खरगे का सरकार पर बड़ा हमला

संसद के आगामी मानसून सत्र में संशोधित 131वां संविधान संशोधन विधेयक पेश किए जाने की चर्चाओं के बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर पहले सर्वदलीय बैठक बुलाने और सभी दलों से व्यापक चर्चा करने की मांग की है।

खरगे का सरकार पर बड़ा हमला

दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 16 जुलाई 2026

संसद के आगामी मानसून सत्र से पहले परिसीमन और संशोधित 131वें संविधान संशोधन विधेयक को लेकर देश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार केंद्र सरकार इस महत्वपूर्ण विधेयक को एक बार फिर संसद में पेश करने की तैयारी कर रही है, जिसके बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। इसी बीच कांग्रेस अध्यक्ष तथा राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इस मुद्दे पर संसद में चर्चा से पहले सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि परिसीमन और संविधान संशोधन जैसे दूरगामी प्रभाव वाले विषयों पर सभी राजनीतिक दलों को विश्वास में लेना आवश्यक है। खरगे ने आग्रह किया कि सरकार संशोधित विधेयक का पूरा प्रारूप पहले सभी दलों को उपलब्ध कराए, ताकि सांसद उसका विस्तार से अध्ययन कर सकें और संसद में सार्थक एवं तथ्यपरक चर्चा हो सके। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में इतने महत्वपूर्ण संवैधानिक फैसले व्यापक सहमति और संवाद के आधार पर लिए जाने चाहिए, जिससे भविष्य में किसी भी प्रकार के राजनीतिक विवाद या असहमति की स्थिति से बचा जा सके।

मानसून सत्र से पहले परिसीमन विधेयक पर बढ़ी राजनीतिक हलचल

संसद का मानसून सत्र बीस जुलाई से शुरू होने जा रहा है और इस बार कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर देशभर की नजरें टिकी हुई हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि केंद्र सरकार महिला आरक्षण से जुड़े प्रावधानों और लोकसभा सीटों के परिसीमन को लेकर संशोधित 131वें संविधान संशोधन विधेयक को दोबारा संसद में पेश कर सकती है। हालांकि सरकार की ओर से अभी तक इसकी औपचारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन मीडिया रिपोर्टों के बाद राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। विपक्षी दलों का कहना है कि यह केवल एक विधेयक नहीं, बल्कि देश की चुनावी व्यवस्था और राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़ा बड़ा संवैधानिक विषय है। इसलिए इस पर जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय व्यापक राजनीतिक सहमति बनाई जानी चाहिए। माना जा रहा है कि यदि यह विधेयक मानसून सत्र में पेश होता है तो संसद के दोनों सदनों में इस पर लंबी और तीखी बहस देखने को मिल सकती है।

मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री को लिखा पत्र

कांग्रेस अध्यक्ष तथा राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इस पूरे मामले को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विस्तृत पत्र लिखा है। उन्होंने पत्र में आग्रह किया है कि सरकार संशोधित विधेयक को संसद में रखने से पहले सभी राजनीतिक दलों की बैठक बुलाए, ताकि प्रत्येक दल अपने सुझाव और आपत्तियां खुलकर रख सके। खरगे ने कहा कि उन्होंने इससे पहले भी संसदीय कार्य मंत्री को इस संबंध में कई बार पत्र लिखकर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की थी, लेकिन सरकार ने उस पर कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में इतने महत्वपूर्ण संवैधानिक मुद्दों पर संवाद और सहमति बेहद आवश्यक होती है। यदि सभी पक्षों की राय लेकर आगे बढ़ा जाए तो भविष्य में किसी प्रकार के राजनीतिक विवाद की संभावना भी कम हो जाएगी।

पहले भी आवश्यक बहुमत हासिल नहीं कर पाया था विधेयक

अपने पत्र में मल्लिकार्जुन खरगे ने यह भी याद दिलाया कि संशोधित 131वां संविधान संशोधन विधेयक इससे पहले लोकसभा में आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर पाया था। उनका कहना है कि यदि सरकार अब इसे दोबारा संसद में लाना चाहती है तो पहले यह स्पष्ट करना चाहिए कि पुराने विधेयक में क्या बदलाव किए गए हैं। उन्होंने कहा कि संवैधानिक संशोधन जैसे गंभीर विषय पर केवल बहुमत के आधार पर नहीं, बल्कि व्यापक राजनीतिक सहमति के आधार पर निर्णय होना चाहिए। विपक्ष का मानना है कि नए प्रस्तावों की जानकारी पहले सभी दलों को उपलब्ध कराई जाए, ताकि सांसद उनका गहराई से अध्ययन कर सकें और संसद में सार्थक चर्चा हो सके। इससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया अधिक मजबूत होगी और निर्णय अधिक स्वीकार्य बन सकेगा।

सभी दलों को अध्ययन के लिए पर्याप्त समय देने की मांग

खरगे ने अपने पत्र में यह भी मांग की है कि यदि सरकार मानसून सत्र में यह विधेयक पेश करना चाहती है, तो उससे पहले सभी राजनीतिक दलों को संशोधित प्रारूप उपलब्ध कराया जाए। उनका कहना है कि किसी भी संवैधानिक संशोधन को समझने और उसके दूरगामी प्रभावों का आकलन करने के लिए पर्याप्त समय मिलना चाहिए। यदि बिना तैयारी और अध्ययन के विधेयक पेश किया जाता है तो संसद में गंभीर चर्चा संभव नहीं हो पाएगी। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि पहले सर्वदलीय बैठक आयोजित की जाए, फिर सभी दलों की राय और सुझावों पर विचार किया जाए और उसके बाद ही विधेयक संसद में प्रस्तुत किया जाए। इससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सहभागी बनेगी तथा सभी पक्षों को अपनी बात रखने का समान अवसर मिलेगा।

मानसून सत्र में कई अहम मुद्दों पर हो सकती है तीखी बहस

इस बार का मानसून सत्र केवल परिसीमन विधेयक तक सीमित नहीं रहने वाला है, बल्कि कई राजनीतिक और संवैधानिक मुद्दे चर्चा के केंद्र में रहेंगे। महिला आरक्षण, लोकसभा सीटों का परिसीमन, संविधान संशोधन और अन्य महत्वपूर्ण विधेयकों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने दिखाई दे सकते हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि सरकार संशोधित 131वें संविधान संशोधन विधेयक को सदन में पेश करती है, तो इस पर लंबी बहस और कई संशोधन प्रस्ताव भी सामने आ सकते हैं। ऐसे में यह मानसून सत्र आने वाले समय की राष्ट्रीय राजनीति और चुनावी रणनीति की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण सत्र माना जा रहा है।


महत्वपूर्ण बिंदु

  • संसद का मानसून सत्र बीस जुलाई से शुरू होगा और इस दौरान केंद्र सरकार संशोधित 131वें संविधान संशोधन विधेयक को दोबारा पेश कर सकती है। इस संभावना के सामने आने के बाद राजनीतिक दलों के बीच हलचल तेज हो गई है और विपक्ष सरकार से पहले व्यापक चर्चा की मांग कर रहा है।

  • कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कहा है कि परिसीमन जैसे संवेदनशील और दूरगामी प्रभाव वाले विषय पर संसद में चर्चा से पहले सर्वदलीय बैठक आयोजित की जानी चाहिए। उनका मानना है कि सभी दलों की राय लेना लोकतांत्रिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

  • खरगे ने अपने पत्र में यह भी कहा कि इससे पहले उन्होंने संसदीय कार्य मंत्री के माध्यम से भी इस विषय पर चर्चा कराने का आग्रह किया था, लेकिन सरकार ने उस समय विपक्ष के अनुरोध पर कोई निर्णय नहीं लिया। अब उन्होंने दोबारा प्रधानमंत्री से इस विषय में हस्तक्षेप करने की अपील की है।

  • कांग्रेस का कहना है कि संशोधित विधेयक का पूरा प्रारूप सभी राजनीतिक दलों को पहले उपलब्ध कराया जाना चाहिए। इससे सांसदों को उसके प्रावधानों का विस्तार से अध्ययन करने और संसद में तथ्यात्मक तथा प्रभावी चर्चा करने का अवसर मिलेगा।

  • विपक्ष का मानना है कि परिसीमन और संविधान संशोधन केवल राजनीतिक मुद्दे नहीं हैं, बल्कि इनका सीधा प्रभाव देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था, चुनावी प्रतिनिधित्व और राज्यों की राजनीतिक हिस्सेदारी पर पड़ सकता है। इसलिए इन विषयों पर जल्दबाजी के बजाय व्यापक सहमति बनाना आवश्यक है।

  • राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी मानसून सत्र सरकार और विपक्ष दोनों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। यदि परिसीमन विधेयक सदन में आता है तो इस पर तीखी बहस, राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और कई संशोधन प्रस्ताव देखने को मिल सकते हैं, जिससे पूरे सत्र का केंद्र यही मुद्दा बन सकता है।