ममता बनर्जी को एक और बड़ा झटका

तृणमूल कांग्रेस में लगातार बढ़ती अंदरूनी खींचतान के बीच राज्यसभा सदस्य रुक्मिणी मलिक उर्फ कोयल मलिक ने इस्तीफा दे दिया। इस्तीफे के तुरंत बाद केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से उनकी मुलाकात ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।

ममता बनर्जी को एक और बड़ा झटका

दि राइजिंग न्यूज़ | कोलकाता | 16 जुलाई 2026

पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के भीतर जारी अंदरूनी खींचतान अब खुलकर सामने आने लगी है। राज्यसभा सदस्य रुक्मिणी मलिक उर्फ कोयल मलिक ने अपने पद से इस्तीफा देकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और पार्टी नेतृत्व की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। उनके इस्तीफे के तुरंत बाद केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से हुई मुलाकात ने राज्य की राजनीतिक हलचल को और तेज कर दिया है। इस घटनाक्रम को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों और विश्लेषकों के बीच कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। इससे पहले वरिष्ठ नेता मदन मित्रा भी पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा देकर तृणमूल कांग्रेस के भीतर बढ़ते असंतोष का संकेत दे चुके हैं। लगातार सामने आ रहे इस्तीफों और नेताओं के अलग होने की घटनाओं ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी के भीतर संगठनात्मक संकट गहराता जा रहा है। आगामी राजनीतिक घटनाक्रम और चुनावी तैयारियों के बीच यह मामला तृणमूल कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।


तृणमूल कांग्रेस में बढ़ा सियासी संकट, ममता बनर्जी को एक और झटका

पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के भीतर जारी असंतोष अब लगातार गहराता दिखाई दे रहा है। लंबे समय तक राज्य की राजनीति में मजबूत पकड़ बनाए रखने वाली पार्टी अब नेताओं के इस्तीफों, अंदरूनी मतभेदों और संगठनात्मक चुनौतियों से जूझती नजर आ रही है। इसी क्रम में राज्यसभा सदस्य रुक्मिणी मलिक उर्फ कोयल मलिक ने अपने पद से इस्तीफा देकर पार्टी नेतृत्व के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि लगातार हो रहे इस्तीफों से कार्यकर्ताओं का मनोबल प्रभावित हो सकता है और संगठन की एकजुटता पर भी सवाल उठ रहे हैं। आगामी विधानसभा चुनावों से पहले इस तरह के घटनाक्रम तृणमूल कांग्रेस की चुनावी रणनीति और राजनीतिक मजबूती पर असर डाल सकते हैं।

इस्तीफे के बाद भूपेंद्र यादव से मुलाकात ने बढ़ाईं अटकलें

राज्यसभा की सदस्यता छोड़ने के तुरंत बाद कोयल मलिक की केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। हालांकि दोनों नेताओं की मुलाकात का आधिकारिक एजेंडा सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन इस घटनाक्रम के बाद संभावित राजनीतिक बदलावों को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। विपक्षी दल इसे तृणमूल कांग्रेस के भीतर बढ़ती अस्थिरता का संकेत बता रहे हैं, जबकि पार्टी की ओर से इस मामले पर अभी तक कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यदि इस मुद्दे पर और घटनाक्रम सामने आते हैं तो पश्चिम बंगाल की राजनीति में नए समीकरण बन सकते हैं.

मदन मित्रा के बाद सामने आया नया राजनीतिक घटनाक्रम

कोयल मलिक का इस्तीफा ऐसे समय सामने आया है जब एक दिन पहले ही वरिष्ठ नेता और विधायक मदन मित्रा ने भी पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया था। लगातार दो बड़े नेताओं के पार्टी से दूरी बनाने के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर असंतोष की चर्चाएं और तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि पार्टी के भीतर चल रहे मतभेद अब सार्वजनिक रूप लेने लगे हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह सिलसिला जारी रहा तो संगठनात्मक ढांचे और चुनावी तैयारियों पर इसका असर पड़ सकता है। यही कारण है कि इस पूरे घटनाक्रम पर पूरे देश की राजनीतिक नजर बनी हुई है।

राज्यसभा में तृणमूल कांग्रेस की संख्या पर भी पड़ सकता है असर

रुक्मिणी मलिक के इस्तीफे के साथ राज्यसभा में तृणमूल कांग्रेस की संख्या पर भी असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। इससे पहले भी पार्टी के कई सांसद अपनी सदस्यता छोड़ चुके हैं, जिससे उच्च सदन में पार्टी की स्थिति पहले की तुलना में कमजोर होती दिखाई दे रही है। यदि आने वाले समय में और सांसद इस्तीफा देते हैं तो संसद में तृणमूल कांग्रेस की रणनीतिक भूमिका प्रभावित हो सकती है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि संसद के भीतर संख्या बल कम होने से विपक्षी राजनीति में पार्टी की प्रभावशीलता पर भी असर पड़ सकता है।

सभापति को भेजा इस्तीफा, सहयोग के लिए जताया आभार

रुक्मिणी मलिक ने राज्यसभा के सभापति एवं उपराष्ट्रपति को भेजे गए अपने इस्तीफे के पत्र में तत्काल प्रभाव से सदस्यता समाप्त करने का अनुरोध किया है। उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान सभापति, उपसभापति और राज्यसभा सचिवालय से मिले सहयोग के लिए धन्यवाद भी व्यक्त किया। हालांकि उन्होंने अपने इस्तीफे के पीछे कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया है। ऐसे में उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर चर्चाएं लगातार तेज हो रही हैं और सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में वह किस राजनीतिक दिशा में आगे बढ़ती हैं।