संभल में जमीन पर कब्जे के मामले में याचिका खारिज:हाईकोर्ट के जज बोले- चेयरमैन को पट्टा देने का अधिकार नहीं था
संभल की 101 करोड़ रुपए मूल्य की 2.5 हेक्टेयर (करीब 38 बीघा) ग्रामसभा भूमि के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उपसंचालक चकबंदी कोर्ट, संभल के आदेश को सही ठहराते हुए याचिका खारिज कर दी। न्यायमूर्ति आशुतोष श्रीवास्तव ने 13 पेज का फैसला सुनाया। 27 जून 2026 को फर्जी आवंटन निरस्त करने का आदेश दिया गया था। 20 दिन की सुनवाई के बाद 24 जुलाई को कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। करीब 3 महीने बाद संभल प्रशासन के पक्ष में फैसला आया है। सोमवार रात 10:30 बजे नगर पालिका के अधिवक्ता आशुतोष कुमार संड ने बताया कि यह पालिका की बड़ी जीत है। फर्जी पट्टों के आधार पर कब्जा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई तेज होगी। मामला संभल तहसील के रायसत्ती थाना क्षेत्र के गांव तख्त गोसाईं में मुरादाबाद रोड स्थित पांच गाटा संख्या 206, 207, 238, 242/378 और 279 की जमीन से जुड़ा है। डीएम अंकित खंडेलवाल और तत्कालीन एसपी कृष्ण विश्नोई ने 28 जून को जमीन का निरीक्षण किया था। 29 जून को लेखपाल स्पर्श गुप्ता की शिकायत पर संभल कोतवाली में 31 नामजद और अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। एक जुलाई को सीओ कुलदीप कुमार ने लेखपाल के साथ जमीन का नक्शा तैयार कर संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए। जांच में सामने आया फर्जी पट्टे का मामला लेखपाल की जांच में सामने आया कि साल 2008 में उपसंचालक चकबंदी ने फर्जी पट्टे के आधार पर जमीन का नामांतरण सईदुल रहमान के नाम कर दिया था। बाद में साल 2014 से 2019 के बीच जमीन कई लोगों को बैनामा कर दी गई। नगर पालिका के तत्कालीन अधिशासी अधिकारी राजकुमार गुप्ता को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेजा था। बाद में उन्हें इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिल गई। पालिका के सेवानिवृत्त मानचित्रकार शहाबुद्दीन और पैरोकार माजिद खान समेत अन्य आरोपी अभी फरार हैं। हाईकोर्ट के फैसले के मुख्य बिंदु जमीन का विवरण: खाता संख्या 219 और 220 के गाटा संख्या 206, 207, 238, 279 और 242/378, कुल रकबा 2.490 हेक्टेयर, मौजा तख्त गोसाईं। 11 अगस्त 1954 के गजट के अनुसार जमीन सिटी बोर्ड संभल (अब नगर पालिका परिषद संभल) के प्रबंधन में थी। फर्जी पट्टे का दावा: सईदुल रहमान ने दावा किया था कि सिटी बोर्ड के चेयरमैन ने 12 जुलाई 1967 को पट्टा दिया था। इसी आधार पर 15 फरवरी 2008 को उसे भूमिधर घोषित किया गया। पालिका की जांच: 20 दिसंबर 2023 की आख्या में बताया गया कि पालिका के पास 1967 के पट्टे का कोई रिकॉर्ड नहीं है। यह पट्टा नहीं, बल्कि प्रस्ताव मात्र था और मिनट बुक में भी दर्ज नहीं था। सईदुल रहमान ने 28 जनवरी 2002 के बयान में कहा था कि असली पट्टा खो गया है। कोर्ट की टिप्पणी: हाईकोर्ट ने कहा कि चेयरमैन को पट्टा देने का अधिकार नहीं था। यूपी म्युनिसिपैलिटी एक्ट, 1916 की धारा 124 के तहत शासन की अनुमति के बिना संपत्ति हस्तांतरित नहीं की जा सकती। कोर्ट ने पट्टे को साजिश के तहत तैयार जाली और फर्जी दस्तावेज माना। सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला: कोर्ट ने S.P. Chengalvaraya Naidu बनाम Jagannath और A.V. Papayya Sastry के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि धोखाधड़ी से प्राप्त आदेश कानून की नजर में शून्य होता है। ग्रामसभा की जमीन पर फैसला: ग्रामसभा तख्त गोसाईं की तीन जून 2026 की बहाली अर्जी को सही माना गया। धोखाधड़ी के कारण 18 साल की देरी माफ की गई और याचिकाकर्ताओं को असली क्रेता नहीं माना गया। हाईकोर्ट के फैसले के अनुसार, जमीन नवीन परती (ग्रामसभा) के रूप में ही दर्ज रहेगी। इस फैसले से प्रशासन के लिए अवैध निर्माणों पर बेदखली की कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है। याचिका दायर करने वालों में आलम वारसी, आजम खान, मुजाहिद, शाकिर अली, मौ. रफीक, मौ. कासिम और शाकिर सबूर शामिल हैं। ये सभी संभल के अलग-अलग मोहल्लों के निवासी हैं।
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