खड़गे परिवार पर जमीन आवंटन को लेकर सियासी संग्राम

कर्नाटक में जमीन आवंटन को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और उनके बेटे प्रियांक खड़गे पर बीजेपी ने गंभीर आरोप लगाए हैं। बीजेपी का दावा है कि खड़गे परिवार से जुड़े ट्रस्ट को करोड़ों रुपये मूल्य की औद्योगिक जमीन आवंटित की गई, जबकि कांग्रेस ने आरोपों को राजनीतिक और निराधार बताया है।

खड़गे परिवार पर जमीन आवंटन को लेकर सियासी संग्राम

दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 25 जून 2026

जमीन आवंटन को लेकर नया राजनीतिक विवाद

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और उनके बेटे प्रियांक खड़गे एक नए राजनीतिक विवाद के केंद्र में आ गए हैं। भारतीय जनता पार्टी ने आरोप लगाया है कि खड़गे परिवार से जुड़े एक ट्रस्ट को कर्नाटक में लगभग 100 करोड़ रुपये मूल्य की औद्योगिक जमीन आवंटित की गई। वहीं कांग्रेस नेताओं ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार और राजनीतिक प्रेरित बताया है।

बीजेपी ने लगाए गंभीर आरोप

बीजेपी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने दावा किया है कि वर्ष 2024 में कर्नाटक इंडस्ट्रियल एरिया डेवलपमेंट बोर्ड द्वारा सिद्धार्थ विहार ट्रस्ट को पांच एकड़ औद्योगिक भूमि आवंटित की गई थी।उनके अनुसार यह जमीन एयरोस्पेस और रक्षा अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों के लिए दी गई थी। बीजेपी का आरोप है कि संबंधित ट्रस्ट का इन क्षेत्रों में कोई उल्लेखनीय अनुभव या पूर्व कार्य रिकॉर्ड नहीं था, फिर भी उसे अत्यंत मूल्यवान भूमि उपलब्ध करा दी गई।

100 करोड़ रुपये मूल्य का दावा

बीजेपी का कहना है कि आवंटित जमीन की वर्तमान बाजार कीमत लगभग 100 करोड़ रुपये के आसपास है। पार्टी ने सवाल उठाया है कि इतनी महत्वपूर्ण औद्योगिक भूमि किसी ऐसी संस्था को क्यों दी गई, जिसका संबंधित क्षेत्र में कोई स्थापित कार्य इतिहास नहीं है।पार्टी नेताओं का आरोप है कि आवंटन प्रक्रिया में प्रभाव और राजनीतिक पहुंच का उपयोग किया गया।

ट्रस्ट को लेकर उठे सवाल

बीजेपी ने दावा किया है कि सिद्धार्थ विहार ट्रस्ट को मिले लाभ की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। पार्टी का कहना है कि इस प्रकार की भूमि उन संस्थाओं को मिलनी चाहिए जो वास्तव में अनुसंधान और विकास गतिविधियों में सक्रिय रूप से कार्यरत हों।भंडारी ने यह भी संकेत दिया कि आने वाले समय में ट्रस्ट से जुड़े अन्य मामलों को भी सार्वजनिक किया जा सकता है।

कांग्रेस ने आरोपों को बताया बेबुनियाद

बीजेपी के आरोपों के बाद प्रियांक खड़गे ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए आरोपों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि बीजेपी केवल राजनीतिक लाभ और अपने वैचारिक समर्थकों को संतुष्ट करने के लिए ऐसे दावे कर रही है।प्रियांक खड़गे ने कहा कि यदि किसी प्रकार की अनियमितता हुई होती तो वर्षों से सत्ता में मौजूद केंद्र सरकार अब तक कार्रवाई कर चुकी होती।

दस्तावेज सार्वजनिक होने का दावा

प्रियांक खड़गे ने कहा कि संबंधित सभी दस्तावेज सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हैं और वह किसी भी मंच पर इस विषय पर चर्चा करने के लिए तैयार हैं।उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि विपक्षी दल लगातार आरोप लगा रहे हैं, लेकिन अब तक किसी सक्षम एजेंसी द्वारा कोई दोष सिद्ध नहीं किया गया है।

अदालत तक पहुंचा मामला

बीजेपी के अनुसार जमीन आवंटन से जुड़ा मामला न्यायिक प्रक्रिया तक पहुंच चुका है। हालांकि अभी तक किसी अदालत द्वारा इस मामले में अंतिम निर्णय नहीं दिया गया है।कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर मामले की स्थिति को लेकर आगे की कार्रवाई पर निगाहें बनी हुई हैं।

आरोप और जवाबी आरोपों के बीच सियासत तेज

जमीन आवंटन विवाद ने कर्नाटक और राष्ट्रीय राजनीति में नया राजनीतिक मुद्दा खड़ा कर दिया है। बीजेपी इसे कथित सत्ता के दुरुपयोग का मामला बता रही है, जबकि कांग्रेस इसे राजनीतिक बदनाम करने की कोशिश करार दे रही है।फिलहाल दोनों पक्ष अपने-अपने दावों पर कायम हैं और मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी लगातार जारी है। किसी भी आरोप की पुष्टि या खंडन संबंधित जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।