सुल्तानपुर नकराही शरीफ में उमड़ी जायरीनों की भीड़:कबीर के दोहे से उर्स में दिया गया भाईचारे का संदेश, समापन
सुल्तानपुर की प्रतिष्ठित दरगाह नकराही शरीफ में पांच दिवसीय उर्स बुधवार देर रात संपन्न हो गया। आयोजकों के मुताबिक, उर्स में दूर-दराज से करीब डेढ़ लाख जायरीन पहुंचे। इस दौरान उनके लिए लंगर, पानी, दवा और अन्य जरूरी सुविधाओं का इंतजाम किया गया। खादिम आजाद शाह वारसी और दरगाह नेक राही शरीफ ट्रस्ट के मीडिया प्रभारी दानिश वारसी ने उर्स के सफल आयोजन में सहयोग के लिए शासन-प्रशासन, पुलिस, जायरीन और दुकानदारों का आभार जताया। सुबह कुल के बाद बांटा गया तबर्रुक उर्स के चौथे दिन सुबह 4:13 बजे सरकार वारिस-ए-पाक का कुल हुआ। इसके बाद जायरीन को तबर्रुक बांटा गया और सामूहिक लंगर का आयोजन किया गया। शाम को नमाज-ए-मगरिब के बाद शुक्राने की महफिल हुई। इसके साथ ही उर्स के कार्यक्रम संपन्न हो गए। आजाद शाह वारसी ने कहा कि उर्स के दौरान पुलिस और सरकारी विभागों का लगातार सहयोग मिला। इससे जायरीन को किसी तरह की परेशानी नहीं हुई। उन्होंने मीडिया के माध्यम से देश में अमन और मोहब्बत का संदेश देते हुए कहा कि हिंदुस्तान में शांति कायम रहे और सभी धर्मों के लोग आपसी सद्भाव के साथ रहें। सभी धर्मों के लोगों के लिए मोहब्बत का केंद्र आजाद शाह वारसी ने कबीर के दोहे, 'कबीरा खड़ा बाजार में, सबकी मांगे खैर, ना काहू से दोस्ती, ना काहू से बैर' का हवाला देते हुए इंसानियत, निष्पक्षता और भाईचारे का संदेश दिया। वहीं, दानिश वारसी ने कहा कि दरगाह नेक राही शरीफ सभी धर्मों और वर्गों के लोगों के लिए मोहब्बत और सद्भाव का केंद्र है। उनके मुताबिक, यहां हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई बिना किसी भेदभाव के आते हैं। दरगाह से प्रेम, इंसानियत और सांप्रदायिक सौहार्द का संदेश दिया जाता है।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)