मुजफ्फरनगर में प्रदूषण फैलाने पर फैक्ट्री सील:जांच में ईटीपी बंद मिला और दूषित पानी के निस्तारण में लापरवाही सामने आई
मुजफ्फरनगर। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कार्रवाई से जिले की औद्योगिक इकाइयों में खलबली मच गई है। पानीपत-खटीमा राष्ट्रीय राजमार्ग पर ग्राम तलड़ा स्थित मैसर्स हिमालया ग्रीन रिसाइक्लिंग में सोमवार को जांच के दौरान ईटीपी (इफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट) बंद मिला। फैक्ट्री में जीरो डिस्चार्ज का दावा किया जा रहा था, लेकिन जांच में दूषित पानी और वेस्ट के निस्तारण में लापरवाही सामने आई। इसके बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने फैक्ट्री को तत्काल प्रभाव से बंद करा दिया और बॉयलर भी सील कर दिया। जांच में बंद मिला ईटीपी, दूषित पानी के निस्तारण पर सवाल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के स्थानीय अधिकारी गीतेश चंद्रा के नेतृत्व में एई कुंवर संतोष कुमार और जेई राजा गुप्ता की टीम ने सोमवार अपराह्न करीब तीन बजे फैक्ट्री में छापेमारी कर जांच की। अधिकारियों के मुताबिक, जांच के दौरान ईटीपी संचालित नहीं मिला। फैक्ट्री से निकलने वाले वेस्ट और दूषित पानी का निर्धारित तरीके से निस्तारण भी नहीं किया जा रहा था। जीरो परसेंट डिस्चार्ज के दावे के बावजूद दूषित पानी को बिना उचित उपचार के बहाए जाने का मामला सामने आया। इसे गंभीरता से लेते हुए टीम ने फैक्ट्री की गतिविधियां बंद करा दीं और बॉयलर सील कर दिया। एनसीआर में प्रदूषण रोकने के लिए सख्ती औद्योगिक इकाइयों में प्रदूषण नियंत्रण के लिए ईटीपी का संचालन और दूषित पानी का उचित निस्तारण जरूरी है। ऐसे में जांच के दौरान ईटीपी बंद मिलने और निस्तारण में लापरवाही सामने आने के बाद बोर्ड की कार्रवाई को अहम माना जा रहा है। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में प्रदूषण का स्तर चिंता का विषय बना हुआ है। सीएक्यूएम के आदेश पर मुजफ्फरनगर समेत एनसीआर में 5 से 20 नवंबर तक गैर-जरूरी निर्माण गतिविधियों पर रोक लगाए जाने की जानकारी भी सामने आई है। प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए निर्माण कार्यों पर प्रतिबंध समेत कई कदम उठाए जा रहे हैं।
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