‘साफ-सुथरा रहने की बीमारी’ ने स्टूडेंट की जान ली:नोट में लिखा- बुरा होने का डर रहता है; एक काम बार-बार क्यों करते हैं लोग

Nov 05, 2026 - 05:50
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‘साफ-सुथरा रहने की बीमारी’ ने स्टूडेंट की जान ली:नोट में लिखा- बुरा होने का डर रहता है; एक काम बार-बार क्यों करते हैं लोग
आपने अक्सर सुना होगा कि फलां व्यक्ति को ‘सफाई करने की बीमारी’ है या फलां व्यक्ति एक ही काम को दोहराता रहता है…। दो दिन पहले इसी बीमारी की वजह से प्रयागराज की रितु शर्मा ने सुसाइड कर लिया। डेथ नोट में लिखा- मैं एक ही चीज को बार-बार दोहराती हूं। ऐसा नहीं करने पर दिमाग मुझे डराता है कि कुछ बुरा हो जाएगा। अब मैं थक चुकी हूं, इसलिए सुसाइड कर रही हूं। रितु का में MBBS सिलेक्शन हुआ था, सोनभद्र में सरकारी मेडिकल कॉलेज मिला था। आखिर क्या है ये ‘सफाई की बीमारी’ जिसने एक होनहार छात्रा को सुसाइड करने पर मजबूर कर दिया? सवाल 1 : रितु के डेथ नोट से क्या पता चलता है? जवाब : एक्सपर्ट बताते हैं कि डेथ नोट में लिखे लक्षण रितु के 'हाई-फंक्शनिंग OCD' या 'प्योर ओ' से पीड़ित होने की ओर इशारा करते हैं। ऐसे मामलों में मेधावी छात्र बाहर से शांत और पढ़ाई में अव्वल दिखते हैं। सवाल 2 : इस बीमारी की वजह क्या है? क्या करियर का दबाव OCD को जन्म दे सकता है? जवाब : जैसे डायबिटीज होने पर शरीर में इंसुलिन नाम का हॉर्मोन कम हो जाता है, उसी तरह OCD होने पर दिमाग की बनावट और उसके केमिकल्स का संतुलन बिगड़ जाता है। सवाल 3 : इस बीमारी से बाहर निकलने के रास्ते क्या हैं? जवाब : मेडिकल गाइडेंस, आधुनिक थेरेपी और दवाओं की मदद से OCD को पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। हालांकि, OCD को किसी खून की जांच, एक्स-रे या MRI स्कैन के जरिए पकड़ा नहीं जा सकता। सवाल 4 : क्या OCD के अलावा भी ऐसी मानसिक समस्याएं जो चुपचाप जिंदगी को प्रभावित करती हैं? जवाब : हां, ऐसी कई मानसिक समस्याएं हैं, जिन्हें अक्सर स्वभाव या मूड समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। लेकिन, वे इंसान को अंदर ही अंदर तोड़ती रहती हैं… GAD (जनरलाइज्ड एंग्जाइटी डिसऑर्डर): बिना किसी ठोस वजह के हर छोटी-बड़ी बात की लगातार बहुत ज्यादा चिंता करना। हाई-फंक्शनिंग डिप्रेशन (डायस्थीमिया): नौकरी, पढ़ाई जैसी बाहरी का सामान्य रूप से करता रहता है। लेकिन, भीतर हमेशा खालीपन, थकान और उदासी महसूस होती है। PTSD (पोस्ट-ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर): हर समय अतीत के किसी ट्रॉमा जैसे कोई एक्सीडेंट या अपनों को खोने की याद में जीना। सोशल एंग्जाइटी डिसऑर्डर: लोगों से मिलने, बातचीत करने या भीड़ में जाने से डर और घबराहट होना। एंग्जाइटी: सामान्य जीवन की वास्तविक चीजों जैसे- करियर, सेहत, परीक्षा, पैसा वगैरह को लेकर बहुत ज्यादा चिंता करना। फ्री-फ्लोटिंग एंग्जाइटी: दिमाग हमेशा बुरा होने की कल्पना करता है, जैसे- कोई घर से बाहर गया है तो पक्का एक्सीडेंट हो जाएगा। यह GAD (जनरलाइज्ड एंग्जाइटी डिसऑर्डर) या OCD का एक बहुत ही प्रमुख लक्षण है। डिप्रेशन: यह उदासी का जटिल रूप है। उदासी किसी बुरी घटना के कारण होती है और कुछ दिन में ठीक हो जाती है। बीच-बीच में खुशी का अहसास भी होता है। लेकिन, डिप्रेशन बिना किसी वजह के हो सकता है। यह लगातार 2 हफ्ते से ज्यादा बना रहता है। व्यक्ति उन चीजों में भी आनंद नहीं ले पाता जो उसे पसंद थीं। ADHD (अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर): दिमाग किसी एक काम पर लंबे समय तक फोकस नहीं कर पाता। इंसान अक्सर भूल जाता है कि चाबी कहां रखी, काम आखिरी वक्त तक टालता है, बिना सोचे-समझे फैसले लेता है। एक जगह शांति से बैठ नहीं पाता। इससे पढ़ाई और ऑफिस में परफॉर्मेंस खराब होने लगती है। सवाल 5 : कैसे पहचानें कि कोई व्यक्ति मानसिक परेशानी से गुजर रहा है? जवाब : मानसिक बीमारी के लक्षण हमेशा पागलपन या जोर-जोर से चिल्लाने के रूप में सामने नहीं आते। कई बार व्यक्ति बाहर से बिल्कुल सामान्य, सफल और मुस्कुराता हुआ दिखता है, लेकिन अपने भीतर ही भीतर एक जंग लड़ रहा होता है। उस व्यक्ति में कुछ इस तरह के संकेत नजर आ सकते हैं… सवाल 6 : आत्महत्या के ख्याल आने पर क्या करें? परिवार-दोस्तों की भूमिका क्या हो? जवाब : कई बार व्यक्ति अपनी लाचारी या निराशा को बयां करने के लिए ऐसी भी आत्महत्या की बात करता है। लेकिन, इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे समय में उसे डांटने या कमजोर, डरपोक, कायर कहने के बजाय उसकी बात को पूरी गंभीरता से सुनना चाहिए। अगर कोई मानसिक परेशानी से गुजर रहा है, तो भारत सरकार और कई संस्थाओं से मदद ले सकता है। ये 24 घंटे मुफ्त और उपलब्ध हैं… टेली-मानस हेल्पलाइन: भारत सरकार की इस हेल्पलाइन पर 14416 या 1800-891-4416 पर कॉल करके 24 घंटे मुफ्त मेंटल हेल्प और काउंसलिंग ली जा सकती है। यह सेवा कई भाषाओं में उपलब्ध है। किरण हेल्पलाइन: सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की हेल्पलाइन 1800-599-0019 पर भी मानसिक सहायता उपलब्ध है। तत्काल आपातकालीन सहायता: अगर जान का सीधा और तत्काल खतरा महसूस हो, तो तुरंत नेशनल इमरजेंसी नंबर 112 पर कॉल कर सकते हैं। ---------------------------------------------------- ये एक्सप्लेनर भी पढ़ें… पुलिस-होमगार्ड भर्ती दौड़ में 7 मौतें: दिल ने साथ छोड़ा या गर्मी ने जान ली; कौन है अभ्यर्थियों की मौत का जिम्मेदार यूपी पुलिस और होमगार्ड भर्ती की दौड़ के दौरान 7 अभ्यर्थियों की मौत हुई। मेरठ के कैलाश प्रकाश स्पोर्ट्स स्टेडियम में होमगार्ड भर्ती की दौड़ के बाद 11 अभ्यर्थियों की तबीयत बिगड़ी।3 की मौत हो गई। लखनऊ, मुरादाबाद और गाजियाबाद में 4 अभ्यर्थियों की मौत हुई। प्रोफेशनल एथलीट और डॉक्टर इसकी क्या वजह बताते हैं, पढ़िए यूपी एक्सप्लेनर में…

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