नवजात की मौत में डॉक्टरों पर FIR:मेडिकल बोर्ड ने माना- बाल रोग विशेषज्ञ ने नहीं की थी देखभाल

Nov 02, 2026 - 08:25
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नवजात की मौत में डॉक्टरों पर FIR:मेडिकल बोर्ड ने माना- बाल रोग विशेषज्ञ ने नहीं की थी देखभाल
प्रयागराज में चार दिन की नवजात बच्ची की मौत के मामले में अब डॉक्टरों और अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो गई है। बच्ची की मौत नवंबर 2025 में दरभंगा कॉलोनी स्थित जनहित सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में हुई थी। बच्ची के पिता अनुराग शुक्ला, हाईकोर्ट के अधिवक्ता हैं। उन्होंने डॉक्टरों पर इलाज में गंभीर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया था। मामले की जांच के लिए गठित मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट में भी बच्ची को बाल रोग विशेषज्ञ की ओर से उचित देखभाल नहीं मिलने और नाभिनाल में संक्रमण की पुष्टि की गई थी। ऑपरेशन से हुआ था जन्म पिता की तहरीर के मुताबिक, उन्होंने 16 नवंबर 2025 को अपनी पत्नी शोभा को डिलीवरी के लिए जनहित सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में भर्ती कराया था। यह अस्पताल दरभंगा कॉलोनी में डॉक्टर व्यंजना पांडेय के आवास के ग्राउंड फ्लोर पर संचालित हो रहा था। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि अस्पताल में मानक के अनुरूप चिकित्सा सुविधाएं नहीं थीं। वहां बाल रोग विशेषज्ञ और एनआईसीयू की व्यवस्था भी नहीं थी। इसके बावजूद अस्पताल का संचालन किया जा रहा था। 17 नवंबर 2025 को दोपहर 1:55 बजे डॉक्टर आयुषी पांडेय ने अपनी सास डॉक्टर व्यंजना पांडेय के सहयोग से ऑपरेशन के जरिए बच्ची का जन्म कराया। जन्म के बाद नहीं हुई उचित देखभाल शिकायतकर्ता का आरोप है कि जन्म के बाद नवजात की न तो समुचित जांच की गई और न ही किसी प्रकार का टीकाकरण कराया गया। बच्ची की नाभिनाल में संक्रमण होने के बावजूद डॉक्टरों ने उसकी जांच और इलाज नहीं किया। 18 नवंबर की शाम से बच्ची ने दूध पीना छोड़ दिया था। उन्होंने कई बार डॉक्टरों से बच्ची की हालत के बारे में बताया और इलाज कराने का अनुरोध किया, लेकिन न तो किसी बाल रोग विशेषज्ञ को बुलाया गया और न ही बच्ची का समुचित उपचार किया गया। आरोप है कि 19 नवंबर तक इलाज में लापरवाही जारी रही। इसी दौरान बच्ची की हालत गंभीर हो गई। नाभिनाल में संक्रमण के कारण सेप्टिसीमिया होने से 19 नवंबर 2025 को बच्ची की मौत हो गई। मेडिकल बोर्ड की जांच में क्या आया बच्ची की मौत के बाद पिता ने जार्जटाउन थाने में एफआईआर दर्ज कराने के लिए प्रार्थना पत्र दिया था। इसके बाद मामले को लेकर जिलाधिकारी, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, मुख्य चिकित्साधिकारी और राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग समेत विभिन्न मंचों पर शिकायत की गई। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने मामले का संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी प्रयागराज को जांच कर रिपोर्ट भेजने का निर्देश दिया था। इसके बाद मुख्य चिकित्साधिकारी की ओर से मेडिकल बोर्ड का गठन किया गया। बोर्ड में डॉ. आरसी पांडेय, डॉ. प्रमोद कुमार और डॉ. ऋचा पांडेय शामिल थे। बोर्ड ने अनुराग शुक्ला और उनकी पत्नी शोभा के बयान दर्ज किए। दोनों ने 19 दिसंबर 2025 को बोर्ड के समक्ष लिखित बयान और साक्ष्य प्रस्तुत किए। मेडिकल बोर्ड ने 6 अप्रैल 2026 को अपनी जांच आख्या में बताया कि बच्ची की किसी बाल रोग विशेषज्ञ की ओर से उचित देखभाल नहीं की गई थी। जांच में नाभिनाल के संक्रमण की पुष्टि भी की गई। शिकायतकर्ता ने बच्ची की हालत से संबंधित तस्वीरें भी जांच के दौरान प्रस्तुत की थीं। पहले एफआईआर दर्ज करने से किया गया था इनकार पिता के मुताबिक, बच्ची की मौत के बाद 19 नवंबर 2025 को दोपहर 2:11 बजे उन्होंने जार्जटाउन थाने में एफआईआर दर्ज कराने के लिए प्रार्थना पत्र दिया था। उनका आरोप है कि बच्ची के शव का पंचनामा कर पोस्टमार्टम कराया गया, लेकिन डॉक्टरों को बचाने के लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट में तथ्यों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया। इसी रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने से इनकार कर दिया था। इसके बाद उन्होंने विभिन्न विभागों और आयोगों में शिकायत की। मेडिकल बोर्ड की जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद अब मामले में एफआईआर दर्ज की गई है। डॉक्टरों और अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर आरोप शिकायतकर्ता ने डॉक्टर आयुषी पांडेय, डॉक्टर व्यंजना पांडेय और जनहित सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के प्रबंधक के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उनका आरोप है कि अस्पताल में आवश्यक चिकित्सा सुविधाओं की कमी, बाल रोग विशेषज्ञ की अनुपस्थिति और नवजात के संक्रमण का समय पर इलाज नहीं किए जाने के कारण बच्ची की मौत हुई।

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