लखनऊ अग्निकांड में 18 अधिकारी और इंजीनियर दोषी

लखनऊ के अलीगंज अग्निकांड की जांच में एलडीए के 18 अधिकारी और इंजीनियर दोषी पाए गए हैं। जांच में आवासीय भवन का व्यावसायिक उपयोग, फायर सेफ्टी मानकों की अनदेखी और प्रशासनिक लापरवाही जैसे गंभीर तथ्य सामने आए हैं। रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है।

लखनऊ अग्निकांड में 18 अधिकारी और इंजीनियर दोषी

दि राइजिंग न्यूज़ | लखनऊ | 25 जून 2026

अग्निकांड जांच में बड़ा खुलासा

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में हुए भीषण अग्निकांड की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) की जांच रिपोर्ट में पांच जोनल अधिकारियों समेत कुल 18 अधिकारियों और इंजीनियरों को दोषी पाया गया है। रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की गई है।यह हादसा सोमवार को एक तीन मंजिला इमारत में आग लगने के बाद हुआ था, जिसमें 15 लोगों की मौत हो गई थी।

डेथ ट्रैप बनी थी इमारत

जांच में सामने आया कि जिस इमारत में आग लगी, वह सुरक्षा मानकों के लिहाज से बेहद खतरनाक स्थिति में थी। भवन में आने-जाने के लिए केवल एक ही मुख्य रास्ता था। उसी मार्ग पर एयर कंडीशनर के पैनल, बिजली के तार और अन्य उपकरण लगे हुए थे।आग लगने के बाद यही एकमात्र रास्ता धुएं और आग की चपेट में आ गया, जिससे अंदर मौजूद लोगों के लिए बाहर निकलना लगभग असंभव हो गया।

आवासीय भवन का हो रहा था व्यावसायिक उपयोग

एलडीए की जांच रिपोर्ट के अनुसार भवन का नक्शा आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत किया गया था। लेकिन वास्तविकता में उसका उपयोग व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा था।रिपोर्ट में कहा गया है कि स्वीकृत मानकों और वास्तविक उपयोग के बीच गंभीर अंतर था, जिसे समय रहते रोका नहीं गया।

2016 का ध्वस्तीकरण आदेश भी हुआ था निरस्त

जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि वर्ष 2016 में अवैध निर्माण को लेकर भवन के खिलाफ ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया गया था। बाद में यह आदेश निरस्त कर दिया गया।रिपोर्ट के अनुसार तत्कालीन विहित प्राधिकारी द्वारा यह आदेश रद्द किया गया था, जिसके बाद निर्माण और उपयोग से जुड़े प्रश्नों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी।

फायर सेफ्टी के गंभीर उल्लंघन

जांच में भवन के भीतर अग्नि सुरक्षा मानकों की भारी कमी पाई गई।भवन में धुआं बाहर निकालने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी। आग लगने के बाद कमरों और गलियारों में तेजी से धुआं भर गया, जिससे अधिकांश लोगों की मौत दम घुटने से हुई।एफआईआर और जांच रिपोर्ट के अनुसार भवन में पर्याप्त अग्निशमन उपकरण भी उपलब्ध नहीं थे।

नहीं था कोई इमरजेंसी एग्जिट

रिपोर्ट में कहा गया है कि आकस्मिक स्थिति में बाहर निकलने के लिए कोई वैकल्पिक मार्ग या इमरजेंसी एग्जिट मौजूद नहीं था।भवन में केवल एक प्रवेश और निकास द्वार था, जो हादसे के दौरान पूरी तरह बाधित हो गया। विशेषज्ञों के अनुसार यही स्थिति बड़ी जनहानि का प्रमुख कारण बनी।

असुरक्षित थी बिजली व्यवस्था

जांच में बिजली की वायरिंग और विद्युत उपकरणों की स्थापना को भी सुरक्षा मानकों के विपरीत पाया गया।एसी के बाहरी यूनिट और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण ऐसे स्थानों पर लगाए गए थे जहां आग लगने की स्थिति में जोखिम और बढ़ सकता था।

दीवार तोड़कर किया गया रेस्क्यू

हादसे के दौरान अग्निशमन विभाग और एनडीआरएफ की टीमों को लोगों तक पहुंचने के लिए भवन की दीवार काटनी पड़ी।जांच में माना गया है कि यदि भवन में पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम और वैकल्पिक निकास मार्ग होते तो कई लोगों की जान बचाई जा सकती थी।

दोषियों पर कार्रवाई की तैयारी

एलडीए पहले ही एक जूनियर इंजीनियर और एक असिस्टेंट इंजीनियर को निलंबित कर चुका है। अब जांच रिपोर्ट के आधार पर अन्य अधिकारियों और इंजीनियरों के खिलाफ भी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है।शासन स्तर पर रिपोर्ट का परीक्षण किया जा रहा है और संबंधित विभागों से जवाब मांगा जा सकता है।

रिहायशी क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों पर सवाल

इस हादसे ने शहर में रिहायशी क्षेत्रों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत भवन का लंबे समय तक व्यावसायिक उपयोग कैसे जारी रहा और जिम्मेदार विभागों ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की।लखनऊ अग्निकांड ने भवन सुरक्षा, फायर सेफ्टी और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर एक बार फिर व्यापक बहस छेड़ दी है।