PET के इम्तिहान में परिवार भी बना हमसफर:गाजीपुर में किसी ने पत्नी के लिए छोड़ी नींद, कोई बेटी संग तड़के घर से निकला

Nov 01, 2026 - 08:44
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PET के इम्तिहान में परिवार भी बना हमसफर:गाजीपुर में किसी ने पत्नी के लिए छोड़ी नींद, कोई बेटी संग तड़के घर से निकला
गाजीपुर में रविवार सुबह 10 बजे PET की परीक्षा शुरू होनी है, लेकिन अभ्यर्थियों का इम्तिहान कई घंटे पहले ही शुरू हो गया। कोई पत्नी को परीक्षा दिलाने रात की ड्यूटी के बाद निकला, तो कोई बेटी के साथ भोर में घर से चला। दूर जिलों से आए कई अभ्यर्थियों और उनके परिजनों ने बस अड्डे और रेलवे स्टेशन पर रात गुजारी। सुबह परीक्षा केंद्रों के बाहर कहीं पिता बेटी का इंतजार करते दिखे, तो कहीं पति पत्नी का हौसला बढ़ाता नजर आया। इस परीक्षा के लिए सिर्फ अभ्यर्थियों ने ही तैयारी नहीं की, बल्कि उनके परिवार भी सफर में साथ चले। किसी ने रास्ते में नोट्स दोहराए, तो किसी ने परीक्षा से पहले नींद पूरी करने की कोशिश की। परिवारों ने लंबा सफर, रातभर की थकान और आने-जाने का खर्च उठाकर अपनों को परीक्षा केंद्र तक पहुंचाया। रात की ड्यूटी के बाद पत्नी को लेकर निकले, रास्ते में देखे नोट्स चंदौली के मुगलसराय निवासी नफीस अहमद पत्नी रजिया बेगम को PET दिलाने रविवार तड़के 3 बजे घर से निकले। मुगलसराय से ऑटो से वाराणसी पहुंचे और वहां से रोडवेज बस पकड़कर गाजीपुर आए। सुबह 6 बजे महुआबाग स्थित परीक्षा केंद्र पहुंच गए। रजिया संविदा पर ANM हैं और तीसरी बार PET दे रही हैं। शनिवार रात डिलीवरी के केस के चलते रजिया की ड्यूटी थी। पूरी रात काम करने के बाद उन्होंने घर की जिम्मेदारियां संभालीं और फिर परीक्षा के लिए निकल पड़ीं। अलग से तैयारी का समय नहीं मिला तो रास्ते में ही नोट्स के पन्ने पलटती रहीं। नफीस ने बताया कि उनके दो बच्चे हैं। 22 वर्षीय बेटा मोहम्मद आसिफ भी पहली बार PET देने जौनपुर गया है, जबकि 12 साल की बेटी कक्षा सात में पढ़ती है। दोनों बच्चों को नानी के पास छोड़कर वे पत्नी के साथ गाजीपुर पहुंचे। इस सफर में करीब 500 रुपए खर्च हुए। बेटी की परीक्षा के लिए रात में पकड़ी बस, सफर में किया आराम जौनपुर के राजनाथ यादव अपनी बेटी कौशकी को पहली बार PET दिलाने गाजीपुर पहुंचे। शनिवार रात 9:30 बजे घर से प्रयागराज जाने वाली बस पकड़ी। वहां से दूसरी रोडवेज बस से गाजीपुर आए और रविवार सुबह करीब 6 बजे पहुंचे। कौशकी पिछले दो साल से परीक्षा की तैयारी कर रही हैं। लंबे सफर के कारण उन्होंने रास्ते में किताबें खोलने के बजाय आराम करना बेहतर समझा, ताकि परीक्षा के समय थकान न हो। राजनाथ ने बताया कि बेटी को परीक्षा दिलाने के लिए आने-जाने में करीब एक हजार रुपए खर्च हुए। कार में नोट्स दोहराती रही बेटी, छोटा बेटा घर पर अकेला रहा चंदौली के डीके गौतम रविवार तड़के पत्नी और बेटी प्रतिमा जैन को लेकर कार से गाजीपुर के लिए निकले। सुबह 5 बजे घर से चले और करीब 7 बजे महुआबाग स्थित आदर्श इंटर कॉलेज पहुंच गए। प्रतिमा दूसरी बार PET दे रही हैं। पिछली बार भी उनका केंद्र गाजीपुर में था, लेकिन उसे खोजने में काफी समय लग गया था। इस बार केंद्र शहर में होने से परिवार को राहत मिली। डीके गौतम ने बताया कि बेटी को परीक्षा दिलाने के लिए पूरा परिवार सुबह 3 बजे से जाग गया था। रास्तेभर प्रतिमा कार में नोट्स दोहराती रहीं। परिवार का दूसरा 12 वर्षीय बेटा घर पर ही रह गया। गाजीपुर आने में करीब एक हजार रुपए का पेट्रोल खर्च हुआ। प्रतिमा ने बताया कि पिछली बार उनका स्कोर अच्छा नहीं था, इसलिए इस बार बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है। माता-पिता के साथ आने से सफर में हौसला भी मिला और तैयारी का मौका भी। किसी ने बस अड्डे पर गुजारी रात, किसी ने स्टेशन पर किया इंतजार मिर्जापुर के विजयपुर गांव निवासी आनंद कुमार श्रीवास्तव बेटे अक्षत राज श्रीवास्तव को पहली बार PET दिलाने शनिवार दोपहर 3 बजे घर से निकले। बस से रात करीब 11:30 बजे गाजीपुर पहुंचे। देर रात ठहरने की व्यवस्था नहीं मिली तो रोडवेज बस स्टैंड पर ही रात बिताई। मच्छरों के कारण पिता-पुत्र ठीक से सो नहीं सके। सुबह परीक्षा केंद्र के बाहर अक्षत नोट्स पलटते रहे। आनंद ने बताया कि बेटे को परीक्षा दिलाने के लिए करीब 800 रुपए खर्च हुए। देवरिया के रामाशंकर प्रसाद भी बेटे चंचल प्रसाद को परीक्षा दिलाने शनिवार शाम 5 बजे घर से निकले। ट्रेन से बिहार होते हुए औड़िहार पहुंचे और वहां से गाजीपुर आए। रविवार तड़के करीब 3:15 बजे स्टेशन पर उतरने के बाद कुछ देर वहीं रुके। फिर परीक्षा केंद्र के बाहर इंतजार करने लगे। चंचल पिछले दो साल से PET की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि लंबा सफर और ठहरने की उचित व्यवस्था नहीं होने से नींद पूरी नहीं हुई। परीक्षा से पहले केंद्र के बाहर ही कुछ देर नोट्स दोहराए। अभ्यर्थियों की भीड़ देख सुबह 5 बजे खुलीं दुकानें PET परीक्षा का असर शहर की सुबह पर भी दिखा। महुआबाग में चाय-पकौड़ी की दुकान चलाने वाले राहुल भारद्वाज ने अभ्यर्थियों और उनके परिजनों की भीड़ को देखते हुए रविवार सुबह 5 बजे ही दुकान खोल दी। आम दिनों में उनकी दुकान सुबह 7 बजे खुलती है। राहुल ने बताया कि परीक्षा के चलते पहली बार इतनी सुबह दुकान खोली। रोज की तुलना में सुबह ही अच्छी दुकानदारी हो गई। परीक्षा शुरू होने से पहले केंद्रों के बाहर कहीं अभ्यर्थी नोट्स के पन्ने पलटते दिखे, तो कहीं उनके परिजन चाय की चुस्कियों के बीच इंतजार करते रहे। सुबह 10 बजे होने वाली परीक्षा से कई घंटे पहले ही शहर में इम्तिहान की हलचल शुरू हो गई थी।

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