गांव खेत और किसान विकसित भारत की आधारशिला

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि विकसित भारत 2047 का सपना गांवों, खेतों और किसानों की मजबूती से ही साकार होगा। उन्होंने टिकाऊ कृषि, आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक अनुसंधान को कृषि विकास का आधार बताया।

गांव खेत और किसान विकसित भारत की आधारशिला

दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 15 जून 2026

गांव खेत और किसान ही विकसित भारत की नींव

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा है कि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य तभी पूरा होगा जब गांवों, खेतों और किसानों को विकास की मुख्यधारा में केंद्र स्थान दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि कृषि केवल आजीविका का साधन नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा और अर्थव्यवस्था का आधार है। इसलिए कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाना देश के भविष्य को मजबूत बनाने के समान है।

टिकाऊ कृषि समय की सबसे बड़ी आवश्यकता

ओम बिरला ने कहा कि बदलते समय में कृषि को टिकाऊ बनाना अत्यंत आवश्यक है। जलवायु परिवर्तन, अनियमित वर्षा, प्राकृतिक आपदाओं और घटते प्राकृतिक संसाधनों के कारण खेती कई चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे में कृषि पद्धतियों को इस प्रकार विकसित करना होगा कि उत्पादन भी बढ़े और पर्यावरण भी सुरक्षित रहे। उन्होंने कहा कि टिकाऊ कृषि न केवल किसानों की आय बढ़ाएगी बल्कि खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण समृद्धि को भी सुनिश्चित करेगी।

आधुनिक तकनीक से बदलेगी खेती की तस्वीर

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। मानव रहित उड़ान यंत्र, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल खेती और आंकड़ा विश्लेषण जैसी आधुनिक प्रणालियां किसानों की सहायता कर रही हैं। उन्होंने कहा कि पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान का समन्वय खेती को अधिक उत्पादक, लाभकारी और टिकाऊ बना सकता है। नई तकनीकों के माध्यम से किसानों को समय पर जानकारी, बेहतर उत्पादन और कम लागत में अधिक लाभ प्राप्त हो सकता है।

कृषि अनुसंधान की भूमिका अहम

ओम बिरला ने कृषि विश्वविद्यालयों, वैज्ञानिकों और अनुसंधान संस्थानों की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र की चुनौतियों का समाधान शोध और नवाचार के माध्यम से ही संभव है। उन्होंने बताया कि विभिन्न अनुसंधान संस्थान ऐसे बीज और तकनीक विकसित कर रहे हैं जो कम पानी में अधिक उत्पादन देने में सक्षम हैं। इससे किसानों की लागत कम होगी और उत्पादन क्षमता बढ़ेगी।

कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने की जरूरत

उन्होंने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए केवल खेती पर्याप्त नहीं है। कृषि आधारित उद्योगों और खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों का विस्तार भी जरूरी है। यदि किसान उत्पादन के साथ-साथ प्रसंस्करण और विपणन से भी जुड़ें तो उन्हें अधिक लाभ मिल सकता है। उनके अनुसार इससे गांवों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।

जल संरक्षण और मिट्टी की सेहत पर जोर

ओम बिरला ने प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को कृषि विकास की महत्वपूर्ण शर्त बताया। उन्होंने कहा कि जल बचत, सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली, मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार और संतुलित उर्वरकों का उपयोग भविष्य की खेती के लिए आवश्यक है। उन्होंने किसानों से स्थानीय जलवायु के अनुरूप फसलों का चयन करने और संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करने का आह्वान किया।

युवाओं और महिलाओं की बढ़ती भूमिका

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि कृषि क्षेत्र में युवाओं और महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। अनेक युवा नई तकनीकों और नवाचारों के माध्यम से खेती को आधुनिक स्वरूप दे रहे हैं। वहीं महिलाएं भी कृषि और उससे जुड़े कार्यों में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।उन्होंने कहा कि यदि इन दोनों वर्गों को पर्याप्त अवसर और संसाधन उपलब्ध कराए जाएं तो कृषि क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन संभव है।

विकसित भारत का साझा संकल्प

ओम बिरला ने कहा कि विकसित भारत 2047 केवल एक सरकारी योजना नहीं बल्कि पूरे देश का सामूहिक लक्ष्य है। इसे पूरा करने के लिए किसानों, वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, नीति निर्माताओं और समाज के सभी वर्गों को मिलकर कार्य करना होगा। उन्होंने विश्वास जताया कि आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक अनुसंधान, टिकाऊ कृषि और ग्रामीण विकास के समन्वित प्रयासों से भारत आत्मनिर्भर और विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा।

कृषि ही बनेगी विकास की सबसे बड़ी शक्ति

उन्होंने कहा कि भारत की वास्तविक शक्ति उसके गांवों और किसानों में निहित है। यदि कृषि क्षेत्र को मजबूत, आधुनिक और टिकाऊ बनाया जाए तो देश की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी। यही मार्ग विकसित भारत 2047 के सपने को साकार करने की सबसे मजबूत आधारशिला साबित होगा।