आवास का संकट खड़ा कर देगा। फरवरी में भी भू-स्वामियों ने कलक्ट्रेट पहुंचकर ज्ञापन दिया था। जून में राज्यसभा सभापति कार्यालय ने भी इस मामले में शासन से उच्चस्तरीय जांच और आवश्यक कार्रवाई का अनुरोध किया था। इसके बावजूद योजना को लेकर कोई अंतिम समाधान नहीं निकलने से किसानों का विरोध जारी है। शनिवार को एक बार फिर किसानों ने साफ कहा कि वे अपनी जमीनें नहीं देंगे और योजना निरस्त होने तक आंदोलन जारी रखेंगे। अब टाइमलाइन समझें 1044 एकड़ जमीन का मामला: आवास विकास परिषद पैरामेडिकल कॉलेज के पास टांकोरी, मुस्तरा, कोछाभांवर और पिछोर गांवों की जमीन पर नई टाउनशिप विकसित करना चाहता है। करीब छह हजार आपत्तियां: जनवरी 2026 में आपत्तियों की सुनवाई के दौरान विरोध हुआ था। कुछ लोगों ने खुद पर ज्वलनशील पदार्थ डालकर नाराजगी जताई थी। उपजाऊ जमीन का हवाला: किसानों का कहना है कि जमीन सिंचित, बहुफसली और उपजाऊ है। इसी से उनके परिवारों की आजीविका चलती है। पहले भी ज्ञापन और धरना: फरवरी में भू-स्वामियों ने कलक्ट्रेट पहुंचकर योजना निरस्त करने या वैकल्पिक जमीन पर स्थानांतरित करने की मांग की थी।
अक्टूबर में भी धरना: 12 अक्टूबर को गांधी उद्यान में ग्रामीणों ने प्रदर्शन कर योजना निरस्त होने तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दी थी।
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