पाकिस्तान पहुंचे मुइज्जू को नशीद की चेतावनी, भारत से रिश्तों पर सवाल

मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू की पाकिस्तान यात्रा के बाद भारत के साथ संबंधों को लेकर बहस तेज हो गई है। पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद और अन्य विपक्षी नेताओं ने सुरक्षा तथा विदेश नीति पर चिंता जताई है। यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग के लिए 20 समझौता ज्ञापनों पर सहमति बनी।

Oct 28, 2026 - 11:36
0
पाकिस्तान पहुंचे मुइज्जू को नशीद की चेतावनी, भारत से रिश्तों पर सवाल

दि राइजिंग न्यूज़ |  मालदीव | 28 अक्टूबर 2026

मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू की पाकिस्तान यात्रा के बाद भारत और मालदीव के संबंधों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद सहित विपक्ष के कई नेताओं ने इस यात्रा पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पाकिस्तान के साथ बढ़ती नजदीकियों का असर भारत के साथ मालदीव के लंबे समय से चले आ रहे संबंधों पर पड़ सकता है। नशीद ने चेतावनी दी है कि यदि भारत को अपनी सुरक्षा के साथ समझौता होने का एहसास हुआ, तो इसका मालदीव पर गंभीर असर पड़ सकता है।

मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने 20 से 22 अक्टूबर 2026 तक पाकिस्तान की यात्रा की थी। यह यात्रा दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना के 60 वर्ष पूरे होने के अवसर पर हुई। इस दौरान स्वास्थ्य, शिक्षा, व्यापार, कृषि, रक्षा, समुद्री सुरक्षा और साइबर सुरक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए 20 समझौता ज्ञापनों पर सहमति बनी। किसी मालदीवी राष्ट्रपति की 11 वर्षों में यह पहली पाकिस्तान यात्रा बताई गई है। इस यात्रा के बाद मालदीव की विदेश नीति और भारत के साथ उसके संबंधों को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।

मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति और मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी के अध्यक्ष मोहम्मद नशीद ने राष्ट्रपति मुइज्जू की पाकिस्तान यात्रा की आलोचना की है। नशीद के अनुसार, मालदीव जैसे छोटे देश को अपनी विदेश नीति से जुड़े फैसले लेते समय क्षेत्रीय सुरक्षा और पड़ोसी देशों के साथ संबंधों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि मुइज्जू ने पर्याप्त विचार किए बिना पाकिस्तान का दौरा किया और मालदीव को भारत तथा पाकिस्तान के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव के बीच ला खड़ा किया है।

नशीद ने भारत की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यदि भारत को लगता है कि उसकी सुरक्षा से समझौता किया जा रहा है, तो इसके मालदीव के लिए गंभीर परिणाम हो सकते हैं। उनके बयान को राष्ट्रपति मुइज्जू की विदेश नीति के प्रति विपक्ष की चिंता के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, यह पूर्व राष्ट्रपति का बयान है और उपलब्ध समाचार सामग्री में भारत सरकार की ओर से इस यात्रा के संबंध में ऐसी कोई आधिकारिक चेतावनी दिए जाने की जानकारी नहीं है।

मालदीव के पूर्व विदेश मंत्री अब्दुल्ला शाहिद ने भी राष्ट्रपति मुइज्जू की पाकिस्तान यात्रा पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आशंका जताई कि राष्ट्रपति वर्ष 2023 की तरह फिर से भारत-विरोधी रुख अपना सकते हैं। विपक्षी नेताओं का मानना है कि पाकिस्तान के साथ संबंध मजबूत करने की कोशिशों के बीच भारत के साथ मालदीव की पारंपरिक साझेदारी को भी महत्व दिया जाना चाहिए। इस मुद्दे पर मालदीव के राजनीतिक नेतृत्व के बीच मतभेद सामने आए हैं।

पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन ने भी पाकिस्तान की ओर से मुइज्जू को मानद डॉक्टरेट की उपाधि दिए जाने के फैसले पर सवाल उठाए। विपक्ष की आपत्तियां केवल यात्रा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे मालदीव की व्यापक विदेश नीति और क्षेत्रीय संबंधों से भी जुड़ी हैं। हालांकि, पाकिस्तान के साथ सहयोग बढ़ाने का निर्णय अपने आप में भारत के साथ संबंधों में गिरावट का प्रमाण नहीं है। इसका वास्तविक प्रभाव आने वाले समय में दोनों देशों के बीच होने वाले सहयोग और आधिकारिक निर्णयों से स्पष्ट होगा।

पाकिस्तान यात्रा के दौरान हुए 20 समझौता ज्ञापनों में स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, व्यापार और कृषि जैसे क्षेत्रों के साथ रक्षा, समुद्री सुरक्षा तथा साइबर सुरक्षा से जुड़े विषय भी शामिल थे। इन समझौतों का उद्देश्य दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाना है। हिंद महासागर क्षेत्र में मालदीव की भौगोलिक स्थिति के कारण उसकी विदेश नीति और सुरक्षा संबंधी साझेदारियां क्षेत्रीय महत्व रखती हैं। ऐसे में पाकिस्तान के साथ बढ़ते सहयोग को लेकर भारत और मालदीव के संबंधों पर चर्चा होना स्वाभाविक है।

भारत और मालदीव के बीच लंबे समय से व्यापार, विकास, सुरक्षा और आपसी सहयोग के संबंध रहे हैं। हिंद महासागर में मालदीव की रणनीतिक स्थिति भारत के लिए भी महत्वपूर्ण है। यही वजह है कि मालदीव की विदेश नीति से जुड़े फैसलों पर क्षेत्रीय स्तर पर ध्यान दिया जाता है। फिलहाल, मुइज्जू की पाकिस्तान यात्रा को लेकर सामने आए सवाल मुख्य रूप से मालदीव के विपक्षी नेताओं की चिंताओं पर आधारित हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पाकिस्तान के साथ हुए समझौतों को किस तरह लागू किया जाता है और मालदीव भारत के साथ अपने संबंधों को आगे किस दिशा में ले जाता है।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Wow Wow 0
Sad Sad 0
Angry Angry 0

Comments (0)

User