शामली के दीयों से रोशन होंगे हरियाणा-पंजाब:कुम्हार बोले- कई पीढ़ियों से बना रहे मिट्‌टी के दीपक, ये काम नहीं परंपरा

Oct 26, 2026 - 08:51
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शामली के दीयों से रोशन होंगे हरियाणा-पंजाब:कुम्हार बोले- कई पीढ़ियों से बना रहे मिट्‌टी के दीपक, ये काम नहीं परंपरा
शामली में दीपावली पर घर-आंगन को रोशन करने वाले मिट्टी के दीयों की चमक बाजारों में दिखाई देने लगी है। शामली के कस्बा बढ़ौत में कुम्हार परिवार दीपावली की तैयारियों में जुटे हैं। यहां मिट्टी के दीये और करवे बनकर तैयार हो चुके हैं। खास बात यह है कि शामली में तैयार होने वाले मिट्टी के दीये सिर्फ स्थानीय बाजारों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि हरियाणा और पंजाब तक पहुंचते हैं। दीपावली पर इन दीयों की मांग को पूरा करने के लिए कुम्हार परिवार कई महीने पहले से ही तैयारी शुरू कर देते हैं। कस्बा बढ़ौत निवासी कृष्णपाल बताते हैं कि उनके परिवार में मिट्टी के बर्तन और दीये बनाने का काम पीढ़ियों से चला आ रहा है। उनके पूर्वज भी इसी काम से जुड़े थे। अब परिवार की अगली पीढ़ी भी इस परंपरा को आगे बढ़ा रही है। परिवार के सदस्य मिलकर दीये और करवे तैयार करते हैं। दीपावली के चार महीने पहले से ही काम शुरू हो जाता है, ताकि त्योहार आने तक पर्याप्त संख्या में दीये बनकर तैयार हो सकें। हजारों दीये बनाकर करते हैं बिक्री की तैयारी दीपावली के त्योहार पर मिट्टी के दीयों की मांग बढ़ जाती है। इसी को देखते हुए कुम्हार परिवार पहले से ही बड़ी संख्या में दीये तैयार करके रखता है। कृष्णपाल के अनुसार, वे हर साल हजारों मिट्टी के दीये बनाते हैं। तैयार दीयों की आपूर्ति आसपास के क्षेत्रों के साथ हरियाणा और पंजाब तक की जाती है। उत्तर प्रदेश में भी दीपावली के अवसर पर घर-घर मिट्टी के दीयों की बिक्री होती है। पीढ़ियों से संभाल रखी है परंपरा मिट्टी के दीये बनाना केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि कृष्णपाल के परिवार की पुरानी परंपरा भी है। परिवार के बुजुर्गों से सीखा यह हुनर अब नई पीढ़ी तक पहुंच रहा है। दीपावली के चार महीने पहले से परिवार के सदस्य इस काम में जुट जाते हैं। मिट्टी तैयार करने से लेकर दीयों को आकार देने और बिक्री के लिए तैयार करने तक, परिवार के लोग मिलकर जिम्मेदारी निभाते हैं।दीपावली पर मिट्टी के दीयों की मांग इस पारंपरिक हुनर को जीवित रखने में अहम भूमिका निभाती है। बिजली की झालरों और सजावटी लाइटों के बीच मिट्टी के दीयों का अपना अलग महत्व बना हुआ है। यही वजह है कि शामली के कुम्हार परिवार हर साल दीपावली से पहले हजारों दीये तैयार कर इस परंपरा को आगे बढ़ाने में जुटे रहते हैं।

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