NCR ने 4 करोड़ से ज्यादा रिकॉर्ड डिजिटल किए:200 मीट्रिक टन कागज हटाया, 25 हजार वर्गफीट कार्यालयी जगह खाली हुई
प्रयागराज में उत्तर मध्य रेलवे ने अब तक 4 करोड़ से ज्यादा रिकॉर्ड डिजिटल रूप में सुरक्षित किए हैं। स्वच्छता अभियान के तहत 200 मीट्रिक टन कागज हटाया गया है। पुराने रिकॉर्ड हटने से करीब 25 हजार वर्गफीट कार्यालयी जगह खाली हुई है। डिजिटल रिकॉर्ड रखने के लिए 58 टेराबाइट से ज्यादा स्टोरेज क्षमता तैयार की गई है। उत्तर मध्य रेलवे के महाप्रबंधक नरेश पाल सिंह ने बुधवार को रेलवे में डिजिटलीकरण की प्रगति और उसके महत्व पर बनी डॉक्यूमेंट्री जारी की। इस मौके पर रेलवे के अलग-अलग मंडलों के मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। डॉक्यूमेंट्री में डिजिटल कामकाज को बढ़ावा देने, पुराने दस्तावेजों को सुरक्षित रखने और कागज पर निर्भरता कम करने के प्रयास दिखाए गए। रेलवे का उद्देश्य कार्यालयी कामकाज में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करना और दस्तावेजों को व्यवस्थित रखना है। रेलवे में बड़ी संख्या में पुराने दस्तावेज और रिकॉर्ड रखे जाते हैं। जरूरत पड़ने पर इन्हें खोजना और संभालना समय लेने वाला काम होता है। डिजिटल व्यवस्था से संबंधित दस्तावेजों तक पहुंच आसान होगी। इससे रिकॉर्ड सुरक्षित रखने और जरूरत के समय उनका इस्तेमाल करने में मदद मिलेगी। अब तक 4 करोड़ से ज्यादा रिकॉर्ड डिजिटल किए गए हैं। वहीं, 58 टेराबाइट से ज्यादा स्टोरेज क्षमता डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के लिए तैयार की गई है। कागज हटने से कार्यालयी जगह खाली हुई है। रेलवे में डिजिटलीकरण की इस पहल को स्वच्छता अभियान से भी जोड़ा गया है। अभियान के तहत 200 मीट्रिक टन कागज हटाया गया। पुराने रिकॉर्ड के निस्तारण से लगभग 25 हजार वर्गफीट कार्यालयी जगह खाली हुई है। इससे कार्यालयों में जगह का बेहतर इस्तेमाल करने और कागजी दस्तावेजों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल रही है। बाकी रिकॉर्ड भी डिजिटल करने पर जोर महाप्रबंधक नरेश पाल सिंह ने डिजिटलीकरण के तहत किए गए कार्यों की सराहना की। उन्होंने संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों से इस अभियान को लगातार आगे बढ़ाने को कहा। साथ ही, शेष अभिलेखों को भी चरणबद्ध तरीके से डिजिटल करने पर जोर दिया। उन्होंने कार्यालयी कामकाज में डिजिटल माध्यमों के अधिक इस्तेमाल और पेपरलेस कार्यसंस्कृति को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई। रेलवे की यह पहल प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने, उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करने और पर्यावरण के अनुकूल कार्यप्रणाली विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
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