नीट पेपर लीक पर सुप्रीम कोर्ट सख्त! केंद्र सरकार को दिया बड़ा निर्देश

राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा प्रश्नपत्र लीक मामले में उच्चतम न्यायालय ने केंद्र सरकार से कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि इस गंभीर मामले को ऐसे नहीं छोड़ा जा सकता। न्यायालय ने परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित बनाने के लिए उठाए जा रहे कदमों पर विस्तृत जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई तीन अगस्त को होगी।

नीट पेपर लीक पर सुप्रीम कोर्ट सख्त! केंद्र सरकार को दिया बड़ा निर्देश

दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 24 जुलाई 2026

 राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर देशभर में जारी विरोध प्रदर्शनों और छात्रों की बढ़ती नाराजगी के बीच शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। इस दौरान न्यायालय ने केंद्र सरकार से स्पष्ट शब्दों में कहा कि देश के लाखों विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़े इस गंभीर मामले को केवल आश्वासनों के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। न्यायालय ने कहा कि परीक्षा प्रणाली में जनता और विद्यार्थियों का विश्वास बनाए रखने के लिए प्रभावी, पारदर्शी और दीर्घकालिक सुधार आवश्यक हैं।सुनवाई के दौरान न्यायालय ने यह भी कहा कि प्रश्नपत्र लीक जैसी घटनाएं केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि इससे पूरे शिक्षा तंत्र की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लग जाता है। इसलिए सरकार को केवल दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि ऐसी मजबूत व्यवस्था तैयार करनी चाहिए जिससे भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की संभावना पूरी तरह समाप्त हो सके।केंद्र सरकार की ओर से महाधिवक्ता तुषार मेहता ने न्यायालय को बताया कि सरकार इस पूरे मामले को अत्यंत गंभीरता से ले रही है। उन्होंने कहा कि छात्रों के हितों की रक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए गठित समिति की सिफारिशों को लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। 


उच्चतम न्यायालय ने दिखाई सख्ती

सुनवाई के दौरान उच्चतम न्यायालय ने कहा कि प्रश्नपत्र लीक जैसी घटनाएं लाखों मेहनती विद्यार्थियों के भविष्य के साथ अन्याय हैं। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यदि परीक्षा प्रणाली में लगातार ऐसी घटनाएं होती रहेंगी तो छात्रों का विश्वास पूरी व्यवस्था से उठ जाएगा। इसलिए इस मामले में केवल जांच या आश्वासन पर्याप्त नहीं होंगे, बल्कि परिणाम देने वाली ठोस कार्रवाई आवश्यक है।न्यायालय ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि भविष्य में किसी भी राष्ट्रीय परीक्षा की गोपनीयता और सुरक्षा से कोई समझौता न हो। इसके लिए आधुनिक तकनीक, मजबूत निगरानी व्यवस्था और जवाबदेही तय करने जैसे उपायों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। न्यायालय ने स्पष्ट संकेत दिया कि वह इस पूरे मामले की लगातार निगरानी करेगा।


केंद्र सरकार ने क्या कहा

केंद्र सरकार की ओर से महाधिवक्ता तुषार मेहता ने न्यायालय को बताया कि सरकार छात्रों के हितों को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है और परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए व्यापक स्तर पर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार केवल समिति की सिफारिशों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उससे आगे बढ़कर ऐसे सुधार लागू करेगी जो भविष्य में प्रश्नपत्र लीक जैसी घटनाओं को रोकने में प्रभावी साबित हों।महाधिवक्ता ने न्यायालय से विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय भी मांगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता बढ़ाने, सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार कर रही है। न्यायालय ने इस आश्वासन को रिकॉर्ड पर लेते हुए सरकार को विस्तृत जवाब प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।


परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित बनाने पर विशेष जोर

सुनवाई के दौरान उच्चतम न्यायालय ने केंद्र सरकार को परीक्षा प्रक्रिया में आधुनिक तकनीकी सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का निर्देश दिया। न्यायालय ने विशेष रूप से कहा कि डिजिटल सुरक्षा, अभ्यर्थियों के आंकड़ों की गोपनीयता और प्रश्नपत्रों की सुरक्षित निगरानी के लिए मजबूत तंत्र विकसित करना आवश्यक है। यदि सुरक्षा व्यवस्था में कोई कमजोरी रही तो भविष्य में भी ऐसी घटनाएं दोहराई जा सकती हैं।न्यायालय ने यह भी कहा कि राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में तकनीकी निगरानी, साइबर सुरक्षा और जवाबदेही की व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाया जाना चाहिए। इससे न केवल प्रश्नपत्र लीक जैसी घटनाओं पर रोक लगेगी, बल्कि विद्यार्थियों का परीक्षा प्रणाली पर विश्वास भी मजबूत होगा।


अगली सुनवाई तीन अगस्त को होगी

सुनवाई के अंत में उच्चतम न्यायालय ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह परीक्षा प्रणाली में सुधार और प्रश्नपत्र लीक रोकने के लिए उठाए गए सभी कदमों का विस्तृत विवरण लिखित रूप में प्रस्तुत करे। न्यायालय ने कहा कि सरकार की कार्ययोजना का गंभीरता से परीक्षण किया जाएगा और उसी के आधार पर आगे की सुनवाई की दिशा तय होगी।मामले की अगली सुनवाई तीन अगस्त को निर्धारित की गई है। तब तक केंद्र सरकार को परीक्षा सुरक्षा, डिजिटल निगरानी, पारदर्शिता बढ़ाने और दोषियों के खिलाफ की गई कार्रवाई सहित सभी सुधारात्मक उपायों का पूरा ब्यौरा न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करना होगा। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि इस मामले में विद्यार्थियों के हित सर्वोपरि हैं और परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह विश्वसनीय बनाना सभी संबंधित पक्षों की जिम्मेदारी है।