पानी के लिए शहबाज की गुहार, भारत पर साधा निशाना!
शंघाई सहयोग संगठन के शिखर सम्मेलन में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सिंधु जल संधि और आतंकवाद का मुद्दा उठाया। उन्होंने पानी को क्षेत्र की जीवनरेखा बताते हुए इसे हथियार के रूप में इस्तेमाल न करने की बात कही।
पानी को लेकर शहबाज शरीफ ने क्या कहा
शंघाई सहयोग संगठन के शिखर सम्मेलन में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सिंधु जल संधि का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि पानी पूरे क्षेत्र की जीवनरेखा है और इसका इस्तेमाल कभी भी हथियार के तौर पर नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने साझा समझौते के तहत जल संसाधनों के इस्तेमाल और संधि का सम्मान करने की बात कही। शहबाज शरीफ ने अपने संबोधन में भारत का नाम लिए बिना यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय मंच पर रखा।
भारत-पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि पर विवाद
सिंधु जल संधि को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से मतभेद चले आ रहे हैं। हाल के घटनाक्रमों के बीच भारत ने संधि से जुड़े तथाकथित मध्यस्थता न्यायाधिकरण के फैसले को स्वीकार करने से इनकार किया है। भारत का कहना है कि इस न्यायाधिकरण का गठन संधि की शर्तों और विश्व बैंक की भूमिका से जुड़े प्रावधानों के अनुरूप नहीं हुआ। भारत ने इससे जुड़े फैसलों को पहले भी स्वीकार नहीं किया है।
आतंकवाद पर भी बोले पाकिस्तानी प्रधानमंत्री
शहबाज शरीफ ने अपने संबोधन में आतंकवाद का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के हर रूप की निंदा की जानी चाहिए और क्षेत्रीय सहयोग के लिए शंघाई सहयोग संगठन की भूमिका महत्वपूर्ण है। उनका यह बयान ऐसे समय में सामने आया है, जब भारत लंबे समय से पाकिस्तान पर आतंकवाद को लेकर गंभीर आरोप लगाता रहा है। भारत लगातार आतंकवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करता रहा है।
वर्ष 2027 में पाकिस्तान संभालेगा संगठन की अध्यक्षता
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने शंघाई सहयोग संगठन के मंच से संगठन में पाकिस्तान की भूमिका का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान वर्ष 2027 में संगठन की अध्यक्षता करने जा रहा है। शहबाज शरीफ के अनुसार पिछले 25 वर्षों में यह संगठन क्षेत्रीय सहयोग के लिए महत्वपूर्ण मंच के रूप में उभरा है। उन्होंने सदस्य देशों के बीच सहयोग और साझा हितों को आगे बढ़ाने पर भी जोर दिया।
भारत ने न्यायाधिकरण के फैसले को किया खारिज
भारत के विदेश मंत्रालय ने सिंधु जल संधि से जुड़े तथाकथित न्यायाधिकरण के फैसले को पूरी तरह खारिज किया है। भारत ने कहा कि यह संस्था संधि के प्रावधानों के अनुरूप गठित नहीं की गई थी और उसके फैसले को स्वीकार करने का कोई आधार नहीं है। भारत पहले भी इस संस्था से जुड़े फैसलों को अस्वीकार करता रहा है। ऐसे में शहबाज शरीफ द्वारा शंघाई सहयोग संगठन के मंच से पानी का मुद्दा उठाना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
शंघाई सहयोग संगठन में भारत-पाकिस्तान के बीच तल्खी
पानी के मुद्दे के साथ आतंकवाद का विषय भी भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद का प्रमुख कारण रहा है। एक तरफ पाकिस्तान जल संसाधनों और सिंधु जल संधि के प्रावधानों का हवाला दे रहा है, वहीं भारत आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान से जवाबदेही की मांग करता रहा है। शंघाई सहयोग संगठन जैसे बहुपक्षीय मंच पर दोनों देशों के बीच इन मुद्दों की मौजूदगी क्षेत्रीय राजनीति को प्रभावित करती है। आने वाले समय में सिंधु जल संधि को लेकर दोनों देशों का रुख महत्वपूर्ण रहेगा।
मुख्य बिंदु
- शहबाज शरीफ ने शंघाई सहयोग संगठन के शिखर सम्मेलन में पानी का मुद्दा उठाया।
- उन्होंने पानी को क्षेत्र की जीवनरेखा बताते हुए इसे हथियार के रूप में इस्तेमाल न करने की बात कही।
- पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने सिंधु जल संधि का सम्मान करने की अपील की।
- उन्होंने आतंकवाद के हर रूप की निंदा किए जाने की बात कही।
- भारत ने सिंधु जल संधि से जुड़े तथाकथित न्यायाधिकरण के फैसले को खारिज किया है।
- पाकिस्तान वर्ष 2027 में शंघाई सहयोग संगठन की अध्यक्षता करेगा।
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