करंट से घायल को 10 लाख और देने की सिफारिश:पहले मुआवजा मिलने के बाद भी हाईकोर्ट ने आदेश बरकरार रखा

Nov 03, 2026 - 23:48
0
करंट से घायल को 10 लाख और देने की सिफारिश:पहले मुआवजा मिलने के बाद भी हाईकोर्ट ने आदेश बरकरार रखा
बिजली विभाग की लापरवाही से करंट लगने पर घायल हुए व्यक्ति को पहले मुआवजा मिल चुका था। इसके बावजूद मानवाधिकार आयोग उसे 10 लाख रुपए अतिरिक्त मुआवजा देने की संस्तुति कर सकता है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने आयोग के आदेश को बरकरार रखते हुए मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड की याचिका खारिज कर दी। निगम ने आयोग के आदेश को दी थी चुनौती न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया। निगम ने मानवाधिकार आयोग के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें पीड़ित को 10 लाख रुपये अतिरिक्त मुआवजा देने की संस्तुति की गई थी। 2011 में करंट लगने से झुलसा था व्यक्ति मामला वर्ष 2011 का है। एक व्यक्ति बिजली के करंट से झुलस गया था। विद्युत निगम ने वर्ष 2017 में उसके पिता को 65 हजार रुपये और फरवरी 2025 में पीड़ित को एक लाख रुपये मुआवजा दिया था। इसके बाद मानवाधिकार आयोग ने पीड़ित को 10 लाख रुपये अतिरिक्त देने का निर्देश दिया। निगम ने समय-सीमा का दिया था तर्क निगम ने अदालत में दलील दी कि घटना वर्ष 2011 की है, जबकि मानवाधिकार आयोग में शिकायत वर्ष 2024 में दर्ज कराई गई। तय समय-सीमा के बाद शिकायत किए जाने के कारण उस पर विचार नहीं किया जा सकता था। हाईकोर्ट ने निगम की इस दलील को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि मुआवजा नहीं मिलना मानवाधिकारों के उल्लंघन की निरंतरता है। शिकायत दर्ज होने के बाद निगम ने एक लाख रुपये का भुगतान किया, जो परिसीमा अधिनियम के तहत अपनी देनदारी स्वीकार करने के समान है। आयोग की मुआवजा देने की शक्ति अलग खंडपीठ ने कहा कि बिजली वितरण कंपनियों को लाइनों का उचित रखरखाव करना चाहिए, ताकि किसी की जान खतरे में न पड़े। अधिकारियों की लापरवाही से किसी व्यक्ति का करंट से घायल होना उसके मानवाधिकारों का उल्लंघन है। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में मानवाधिकार आयोग अन्य कानूनी उपायों के तहत मिलने वाले मुआवजे के अलावा भी राहत की संस्तुति कर सकता है। मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम के तहत आयोग को मिली यह शक्ति अलग और अतिरिक्त है।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Wow Wow 0
Sad Sad 0
Angry Angry 0

Comments (0)

User