निहंग गुरुद्वारा विवाद पर थमा तनाव
कर्णप्रयाग और नगरासू गुरुद्वारा विवाद को लेकर उत्तराखंड में निहंग सिखों और पुलिस के बीच बना तनाव लंबी वार्ता के बाद समाप्त हो गया। पंजाब और हिमाचल प्रदेश से उत्तराखंड की ओर बढ़ रहे निहंगों को देहरादून सीमा पर रोका गया, जिसके बाद प्रशासन, पुलिस और सिख प्रतिनिधियों के बीच रातभर चली बातचीत में समाधान निकाला गया। अंततः निहंगों ने वापस लौटने पर सहमति जताई और स्थिति शांतिपूर्ण ढंग से नियंत्रित कर ली गई।
दि राइजिंग न्यूज़ | देहरादून | 27 जून 2026
कर्णप्रयाग और नगरासू गुरुद्वारों से जुड़े विवाद को लेकर उत्तराखंड में पिछले कई दिनों से बना तनाव आखिरकार प्रशासन और सिख समाज के प्रतिनिधियों के बीच सफल वार्ता के बाद समाप्त हो गया। गुरुवार रात से लेकर शुक्रवार सुबह तक चली बातचीत के बाद निहंग सिखों ने वापस लौटने पर सहमति जताई, जिससे संभावित टकराव और कानून व्यवस्था संबंधी चिंताओं पर विराम लग गया।
क्या है पूरा विवाद
विवाद की जड़ कर्णप्रयाग और नगरासू स्थित गुरुद्वारों में हुई एक पुरानी घटना से जुड़ी है। इस मामले में पुलिस द्वारा चार निहंग सिखों की गिरफ्तारी की गई थी। गिरफ्तारी के विरोध में निहंग संगठनों ने पहले ही घोषणा कर दी थी कि वे पंजाब और हिमाचल प्रदेश से उत्तराखंड की ओर कूच करेंगे और अपने साथियों की रिहाई तथा जमानत की मांग उठाएंगे।निहंगों का कहना था कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार का संघर्ष खड़ा करना नहीं बल्कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना और हेमकुंड साहिब की यात्रा करना है। हालांकि प्रशासन को आशंका थी कि बड़ी संख्या में लोगों के एकत्र होने से कानून व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
कुल्हाल चेक पोस्ट से शुरू हुआ घटनाक्रम
घोषित कार्यक्रम के अनुसार निहंगों का जत्था हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की सीमा पर स्थित कुल्हाल चेक पोस्ट पहुंचा। यहां प्रशासन और निहंग प्रतिनिधियों के बीच प्रारंभिक बातचीत हुई। इसके बाद पांवटा साहिब में भी अधिकारियों और प्रतिनिधियों के बीच चर्चा चली, लेकिन किसी ठोस सहमति पर बात नहीं बन सकी।वार्ता के बावजूद कुछ निहंग उत्तराखंड की ओर बढ़ने लगे। जानकारी के अनुसार लगभग 50 निहंग मोटरसाइकिलों से देहरादून की ओर रवाना हुए, जबकि करीब 150 निहंग पांवटा साहिब वापस लौट गए। कुछ अन्य लोग छोटे समूहों में विभिन्न स्थानों की ओर चले गए।
देहरादून सीमा पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था
निहंगों के संभावित प्रवेश को देखते हुए देहरादून पुलिस और प्रशासन ने पहले ही व्यापक सुरक्षा इंतजाम कर लिए थे। प्रेमनगर क्षेत्र सहित कई संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया। सीमावर्ती क्षेत्रों को सुरक्षा दृष्टि से विशेष निगरानी में रखा गया।प्रशासन ने यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि किसी भी स्थिति में सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित न हो और आम लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़े। इसके लिए विभिन्न स्थानों पर बैरिकेडिंग और निगरानी बढ़ा दी गई।
पुलिस को चकमा देकर ऋषिकेश की ओर बढ़े निहंग
घटनाक्रम ने नया मोड़ तब लिया जब कुछ निहंग पुलिस की निगरानी से बचते हुए ऋषिकेश की दिशा में बढ़ गए। इससे प्रशासनिक तंत्र में हलचल बढ़ गई और कई क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था और सख्त कर दी गई।रात लगभग 12 बजे जोगीवाला चेक पोस्ट पर देहरादून-ऋषिकेश मार्ग सहित कई प्रमुख रास्तों पर बैरिकेडिंग कर दी गई। वाहनों की आवाजाही प्रभावित होने से कई घंटों तक लंबा जाम लगा रहा और लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।जब निहंग जोगीवाला चेक पोस्ट पहुंचे तो पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी और वापस लौटने के लिए कहा। इसके बाद जत्था अलग-अलग समूहों में बंट गया और शहर के विभिन्न हिस्सों में चला गया।
रेस कोर्स गुरुद्वारे में चली रातभर वार्ता
स्थिति को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने के लिए कुछ निहंगों को देहरादून के रेस कोर्स स्थित गुरुद्वारे में ठहराया गया। गुरुद्वारे के बाहर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा ताकि किसी प्रकार की अप्रिय घटना न हो।यहीं जिला प्रशासन, पुलिस अधिकारियों और सिख समाज के प्रतिनिधियों के बीच देर रात तक बातचीत चलती रही। वार्ता में सभी पक्षों ने संयम बरतते हुए समाधान खोजने का प्रयास किया। कई दौर की चर्चा के बाद दोनों पक्षों के बीच सहमति बनी और निहंगों ने वापस लौटने का निर्णय लिया।
सिख समाज ने शांति का संदेश दिया
वार्ता में शामिल सिख समाज के प्रतिनिधि और कांग्रेस नेता अमरजीत सिंह ने कहा कि निहंगों का उद्देश्य कभी भी उन्माद फैलाना या किसी प्रकार का संघर्ष खड़ा करना नहीं था। उन्होंने कहा कि यह विवाद पहाड़ और सिख समाज के बीच का संघर्ष नहीं था, बल्कि कुछ घटनाओं और बयानों के कारण स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी।उन्होंने प्रशासन द्वारा बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने के प्रयासों की सराहना की। साथ ही यह भी कहा कि शुरुआती स्तर पर कुछ प्रशासनिक और सरकारी चूकें हुईं, जिनके कारण विवाद ने बड़ा रूप ले लिया।
प्रशासन ने शांति बनाए रखने को बताया प्राथमिकता
जिलाधिकारी आशीष चौहान और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमेन्द्र डोबाल ने कहा कि पूरे घटनाक्रम को संयम और संवाद के माध्यम से संभाला गया। उन्होंने बताया कि प्रशासन की प्राथमिकता शांति बनाए रखना और किसी भी प्रकार के टकराव को रोकना था।अधिकारियों के अनुसार सभी पक्षों के सहयोग से स्थिति नियंत्रण में रही और कानून व्यवस्था पूरी तरह सामान्य बनी रही। प्रशासन ने भविष्य में भी संवाद के माध्यम से ऐसे मामलों का समाधान निकालने की प्रतिबद्धता दोहराई है।
फिलहाल सामान्य हुई स्थिति
वार्ता के सफल निष्कर्ष के बाद देहरादून और आसपास के क्षेत्रों में स्थिति सामान्य हो गई है। अतिरिक्त सुरक्षा बलों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन किसी नई तनावपूर्ण स्थिति की सूचना नहीं है। प्रशासन और सिख समाज दोनों ने शांति, आपसी सम्मान और संवाद के रास्ते पर आगे बढ़ने की अपील की है।