संसद मार्च पर लाठीचार्ज के बाद असदुद्दीन ओवैसी का केंद्र सरकार पर हमला
दिल्ली में संसद मार्च के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई पर सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने लोकतांत्रिक अधिकारों और पुराने आंदोलनों का उल्लेख करते हुए बल प्रयोग पर सवाल उठाए। इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक बयानबाजी और सामाजिक माध्यमों पर चर्चा तेज हो गई।
दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 21 जुलाई 2026
दिल्ली में संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई झड़प के बाद देश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज और बल प्रयोग को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों की ओर से लगातार प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने इस पूरे घटनाक्रम पर केंद्र सरकार को निशाने पर लेते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिकों को शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है। उन्होंने कहा कि विरोध प्रदर्शनों को बल प्रयोग से रोकना लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुकूल नहीं माना जा सकता। साथ ही उन्होंने देश में पहले हुए आंदोलनों का उल्लेख करते हुए सरकार की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए।
संसद मार्च के दौरान कैसे बिगड़े हालात
दिल्ली में आयोजित संसद मार्च के लिए बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी राजधानी पहुंचे थे। प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए कई स्थानों पर बैरिकेडिंग की थी और अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई थी। प्रदर्शनकारियों के निर्धारित मार्ग से आगे बढ़ने की कोशिश के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच पहले कहासुनी हुई, जिसके बाद स्थिति धीरे-धीरे तनावपूर्ण होती चली गई।प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड हटाने का प्रयास किया, जबकि पुलिस उन्हें आगे बढ़ने से रोकती रही। इसी दौरान धक्का-मुक्की की स्थिति बनी और हालात बिगड़ने पर पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग किया। इस पूरे घटनाक्रम के वीडियो और तस्वीरें कुछ ही समय में सामाजिक माध्यमों पर तेजी से प्रसारित होने लगीं, जिसके बाद यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया।
असदुद्दीन ओवैसी ने केंद्र सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने संसद मार्च के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है, जहां प्रत्येक नागरिक को अपनी मांगों और समस्याओं को शांतिपूर्ण तरीके से रखने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है। यदि किसी प्रदर्शन को बल प्रयोग के माध्यम से रोका जाता है तो इससे लोकतांत्रिक मूल्यों पर प्रश्नचिह्न खड़े होते हैं।ओवैसी ने कहा कि सरकार को विरोध कर रहे लोगों की बात सुननी चाहिए और उनकी समस्याओं का समाधान संवाद के माध्यम से निकालना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि असहमति व्यक्त करने वालों के साथ कठोर व्यवहार लोकतंत्र की भावना के अनुरूप नहीं है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में नई बहस शुरू हो गई।
पुराने आंदोलनों का दिलाया स्मरण
अपने बयान के दौरान असदुद्दीन ओवैसी ने देश में पहले हुए कई बड़े आंदोलनों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारतीय लोकतंत्र का इतिहास इस बात का साक्षी रहा है कि विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक और किसान संगठनों ने समय-समय पर अपनी मांगों को लेकर आंदोलन किए हैं। इन आंदोलनों के दौरान संवाद और राजनीतिक सहमति को प्राथमिकता दी जाती रही है।उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध प्रदर्शन को लोकतंत्र का अभिन्न हिस्सा माना जाता है। यदि प्रदर्शनकारियों की मांगों पर बातचीत के बजाय बल प्रयोग किया जाता है, तो इससे लोकतांत्रिक संस्थाओं में लोगों का विश्वास प्रभावित हो सकता है। ओवैसी ने सरकार से सभी पक्षों के साथ बातचीत कर समाधान निकालने की अपील भी की।
संसद मार्च के बाद तेज हुई राजनीतिक बयानबाजी
संसद मार्च के दौरान हुई घटनाओं के बाद राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। विपक्षी दलों ने पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं और आरोप लगाया है कि विरोध की आवाज को दबाने का प्रयास किया गया। कई विपक्षी नेताओं ने इस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच की भी मांग की है।दूसरी ओर सरकार समर्थक नेताओं का कहना है कि राजधानी में कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है। उनके अनुसार यदि किसी प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका होती है तो पुलिस को आवश्यक कदम उठाने का अधिकार होता है। इसी मुद्दे को लेकर दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक बयानबाजी लगातार जारी है।
सामाजिक माध्यमों पर भी छिड़ी बहस
संसद मार्च से जुड़े वीडियो सामने आने के बाद सामाजिक माध्यमों पर भी इस विषय को लेकर व्यापक चर्चा देखने को मिली। अनेक लोगों ने पुलिस कार्रवाई की आलोचना करते हुए प्रदर्शनकारियों के लोकतांत्रिक अधिकारों का समर्थन किया। वहीं कुछ लोगों ने राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए प्रशासन के कदमों को आवश्यक बताया।विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों से जुड़े लोगों ने भी इस विषय पर अपनी-अपनी राय व्यक्त की। कई वीडियो, तस्वीरें और बयान पूरे दिन चर्चा का विषय बने रहे। इस कारण संसद मार्च से जुड़ा यह घटनाक्रम राष्ट्रीय राजनीति के साथ-साथ सामाजिक माध्यमों पर भी प्रमुख विषय बन गया।
आगे क्या हो सकता है
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि संसद मार्च के दौरान हुई घटनाओं का असर आने वाले दिनों में भी राजनीतिक माहौल पर दिखाई दे सकता है। विपक्ष इस मुद्दे को लेकर सरकार को लगातार घेरने का प्रयास कर सकता है, जबकि सरकार कानून-व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था को अपने निर्णय का आधार बता सकती है। इससे संसद के भीतर और बाहर भी इस विषय पर बहस जारी रहने की संभावना है।यदि संबंधित पक्षों के बीच संवाद स्थापित नहीं होता है तो यह विवाद और अधिक गहरा सकता है। प्रशासन की ओर से पूरे घटनाक्रम की समीक्षा किए जाने और आवश्यक होने पर आगे की कार्रवाई किए जाने की संभावना भी जताई जा रही है। आने वाले दिनों में इस मामले से जुड़े नए राजनीतिक बयान और घटनाक्रम सामने आ सकते हैं।