लखनऊ विश्वविद्यालय की कार्यशाला में शहरी विकास पर चर्चा:100 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया, चक्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने पर जोर
लखनऊ विश्वविद्यालय के लोक प्रशासन विभाग की ओर से मंगलवार को अटल सुशासन पीठ के अंतर्गत ‘लचीले, स्मार्ट एवं सतत शहरों की राहें’ विषय पर कार्यशाला-सह-प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। वीकेएन मेनन हॉल में आयोजित कार्यक्रम में 100 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। नियमों का पालन सुनिश्चित करने की जरूरत नगर विकास विभाग के सचिव अनुज कुमार झा ने कहा कि सतत शहरी परिवर्तन के लिए कानूनी और नियामकीय व्यवस्था मजबूत करने, संसाधनों की दक्षता बढ़ाने और नागरिकों के सहयोग से नियमों का पालन सुनिश्चित करने की जरूरत है। उन्होंने चक्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने पर जोर दिया। छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. अमिता कनौजिया ने स्वदेशी पौधरोपण, बरगद के पेड़, हरित गलियारों, कागज रहित कार्यप्रणाली और जल संरक्षण को सतत शहरी जीवन के महत्वपूर्ण उपाय बताया। चार सत्रों में शहरी विकास पर मंथन कार्यशाला में चार तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। इनमें स्मार्ट और लचीले शहरों, एकीकृत शहरी नियोजन एवं स्मार्ट गवर्नेंस, जलवायु अनुकूल नीले-हरित अवसंरचना और सतत अपशिष्ट प्रबंधन पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने कहा कि जल निकायों, आर्द्रभूमियों और हरित क्षेत्रों का संरक्षण शहरों को बाढ़, गर्मी और जल संकट से बचाने में मददगार है। वहीं, कचरे का वैज्ञानिक संग्रहण, पृथक्करण, प्रसंस्करण और पुनर्चक्रण सतत विकास के लिए जरूरी है।
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