लखनऊ में सिंधी समाज के स्नेह मिलन कार्यक्रम:यूरोपीय निदेशिका ने कहा- ब्रह्माकुमारीज की स्थापना में सिंधी समाज की अहम भूमिका
ब्रह्माकुमारीज की स्थापना से लेकर उसके वैश्विक विस्तार तक सिंधी समाज की अहम भूमिका रही है। संस्था की शुरुआत सिंध प्रांत के कराची से हुई थी। लखनऊ में भी इसकी सेवाओं की नींव सिंधी समाज से जुड़े लोगों ने रखी थी। यह जानकारी शनिवार को सुल्तानपुर रोड स्थित नवनिर्मित राजयोग ट्रेनिंग सेंटर गुलजार उपवन में आयोजित सिंधी समाज के स्नेह मिलन कार्यक्रम में संस्था की अतिरिक्त प्रशासिका प्रमुख एवं यूरोपीय निदेशिका राजयोगिनी जयंती ने दी। उन्होंने बताया कि ब्रह्माकुमारीज के शुरुआती तीन वर्ष कराची में बीते। बाबा ने आध्यात्मिक ज्ञान और ईश्वरीय संदेश के माध्यम से इस आंदोलन की शुरुआत की थी। संस्था की कई वरिष्ठ दादियां सिंध प्रांत से थीं। वे आध्यात्मिक संदेश लेकर अफ्रीका और यूरोप के अलग-अलग देशों में गईं और वहां सेवाकेंद्र स्थापित किए। वर्ष 1950 में पूरा परिवार भारत के माउंट आबू आया। इसके बाद देशभर में संस्था की सेवाओं का विस्तार शुरू हुआ। जयंती दीदी ने बताया कि लखनऊ में ब्रह्माकुमारीज की सेवाओं की शुरुआत दादा राम और सावित्री बहन ने की थी। दोनों सिंधी समाज से जुड़े थे। इस तरह शहर में संस्था की नींव रखने में भी समाज का योगदान रहा। राजयोग से मिल सकती है मानसिक शांति जयंती दीदी ने कहा कि वर्तमान संगमयुग अपने भविष्य को श्रेष्ठ बनाने का अवसर है। इसके लिए पुण्य कर्मों के साथ आध्यात्मिक कमाई भी जरूरी है। आज समाज में हिंसा, तनाव, अशांति और नकारात्मकता बढ़ रही है। ऐसे माहौल में राजयोग और आध्यात्मिक ज्ञान मन को शांति देने में सहायक हो सकते हैं। 120 देशों तक पहुंचा संस्था का संदेश उन्होंने बताया कि ब्रह्माकुमारीज का संदेश अब करीब 120 देशों तक पहुंच चुका है। इसका विस्तार किसी पूर्व निर्धारित योजना के बजाय सत्य धर्म की स्थापना के संकल्प से हुआ है। इसमें लोगों को सेवाकेंद्र पर रहकर राजयोग मेडिटेशन का प्रशिक्षण और अनुभव मिल सकेगा। कार्यक्रम की शुरुआत धनराज ने अतिथियों के स्वागत से की। होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. राहुल रोहित आहूजा ने कहा कि आज मन की बीमारियों का असर शरीर पर भी दिखाई दे रहा है। गायक चांद बजाज ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया।
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