दूध खरीद सीमा बढ़ी किसानों को मिलेगा लाभ

हिमाचल प्रदेश में दुग्ध उत्पादकों के लिए बड़ा निर्णय लिया गया है। अब मिल्कफेड प्रत्येक पशुपालक से प्रतिदिन अधिकतम 20 लीटर दूध खरीदेगा। सरकार का उद्देश्य अधिक से अधिक छोटे और सीमांत किसानों को सहकारी दुग्ध व्यवस्था से जोड़ना है।

दूध खरीद सीमा बढ़ी किसानों को मिलेगा लाभ

दि राइजिंग न्यूज़ | शिमला | 15 जून 2026

दूध बेचने वाले किसानों के लिए बड़ा फैसला

हिमाचल प्रदेश सरकार और राज्य सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ ने डेयरी क्षेत्र को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। नए निर्णय के तहत अब प्रत्येक दुग्ध उत्पादक पशुपालक से प्रतिदिन अधिकतम 20 लीटर दूध की खरीद की जाएगी। इस पहल का उद्देश्य छोटे और सीमांत किसानों को सहकारी दुग्ध व्यवस्था से जोड़ना तथा उनकी आय में वृद्धि करना है।

अधिक किसानों को मिलेगा लाभ

मिल्कफेड के अधिकारियों के अनुसार नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दुग्ध क्षेत्र में मिलने वाले लाभ केवल बड़े उत्पादकों तक सीमित न रहें। दूध खरीद की सीमा निर्धारित होने से अधिक संख्या में ग्रामीण परिवार सहकारी व्यवस्था का हिस्सा बन सकेंगे और उन्हें अपने उत्पाद का उचित मूल्य प्राप्त होगा।अधिकारियों का कहना है कि इस निर्णय से नए दुग्ध उत्पादकों का पंजीकरण बढ़ेगा और सहकारी दुग्ध नेटवर्क का विस्तार होगा। इससे गांवों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

दूध के समर्थन मूल्य में बड़ी बढ़ोतरी

राज्य सरकार ने हाल के वर्षों में दूध के न्यूनतम समर्थन मूल्य में उल्लेखनीय वृद्धि की है। गाय के दूध का समर्थन मूल्य 32 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 61 रुपये प्रति लीटर किया गया है। वहीं भैंस के दूध का समर्थन मूल्य 47 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 71 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है।सरकार का मानना है कि समर्थन मूल्य में वृद्धि से किसानों को बेहतर आय प्राप्त होगी और पशुपालन को लाभकारी व्यवसाय के रूप में बढ़ावा मिलेगा।

डेयरी क्षेत्र में बढ़ी किसानों की भागीदारी

पिछले दो वर्षों में हिमाचल प्रदेश में सहकारी दुग्ध व्यवस्था से जुड़ने वाले किसानों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2024 में जहां लगभग 28 हजार 645 दुग्ध उत्पादक इस व्यवस्था से जुड़े थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 42 हजार 500 तक पहुंच गई है।इसी अवधि में राज्य में प्रतिदिन दूध संग्रहण की मात्रा भी बढ़ी है। पहले जहां लगभग 1 लाख 57 हजार लीटर दूध प्रतिदिन एकत्र किया जाता था, वहीं अब यह आंकड़ा बढ़कर 2 लाख 20 हजार लीटर प्रतिदिन तक पहुंच चुका है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा सहारा

हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्य में पशुपालन ग्रामीण जीवन और आय का महत्वपूर्ण आधार माना जाता है। ऐसे में सरकार की यह पहल ग्रामीण परिवारों के लिए अतिरिक्त आय का मजबूत स्रोत बन सकती है। अधिक किसानों को सहकारी व्यवस्था से जोड़ने से ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक स्थिरता बढ़ेगी। साथ ही दुग्ध उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन से जुड़े क्षेत्रों में भी नए अवसर पैदा होंगे।

डेयरी क्षेत्र को मिलेगा नया विस्तार

मिल्कफेड का विश्वास है कि दूध खरीद की नई व्यवस्था से छोटे पशुपालकों का भरोसा बढ़ेगा और वे बड़े पैमाने पर सहकारी नेटवर्क से जुड़ेंगे। इससे राज्य में दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और डेयरी क्षेत्र का विस्तार होगा। सरकार को उम्मीद है कि यह निर्णय किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और हिमाचल प्रदेश को दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।