राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण में बड़ा खुलासा
राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण की जांच कर रहे विशेष जांच दल ने अपनी अंतरिम रिपोर्ट शासन को सौंप दी है। जांच दल के सदस्य विजय विश्वास पंत के अनुसार 10 से 15 दिनों के भीतर अंतिम रिपोर्ट भी प्रस्तुत कर दी जाएगी। मामले में दान प्रबंधन और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े कई पहलुओं की जांच जारी है।
दि राइजिंग न्यूज़ | अयोध्या | 24 जून 2026
अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे के कथित गबन और वित्तीय अनियमितताओं के मामले की जांच कर रहे विशेष जांच दल ने अपनी अंतरिम रिपोर्ट उत्तर प्रदेश शासन को सौंप दी है। जांच दल के सदस्य तथा लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत ने जानकारी दी कि 23 जून को गृह विभाग को प्रारंभिक जांच प्रतिवेदन सौंप दिया गया है। इस मामले ने प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है।
10 से 15 दिनों में सौंपी जाएगी अंतिम जांच रिपोर्ट
विशेष जांच दल के सदस्य विजय विश्वास पंत ने बताया कि अभी जांच पूरी नहीं हुई है और अंतरिम रिपोर्ट केवल प्रारंभिक तथ्यों पर आधारित है। उन्होंने कहा कि अगले 10 से 15 दिनों के भीतर विस्तृत और अंतिम जांच प्रतिवेदन शासन को सौंप दिया जाएगा। जांच दल लगातार साक्ष्य जुटाने और संबंधित पक्षों से जानकारी लेने का काम कर रहा है। आवश्यकता पड़ने पर टीम दोबारा अयोध्या पहुंचकर जांच प्रक्रिया को आगे बढ़ा सकती है।
गोपनीय रखी गई है जांच की पूरी प्रक्रिया
जांच दल के अधिकारियों का कहना है कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए रिपोर्ट और जांच से जुड़ी जानकारियां गोपनीय रखी गई हैं। अधिकारियों के अनुसार अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी क्योंकि कई पहलुओं की जांच शेष है। जांच दल सभी दस्तावेजों, वित्तीय अभिलेखों और संबंधित व्यक्तियों के बयानों का गहन परीक्षण कर रहा है। अंतिम प्रतिवेदन के आधार पर ही आगे की कार्रवाई तय होगी।
चढ़ावा प्रबंधन पर उठे गंभीर सवाल
मामले की जांच के दौरान मंदिर में प्राप्त होने वाले चढ़ावे और दान के प्रबंधन को लेकर कई सवाल खड़े हुए हैं। आरोप है कि दान की राशि और अन्य चढ़ावे के रखरखाव में पारदर्शिता का अभाव रहा। इसी वजह से शासन स्तर पर मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच दल का गठन किया गया था। अब सभी की निगाहें अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं, जिससे पूरे मामले की तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
विपक्ष ने सरकार और जांच प्रक्रिया पर साधा निशाना
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मामले को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि अभी तक प्राथमिकी दर्ज न होने से जांच की दिशा और प्रभावशीलता पर प्रश्न खड़े होते हैं। उन्होंने जांच प्रक्रिया को लेकर तीखी टिप्पणी करते हुए मामले में पारदर्शिता की मांग की है। विपक्ष का कहना है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों को कानून के दायरे में लाया जाना चाहिए।
लेखा परीक्षण में भी सामने आई थीं अनियमितताएं
सूत्रों के अनुसार पूर्व में हुए लेखा परीक्षण के दौरान भी दान प्रबंधन व्यवस्था में कई खामियां सामने आई थीं। रिपोर्ट में कहा गया था कि दान और चढ़ावे का व्यवस्थित अभिलेखीकरण नहीं होने से निगरानी और जवाबदेही प्रभावित हो रही थी। लेखा परीक्षण करने वाली संस्था ने वित्तीय प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी बनाने तथा प्रत्येक लेनदेन के लिए स्पष्ट कार्यप्रणाली तैयार करने की सिफारिश की थी। इन तथ्यों को भी जांच दल अपनी पड़ताल का हिस्सा बना रहा है।
अंतिम रिपोर्ट पर टिकी प्रदेश की नजरें
राम मंदिर से जुड़ा यह मामला धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील माना जा रहा है। ऐसे में विशेष जांच दल की अंतिम रिपोर्ट को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। माना जा रहा है कि रिपोर्ट आने के बाद जिम्मेदार व्यक्तियों की जवाबदेही तय हो सकती है और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की दिशा स्पष्ट होगी। फिलहाल जांच एजेंसियां सभी तथ्यों को जोड़कर अंतिम निष्कर्ष तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं।