शेयर बाजार में हाहाकार: सप्ताह के पहले दिन सेंसेक्स 800 से ज्यादा अंक टूटा, निफ्टी भी लुढ़का
सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली। सेंसेक्स 800 से अधिक अंक टूटकर खुला जबकि निफ्टी 286 अंक नीचे फिसल गया। ईरान-इजरायल तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक बाजारों में बिकवाली का असर भारतीय बाजार पर साफ दिखाई दिया।
दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली 8 | जून 2026
भारतीय शेयर बाजार में सप्ताह के पहले कारोारी दिन भारी गिरावट देखने को मिली। सोमवार सुबह बाजार खुलते ही निवेशकों में बेचैनी का माहौल बन गया और बड़े पैमाने पर बिकवाली शुरू हो गई। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 800 से अधिक अंक टूटकर खुला, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी करीब 286 अंक नीचे फिसल गया। वैश्विक तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और विदेशी बाजारों में कमजोरी का असर सीधे भारतीय बाजार पर दिखाई दिया।
बाजार खुलते ही निवेशकों में बढ़ी चिंता
सोमवार को कारोबार शुरू होते ही सेंसेक्स करीब 821 अंक की गिरावट के साथ 73,421 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं निफ्टी 286 अंक टूटकर 23,080 के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया। शुरुआती कारोबार में लगभग सभी प्रमुख कंपनियों के शेयर लाल निशान में दिखाई दिए। बाजार में गिरावट का दायरा इतना व्यापक रहा कि लगभग हर क्षेत्र के शेयरों पर दबाव देखने को मिला। निवेशकों ने जोखिम वाले निवेश से दूरी बनानी शुरू कर दी है। वैश्विक घटनाक्रमों के कारण बाजार में अनिश्चितता बढ़ी है, जिसका असर घरेलू निवेशकों के मनोबल पर भी पड़ा है। यही वजह रही कि कारोबार की शुरुआत से ही बिकवाली का दबाव बना रहा।
छोटे और मझोले शेयरों में भी बड़ी गिरावट
केवल बड़ी कंपनियों के शेयर ही नहीं, बल्कि छोटे और मझोले वर्ग की कंपनियों में भी भारी बिकवाली देखने को मिली। मझोले आकार की कंपनियों का सूचकांक डेढ़ प्रतिशत से अधिक नीचे चला गया, जबकि छोटे आकार की कंपनियों के सूचकांक में भी तेज गिरावट दर्ज की गई।बाजार विश्लेषकों के अनुसार जब निवेशकों में भय का माहौल बनता है तो वे सबसे पहले जोखिम वाले क्षेत्रों से धन निकालते हैं। इसी कारण छोटे और मझोले शेयरों पर दबाव अधिक दिखाई दिया। कई कंपनियों के शेयरों में शुरुआती घंटों में ही तेज गिरावट दर्ज की गई।
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का बाजार पर असर
ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक वित्तीय बाजारों को झटका दिया है। हाल के मिसाइल हमलों के बाद निवेशकों में आशंका बढ़ गई है कि यदि संघर्ष और बढ़ता है तो इसका असर वैश्विक व्यापार तथा ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है।इस तनाव के कारण दुनिया भर के निवेशकों ने सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करना शुरू कर दिया है। परिणामस्वरूप शेयर बाजारों से धन निकल रहा है और अधिकांश देशों के बाजार दबाव में दिखाई दे रहे हैं। भारतीय बाजार भी इसी वैश्विक माहौल से प्रभावित हुआ है।
कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल से बढ़ी परेशानी
पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखा गया। विशेषज्ञों को आशंका है कि यदि खाड़ी क्षेत्र में हालात और बिगड़ते हैं तो तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, जिससे कीमतें और बढ़ सकती हैं।भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। ऐसे में तेल महंगा होने का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। इससे परिवहन लागत बढ़ सकती है, महंगाई पर दबाव बन सकता है और कंपनियों के मुनाफे पर भी असर पड़ सकता है। यही चिंता शेयर बाजार में गिरावट की एक बड़ी वजह बनी।
एशियाई बाजारों में भी दिखी भारी बिकवाली
भारतीय बाजार खुलने से पहले एशिया के प्रमुख शेयर बाजारों में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई। दक्षिण कोरिया का प्रमुख सूचकांक आठ प्रतिशत से अधिक टूट गया, जिससे निवेशकों में घबराहट का माहौल बन गया। तकनीक और चिप निर्माण क्षेत्र की कंपनियों में सबसे अधिक बिकवाली देखी गई।जापान का प्रमुख बाजार भी चार प्रतिशत से अधिक नीचे चला गया। इसके अलावा हांगकांग के बाजार में भी कमजोरी बनी रही। एशिया के प्रमुख बाजारों में आई इस गिरावट ने भारतीय निवेशकों के भरोसे को कमजोर किया और घरेलू बाजार में बिकवाली बढ़ गई।
अमेरिका से मिले संकेत भी बाजार के लिए नकारात्मक
अमेरिकी बाजारों से मिले संकेत भी निवेशकों के लिए उत्साहजनक नहीं रहे। अमेरिका में रोजगार से जुड़े आंकड़े उम्मीद से बेहतर आने के बाद यह संभावना कम हो गई है कि वहां की केंद्रीय बैंक जल्द ब्याज दरों में कटौती करेगा।ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रहने की आशंका से वैश्विक निवेशकों की चिंता बढ़ गई है। इससे अमेरिकी बांड प्रतिफल में तेजी आई है और निवेशक शेयर बाजार की बजाय सुरक्षित निवेश विकल्पों को प्राथमिकता दे रहे हैं। इसका असर दुनिया भर के बाजारों पर दिखाई दे रहा है।
कच्चे तेल में लगातार तेजी बनी हुई
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में दो प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई। विभिन्न वैश्विक मानकों के अनुसार कच्चे तेल के दाम लगातार ऊपर जा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि भू-राजनीतिक संकट लंबा खिंचता है तो तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं।ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ती लागत का असर परिवहन, उद्योग और उपभोक्ता वस्तुओं तक पहुंच सकता है। यही कारण है कि तेल की कीमतों में तेजी को निवेशक गंभीरता से देख रहे हैं और इसका असर शेयर बाजार पर भी पड़ रहा है।
रुपये पर भी बढ़ा दबाव
विदेशी निवेशकों की सतर्कता और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के कारण भारतीय मुद्रा पर भी दबाव देखने को मिला है। डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी दर्ज की गई, जिससे आयात आधारित क्षेत्रों की चिंता बढ़ गई है। विदेशी निवेश की निकासी जारी रहती है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव बना रहता है तो रुपये पर दबाव और बढ़ सकता है। इसका प्रभाव बाजार की धारणा और निवेशकों के निर्णयों पर भी देखने को मिल सकता है।
आगे क्या रहेगी बाजार की दिशा
विश्लेषकों के अनुसार आने वाले दिनों में बाजार की दिशा काफी हद तक पश्चिम एशिया की स्थिति, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक केंद्रीय बैंकों के रुख पर निर्भर करेगी। यदि अंतरराष्ट्रीय तनाव कम होता है तो बाजार में स्थिरता लौट सकती है, लेकिन हालात बिगड़ने पर और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। निवेशकों को फिलहाल सावधानी बरतने और जल्दबाजी में निर्णय लेने से बचने की सलाह दी जा रही है। बाजार में अस्थिरता बनी रहने की संभावना है, इसलिए विशेषज्ञ दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाने की सलाह दे रहे हैं।