धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे बिना क्यों माने सोनम वांगचुक खुद बताई वजह

गुरुग्राम प्रसिद्ध शिक्षाविद सोनम वांगचुक ने अपनी भूख हड़ताल समाप्त करने के बाद कहा कि उनके सामने दो ही रास्ते थे—या तो अनशन जारी रखकर अपनी जान जोखिम में डालें या जीवित रहकर छात्रों की लड़ाई आगे बढ़ाएं। उन्होंने बताया कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का कोई स्पष्ट आश्वासन नहीं मिला, लेकिन छात्रों पर मामले दर्ज न होने और परीक्षा व्यवस्था पर संसद में चर्चा के भरोसे के बाद उन्होंने अनशन समाप्त करने का निर्णय लिया।

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे बिना क्यों माने सोनम वांगचुक  खुद बताई वजह

दि राइजिंग न्यूज़ | गुरुग्राम  | 24 जुलाई 2026

राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर लंबे समय से भूख हड़ताल पर बैठे प्रसिद्ध शिक्षाविद सोनम वांगचुक ने गुरुवार देर रात अपना अनशन समाप्त कर दिया। केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा ने गुरुग्राम स्थित एक निजी चिकित्सालय में उन्हें रस पिलाकर अनशन समाप्त कराया। इसके बाद शुक्रवार सुबह जारी वीडियो संदेश में वांगचुक ने विस्तार से बताया कि उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पूरी हुए बिना भी यह फैसला क्यों लिया।वांगचुक ने कहा कि सरकार की ओर से उन्हें धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर कोई निश्चित आश्वासन नहीं दिया गया था। हालांकि उन्हें यह भरोसा जरूर मिला कि संसद में इस पूरे मामले पर विस्तृत चर्चा होगी और परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए गंभीर विचार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि परिस्थितियों को देखते हुए उन्हें ऐसा निर्णय लेना पड़ा जिससे आंदोलन भी जारी रहे और छात्रों का भविष्य भी सुरक्षित रहे।


दो रास्ते थे, इसलिए लिया यह फैसला

सोनम वांगचुक ने अपने वीडियो संदेश में कहा कि उनके सामने केवल दो विकल्प थे। पहला यह कि वे भूख हड़ताल जारी रखें और अपनी जान जोखिम में डाल दें। दूसरा यह कि वे जीवित रहकर छात्रों के अधिकारों की लड़ाई आगे बढ़ाएं और आंदोलन को मजबूत करें। उन्होंने कहा कि हजारों लोगों ने उनसे आग्रह किया कि उनकी जान आंदोलन के लिए अधिक महत्वपूर्ण है।वांगचुक ने कहा कि उन्होंने दूसरे विकल्प को इसलिए चुना क्योंकि किसी भी आंदोलन की सफलता उसके लंबे संघर्ष में होती है। उनका कहना था कि यदि वे अपनी जान गंवा देते तो छात्रों की लड़ाई कमजोर पड़ सकती थी। इसलिए उन्होंने अनशन समाप्त करने का कठिन लेकिन आवश्यक निर्णय लिया।


धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर क्या बोले

सोनम वांगचुक ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर सरकार की ओर से कोई निश्चित समयसीमा नहीं बताई गई। उन्होंने कहा कि यदि मंत्री इस्तीफा देते तो उससे उनका ही राजनीतिक नुकसान रुकता, लेकिन इस्तीफा न देने से छात्रों या आंदोलन को कोई नुकसान नहीं होगा।उन्होंने कहा कि उनकी लड़ाई किसी एक व्यक्ति के खिलाफ नहीं बल्कि परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही तय कराने की है। उनका उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था में सुधार और छात्रों को न्याय दिलाना है। इसलिए उन्होंने व्यक्तिगत मांगों की बजाय व्यापक सुधार को अधिक महत्वपूर्ण माना।


छात्रों पर मामला दर्ज न हो, यही सबसे बड़ी प्राथमिकता

वांगचुक ने कहा कि उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण विषय यह था कि आंदोलन में शामिल छात्रों और युवाओं के विरुद्ध कोई आपराधिक मामला दर्ज न किया जाए। उन्होंने कहा कि यदि छात्रों पर मुकदमे दर्ज हो जाते हैं तो उनका भविष्य लंबे समय तक प्रभावित हो सकता है।उन्होंने लद्दाख के अपने अनुभवों का उल्लेख करते हुए कहा कि एक बार किसी युवक पर मामला दर्ज हो जाए तो उसे वर्षों तक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इसी कारण उन्होंने सरकार से सबसे पहले छात्रों के विरुद्ध कार्रवाई न करने का आग्रह किया और इसे अपनी सबसे बड़ी प्राथमिकता बताया।


संसद में होगी परीक्षा व्यवस्था पर चर्चा

सोनम वांगचुक ने कहा कि उन्हें सरकार और विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसदों से यह भरोसा मिला है कि संसद में परीक्षा प्रणाली की कमियों और जवाबदेही पर व्यापक चर्चा होगी। उन्होंने कहा कि प्रश्नपत्र लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस सुधार आवश्यक हैं।उन्होंने यह भी कहा कि शांतिपूर्ण ढंग से आंदोलन करने वाले छात्रों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। उनका मानना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में छात्रों को अपनी बात रखने का अधिकार है और सरकार को उनकी चिंताओं का समाधान संवाद के माध्यम से करना चाहिए।