तृणमूल में बगावत से सियासी भूचाल

तृणमूल कांग्रेस में आंतरिक कलह अब कोलकाता से निकलकर दिल्ली तक पहुंच गई है। पार्टी की वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने दावा किया है कि लगभग 20 सांसदों ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का समर्थन करने का फैसला किया है और इस संबंध में लोकसभा अध्यक्ष को पत्र भी भेजा गया है। घटनाक्रम ने पश्चिम बंगाल की राजनीति के साथ राष्ट्रीय राजनीति में भी हलचल बढ़ा दी है।

तृणमूल में बगावत से सियासी भूचाल

दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 9 जून 2026

तृणमूल कांग्रेस में बढ़ा अंदरूनी संकट

तृणमूल कांग्रेस में जारी राजनीतिक उथल पुथल अब पश्चिम बंगाल से निकलकर राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच गई है। कोलकाता में विधायकों के बीच शुरू हुई बगावत अब सांसदों तक फैलती दिखाई दे रही है। पार्टी के भीतर बढ़ती असहमति ने मुख्यमंत्री और पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। सूत्रों के अनुसार सोमवार को तृणमूल कांग्रेस के 14 लोकसभा सांसदों ने भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता भूपेंद्र यादव के आवास पर पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद राजनीतिक गलियारों में नए समीकरणों की चर्चा तेज हो गई है।

बीस सांसदों के एनडीए समर्थन का दावा

पार्टी की वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने दावा किया है कि तृणमूल कांग्रेस के लगभग 20 सांसदों ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का समर्थन करने का फैसला किया है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र भी भेजा जा चुका है। काकोली घोष दस्तीदार के अनुसार सांसदों के समूह ने केंद्र में सत्तारूढ़ गठबंधन के साथ जुड़ने की इच्छा जताई है और इसे जनता के जनादेश के अनुरूप बताया है। वर्तमान में तृणमूल कांग्रेस के पास लोकसभा में 28 और राज्यसभा में 12 सांसद हैं। नियमों के अनुसार लोकसभा में नया समूह बनाने के लिए कम से कम 12 सांसदों का समर्थन आवश्यक होता है।

अभिषेक बनर्जी की जगह काकोली घोष को नेता बनाने की मांग

जानकारी के मुताबिक बागी सांसद लोकसभा में काकोली घोष दस्तीदार को अपना नेता बनाना चाहते हैं। वर्तमान में अभिषेक बनर्जी लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के नेता हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सांसदों ने वही रणनीति अपनाई है जो पहले पश्चिम बंगाल विधानसभा में देखने को मिली थी। विधानसभा में शोभनदेव चट्टोपाध्याय को नेता प्रतिपक्ष बनाए जाने के बाद पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ा था। इसके बाद लगभग 60 विधायकों के समूह ने ऋतब्रत बनर्जी को अपना नेता घोषित कर दिया था। विधानसभा अध्यक्ष ने उस समूह को विधानसभा में असली तृणमूल कांग्रेस मानते हुए ऋतब्रत बनर्जी को मान्यता प्रदान कर दी थी। अब दिल्ली में भी सांसद उसी मॉडल पर आगे बढ़ते दिखाई दे रहे हैं।

काकोली घोष ने फैसले को बताया जनादेश का सम्मान

काकोली घोष दस्तीदार ने कहा कि वह अभी भी लोकसभा में पार्टी की मुख्य सचेतक हैं और साथी सांसदों के साथ व्यापक चर्चा के बाद यह निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि जनता ने जो फैसला दिया है उसे स्वीकार करना चाहिए और भविष्य की राजनीतिक दिशा राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के साथ होनी चाहिए। उनके अनुसार पार्टी नेतृत्व द्वारा किसी अन्य व्यक्ति को पद पर नियुक्त करने की घोषणा से संवैधानिक और संसदीय स्थिति तुरंत नहीं बदल जाती। उन्होंने कहा कि सांसदों का समूह औपचारिक रूप से एनडीए का हिस्सा बनना चाहता है और इस बारे में लोकसभा अध्यक्ष को सूचित किया जा चुका है।

इस्तीफों और नाराजगी से बढ़ी परेशानी

हाल के दिनों में तृणमूल कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी और इस्तीफों ने पार्टी नेतृत्व को चिंता में डाल दिया है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह घटनाक्रम पार्टी के भीतर गहराते असंतोष का संकेत है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि सांसदों का यह दावा सही साबित होता है तो तृणमूल कांग्रेस को संसद में बड़ा राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है और राष्ट्रीय राजनीति में उसकी स्थिति प्रभावित हो सकती है।

महुआ मोइत्रा ने बागियों पर बोला हमला

तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने बागी सांसदों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि सभी सांसद तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीतकर संसद पहुंचे हैं और उन्हें जनादेश पार्टी के नाम पर मिला था। महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया पर लिखा कि जो नेता व्यक्तिगत स्वार्थ के कारण पार्टी छोड़ना चाहते हैं उन्हें पहले अपनी सीटों से इस्तीफा देना चाहिए और फिर भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़कर अपनी लोकप्रियता साबित करनी चाहिए। उन्होंने बहरामपुर से सांसद युसुफ पठान का नाम लेते हुए भी सवाल उठाए और कहा कि यदि वे वास्तव में पार्टी छोड़ना चाहते हैं तो उन्हें खुलकर जनता के सामने अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए।

युसुफ पठान को लेकर बढ़ी अटकलें

महुआ मोइत्रा की टिप्पणियों के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि बागी सांसदों के समूह में युसुफ पठान भी शामिल हो सकते हैं। हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। महुआ ने आरोप लगाया कि कुछ सांसद केवल ममता बनर्जी की लोकप्रियता के सहारे चुनाव जीतते रहे हैं और विपक्ष में बैठने का साहस नहीं रखते। उनके बयान ने पार्टी के भीतर जारी संघर्ष को और अधिक सार्वजनिक कर दिया है।

बंगाल से दिल्ली तक फैली बगावत

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहा यह संकट केवल संगठनात्मक विवाद नहीं बल्कि नेतृत्व और भविष्य की राजनीतिक दिशा को लेकर बड़ा संघर्ष बन चुका है। यदि सांसदों का समूह औपचारिक रूप से अलग रास्ता चुनता है तो इसका असर पश्चिम बंगाल की राजनीति के साथ राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी एकता पर भी पड़ सकता है। आने वाले दिनों में लोकसभा अध्यक्ष के पास भेजे गए पत्र और सांसदों के अगले कदम पर पूरे देश की नजर बनी रहेगी।