लखनऊ में भक्ति आंदोलन पर राष्ट्रीय सेमिनार का समापन:12 राज्यों के 300 से अधिक शोधार्थियों ने कराया रजिस्ट्रेशन, सामाजिक कुरीतियों को तोड़ने पर जोर
लखनऊ के कालीचरण पीजी कॉलेज में ‘भक्ति आंदोलन और मराठा राज्य शासन पर उसका प्रभाव’ विषय पर आयोजित आईसीएसएसआर प्रायोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का समापन हुआ। अंतिम दिन अकादमिक सत्रों के साथ समापन समारोह आयोजित किया गया। इसमें 12 राज्यों के 300 से अधिक शोधार्थियों ने रजिस्ट्रेशन कराया। समापन समारोह के मुख्य अतिथि डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जेपी पांडेय ने कहा कि भक्ति आंदोलन की शुरुआत जाति व्यवस्था और सामाजिक कुरीतियों को तोड़ने के उद्देश्य से हुई थी। अलवर और नयनार संतों ने इसकी नींव रखी। ज्ञान, कर्म और भक्ति परमात्मा तक पहुंचने के प्रमुख मार्ग हैं। उन्होंने कहा कि निष्कपट भाव से समर्पण करने पर ही ईश्वर की कृपा प्राप्त होती है। जीजाबाई की प्रेरणा से हिंदवी की स्थापना की विशिष्ट अतिथि लखनऊ विश्वविद्यालय के प्राचीन इतिहास विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. प्रशांत श्रीवास्तव ने कहा कि छत्रपति शिवाजी ने माता जीजाबाई की प्रेरणा से हिंदवी स्वराज्य की स्थापना की। समर्थ गुरु रामदास ने शिवाजी के राजनीतिक और आध्यात्मिक गुरु के रूप में मराठा राज्य को दिशा दी और महाराष्ट्र की संस्कृति व सभ्यता के संरक्षण पर जोर दिया। संघर्षशील व्यक्तित्व से प्रेरणा लेने की सीख दी प्रबंध समिति के वरिष्ठ सदस्य और लखनऊ विश्वविद्यालय के पूर्व प्रतिकुलपति प्रो. एमपी सिंह ने विद्यार्थियों को शिवाजी के संघर्षशील व्यक्तित्व से प्रेरणा लेने की सीख दी। प्राचार्य प्रो. चंद्रमोहन उपाध्याय ने कहा कि भक्ति आंदोलन का प्रभाव मराठा संघ राज्य की स्थापना में भी दिखाई दिया। शिवाजी ने सुशासन और महिलाओं के सम्मान को महत्व दिया। प्रबंधक वीके मिश्र ने बताया कि सेमिनार में 12 राज्यों के 15 विश्वविद्यालयों के 300 से अधिक शोधार्थियों और विद्वानों ने पंजीकरण कराया। संयोजिका प्रो. अर्चना मिश्रा ने बताया कि दो दिनों में छह ऑफलाइन और दो ऑनलाइन अकादमिक सत्र हुए। इनमें करीब 100 शोधपत्र प्रस्तुत किए गए।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)