मोदी हमारा फोन भी नहीं उठाते', शहबाज़ के सलाहकार ने बयां किया दर्द
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ के विशेष सलाहकार राणा सनाउल्लाह खान ने भारत के साथ संबंधों को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने भारत से रिश्ते सुधारने का सुनहरा अवसर स्वयं गंवा दिया और आज हालात ऐसे हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पाकिस्तान का फोन तक नहीं उठाते। उनके इस बयान के बाद पाकिस्तान की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है।
दि राइजिंग न्यूज़ | लाहौर | 11 जुलाई 2026
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ के विशेष सलाहकार राणा सनाउल्लाह खान का एक बयान इस समय भारत और पाकिस्तान दोनों देशों में चर्चा का विषय बना हुआ है। एक पाकिस्तानी समाचार चैनल पर बातचीत के दौरान उन्होंने खुलकर स्वीकार किया कि भारत के साथ बेहतर संबंध बनाने का जो अवसर पाकिस्तान के पास था, उसे वहां की राजनीतिक सोच और नीतियों ने स्वयं समाप्त कर दिया। उन्होंने कहा कि वर्षों तक भारत विरोध को राजनीतिक मुद्दा बनाने का नुकसान आज पूरे पाकिस्तान को उठाना पड़ रहा है।राणा सनाउल्लाह ने कहा कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ संबंधों को बेहतर बनाने की संभावनाएं पहले मौजूद थीं, लेकिन पाकिस्तान के भीतर लगातार विरोध और राजनीतिक टकराव की वजह से वे अवसर हाथ से निकल गए। उनके अनुसार यदि उस समय समझदारी से फैसले लिए जाते, तो दोनों देशों के बीच आज का माहौल बिल्कुल अलग होता। उन्होंने यह भी माना कि वर्तमान स्थिति के लिए केवल भारत को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा, बल्कि पाकिस्तान को भी अपनी गलतियों का आत्मविश्लेषण करना चाहिए।
मोदी की लाहौर यात्रा को बताया ऐतिहासिक अवसर
राणा सनाउल्लाह ने वर्ष २०१५ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लाहौर यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि वह दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली की दिशा में एक बड़ा और सकारात्मक कदम था। उन्होंने कहा कि किसी भारतीय प्रधानमंत्री का इस तरह अचानक पाकिस्तान पहुंचना दोनों देशों के रिश्तों में नई शुरुआत का संकेत माना जा रहा था। उस समय पूरे क्षेत्र में यह उम्मीद जगी थी कि लंबे समय से चले आ रहे तनाव को समाप्त कर सहयोग का नया दौर शुरू हो सकता है।उन्होंने कहा कि यदि उस अवसर का सही तरीके से लाभ उठाया जाता, तो आज भारत और पाकिस्तान के बीच व्यापार, निवेश, पर्यटन और सांस्कृतिक संबंध कहीं अधिक मजबूत होते। उनका मानना है कि राजनीतिक मतभेदों और आपसी अविश्वास ने उस ऐतिहासिक अवसर को पूरी तरह समाप्त कर दिया। उन्होंने संकेत दिया कि उस समय लिए गए गलत निर्णयों का असर आज भी दोनों देशों के संबंधों पर दिखाई दे रहा है।
'आज मोदी हमारा फ़ोन भी नहीं उठाते' कहकर जताई निराशा
कार्यक्रम के दौरान जब भारत के साथ वर्तमान संबंधों को लेकर सवाल पूछा गया, तब राणा सनाउल्लाह ने कहा कि आज स्थिति ऐसी हो चुकी है कि भारत का नेतृत्व पाकिस्तान की बात सुनने तक में रुचि नहीं दिखाता। उन्होंने कहा कि यदि आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पाकिस्तान का फ़ोन नहीं उठाते हैं, तो इसके लिए पाकिस्तान को स्वयं जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए। उन्होंने इसे वर्षों से चली आ रही गलत नीतियों और निर्णयों का परिणाम बताया।उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में एक ओर भारत से तनाव की आशंका जताई जाती है, वहीं दूसरी ओर जब भी कोई संबंध सुधारने की पहल करता है तो उसका राजनीतिक विरोध शुरू हो जाता है। इस प्रकार की विरोधाभासी राजनीति ने पाकिस्तान की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाया है। उनके अनुसार केवल आरोप लगाने से हालात नहीं बदलेंगे, बल्कि पाकिस्तान को अपनी विदेश नीति में व्यावहारिक बदलाव लाने होंगे।
पीछे के माध्यम से संपर्क कभी पूरी तरह बंद नहीं हुआ
राणा सनाउल्लाह ने बातचीत के दौरान यह भी स्वीकार किया कि भारत और पाकिस्तान के बीच औपचारिक वार्ता भले ही लंबे समय से बंद हो, लेकिन पीछे के माध्यम से संपर्क पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच समय-समय पर ऐसे प्रयास होते रहे हैं जिनका उद्देश्य तनाव कम करना और संवाद की संभावनाओं को जीवित रखना होता है।उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में ऐसे संपर्क सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं। कई बार सार्वजनिक रूप से बातचीत संभव नहीं होती, लेकिन दोनों पक्ष विभिन्न माध्यमों से संवाद बनाए रखते हैं ताकि भविष्य में रिश्तों को सामान्य बनाने की संभावनाएं बनी रहें। हालांकि उन्होंने इन संपर्कों से जुड़ी किसी विशेष बैठक या अधिकारी का नाम सार्वजनिक नहीं किया।
नवाज़ शरीफ़ की नीति की भी की सराहना
राणा सनाउल्लाह ने पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ की नीतियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि नवाज़ शरीफ़ हमेशा भारत के साथ शांतिपूर्ण संबंध स्थापित करने के पक्षधर रहे और उनका मानना था कि पड़ोसी देशों के बीच स्थायी शांति दोनों देशों के हित में है। यदि उस समय उनकी सोच को पूरा समर्थन मिला होता, तो आज पूरे दक्षिण एशिया का वातावरण अधिक शांत और स्थिर हो सकता था।उन्होंने कहा कि दुर्भाग्यवश पाकिस्तान में हर बार भारत के साथ संबंध सुधारने की कोशिशों को राजनीतिक विवाद का विषय बना दिया गया। इससे न केवल शांति प्रक्रिया प्रभावित हुई बल्कि पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय छवि पर भी नकारात्मक असर पड़ा। उनके अनुसार अब भी यदि गंभीर प्रयास किए जाएं तो भविष्य में संबंधों में सुधार की संभावना बनी हुई है।
भारत से बेहतर संबंधों के आर्थिक लाभ भी बताए
राणा सनाउल्लाह ने कहा कि यदि भारत और पाकिस्तान के बीच सामान्य और सौहार्दपूर्ण संबंध स्थापित होते, तो इसका सबसे बड़ा लाभ पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को मिलता। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ने से रोजगार के नए अवसर पैदा होते, उद्योगों को मजबूती मिलती और सीमावर्ती क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां तेज होतीं।उन्होंने यह भी कहा कि मजबूत आर्थिक सहयोग की स्थिति में पाकिस्तान को बार-बार अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों से सहायता लेने की आवश्यकता कम पड़ती। उनके अनुसार पड़ोसी देशों के साथ बेहतर संबंध किसी भी राष्ट्र की आर्थिक प्रगति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। इसलिए पाकिस्तान को भविष्य में टकराव की बजाय सहयोग की नीति अपनाने पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
बयान से पाकिस्तान में तेज हुई राजनीतिक बहस
राणा सनाउल्लाह के इस बयान के बाद पाकिस्तान के राजनीतिक गलियारों में नई बहस शुरू हो गई है। कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पहली बार सत्ता पक्ष के इतने वरिष्ठ नेता ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि भारत के साथ संबंध खराब होने में पाकिस्तान की भी बड़ी भूमिका रही है। वहीं कुछ लोग इसे वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में दिया गया आत्ममंथन का संदेश मान रहे हैं।आने वाले दिनों में यह बयान पाकिस्तान की आंतरिक राजनीति के साथ-साथ भारत-पाकिस्तान संबंधों की चर्चा में भी महत्वपूर्ण विषय बना रह सकता है। हालांकि दोनों देशों के बीच औपचारिक संबंधों में किसी तत्काल बदलाव के संकेत फिलहाल दिखाई नहीं दे रहे हैं।