जज शुभम वर्मा ने राहुल गांधी को किया बरी:2 साल सुनवाई के बाद सुनाया फैसला, दो जजों के सामने 4 बार पेश हुए राहुल

Oct 27, 2026 - 09:37
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जज शुभम वर्मा ने राहुल गांधी को किया बरी:2 साल सुनवाई के बाद सुनाया फैसला, दो जजों के सामने 4 बार पेश हुए राहुल
सुल्तानपुर की MP/MLA कोर्ट ने सोमवार (26 अक्टूबर) को राहुल गांधी को मानहानि मामले में बरी कर दिया। आठ साल चली इस कानूनी प्रक्रिया में वे दो मजिस्ट्रेट के सामने पेश हुए। पहले मजिस्ट्रेट योगेश कुमार ने उन्हें तलब कर जमानत दी थी। आज मजिस्ट्रेट शुभम वर्मा ने राहुल गांधी के बयान दर्ज कर उन्हें बरी किया। वे देवरिया के रहने वाले हैं, उनका जन्म 4 जुलाई 1988 को हुआ था। उन्होंने आर्ट्स में ग्रेजुएशन के बाद कानून पढ़ा। इलाहाबाद हाईकोर्ट के सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, शुभम वर्मा 27 फरवरी 2015 को न्यायिक सेवा में शामिल हुए थे। उन्हें बस्ती के अपर सिविल जज जूनयिर डिवीजन के तौर पर नियुक्ति मिली। 2018 में ट्रांसफर होकर आए थे 2018 में मऊ न्यायिक मजिस्ट्रेट के पद पर ट्रांसफर किया गया। वहां वे बाद में सिविल जज सीनियर डिवीजन बने। 2021 में उन्हें गाजियाबाद में अपर सिविल जज सीनियर डिवीजन सह अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट बनाया गया। शुभम वर्मा 18 अप्रैल 2024 को सुल्तानपुर में सिविल जज सीनियर डिवीजन के पद पर तैनात किए गए। बाद में उन्हें एमपी-एमएलए मामलों की जिम्मेदारी दी गई। 20 जनवरी 2026 को इलाटाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर उन्हें अपर सिविल जज सीनियर डिवीजन सह अपर मुख्य न्यायिक मस्जिट्रेट के पद पर सूचीबद्ध किया गया। ये है पूरा मामला भाजपा नेता विजय मिश्रा ने 4 अगस्त 2018 को राहुल गांधी के खिलाफ शिकायत की थी। आरोप था कि 2018 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान राहुल गांधी ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी, जो मानहानि थी। दो मुचलके पर मिली थी जमानत मामले में तत्कालीन मजिस्ट्रेट योगेश कुमार ने 23 नवम्बर 2023 को जरिए समन राहुल गांधी को तलब किया था। जिसके बाद 20 फरवरी 2024 को राहुल गांधी कोर्ट में हाजिर हुए और 25-25 हजार के दो मुचलके पर उन्हें जमानत मिली। इसी वर्ष 26 जुलाई 2024 को राहुल गांधी पर चार्ज बना और वे दूसरी बार कोर्ट में हाजिर। इस प्रक्रिया के बाद मजिस्ट्रेट योगेश कुमार का ट्रांसफर हो गया और उनके स्थान पर शुभम वर्मा आ गए। उन्हें 17 मई 2024 को एमपी-एमएलए कोर्ट का चार्ज हाईकोर्ट ने दिया था।मजिस्ट्रेट शुभम वर्मा की कोर्ट पर पहली बार राहुल गांधी 20 फरवरी 2026 को 313 का बयान दर्ज कराने आए। और आज दूसरी बार राहुल गांधी पहुंचे तो 16 मिनट की कार्रवाई के बाद मजिस्ट्रेट ने सबूत के अभाव में उन्हें बरी कर दिया। ------ ये खबर भी पढ़ें राहुल गांधी शाह मानहानि केस में 8 साल बाद बरी:जज ने 16 मिनट में फैसला सुनाया, 3 कारण- जिसकी वजह से कोर्ट ने दोषमुक्त किया तारीख- 8 मई 2018। राहुल गांधी ने बेंगलुरु में विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान अमित शाह का नाम लिए बिना कहा कि भाजपा ईमानदार राजनीति की बात करती है, जबकि उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष हत्या के एक मामले में आरोपी रहे हैं। पूरी खबर पढ़ें

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