यूथ-ओलिंपिक में मेडल जीतने वाली तन्वी की कहानी:उनके लिए पिता ने 6 लाख की नौकरी छोड़ी, 3 चाइनीज कोचों से ट्रेनिंग ली
15 साल की बैडमिंटन खिलाड़ी तन्वी पात्री ने यूथ ओलिंपिक में मेडल पक्का कर लिया है। वे इस टूर्नामेंट के महिला सिंगल्स फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बनीं। दैनिक भास्कर ने तन्वी के पिता रबिनारायण से बातचीत की। उन्होंने बताया कि बेटी को बैडमिंटन में आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने चीन में सॉफ्टवेयर कंपनी की नौकरी छोड़ दी, जबकि महीने की सैलरी 5-6 लाख रुपए थी। इतना ही नहीं उन्होंने चीन के तीन कोचों से तन्वी को ट्रेनिंग दिलवाई। बुधवार को सेनेगल के डकार में खेले गए सेमीफाइनल में तन्वी ने जापान की दूसरी सीड युजुनो वातानाबे को 21-14, 11-21, 21-19 से हराया। अब गोल्ड मेडल के लिए उनका मुकाबला चीन की यी शिन झांग से होगा। 7 साल की उम्र में बैडमिंटन खेलना शुरू किया ओडिशा के बालासोर में जन्मीं तन्वी का बैडमिंटन से जुड़ाव चीन में हुआ। उस समय उनके पिता वहां सॉफ्टवेयर प्रोफेशनल के तौर पर काम करते थे। रबिनारायण को भी बैडमिंटन खेलने का शौक था। वे कॉलेज के दिनों से खेल रहे थे। 1990 के दशक में भारत में इस खेल के लिए बेहतर सुविधाएं नहीं थीं। इसलिए वे अपना शौक करियर में नहीं बदल सके। चीन में नौकरी के दौरान वे रेगुलर बैडमिंटन खेलने जाते थे। करीब 7 साल की तन्वी भी उनके साथ कोर्ट पर जाने लगीं। बेटी की दिलचस्पी देखकर उन्होंने उसे ट्रेनिंग दिलानी शुरू की। चीन के तीन कोचों ने तराशा खेल तन्वी ने चीन में झांग लेई, श्यू शू और वू यू जैसे कोचों से ट्रेनिंग ली। उनके पिता के मुताबिक, इन कोचों का तन्वी का खेल निखारने में अहम योगदान रहा। इनमें से एक कोच श्यू शू का पिछले साल निधन हो गया था। रबिनारायण के मुताबिक, चीन में बैडमिंटन के लिए बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर है। वहां सरकार ने खेलने के लिए अच्छी सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं। खिलाड़ी कम खर्च में लंबे समय तक कोर्ट पर अभ्यास कर सकते हैं। तन्वी को भी इसका फायदा मिला। शुरुआती टूर्नामेंट में तन्वी को जीत और मेडल मिलने लगे। इससे खेल के प्रति उनकी दिलचस्पी बढ़ती गई। पिता ने कहा- 'बच्चों में खेल के प्रति रुचि छोटी उम्र से ही विकसित करनी चाहिए। केवल माता-पिता के प्रेरित करने से बच्चा आगे नहीं बढ़ सकता। उसकी खुद की दिलचस्पी भी जरूरी है।' 2020 में बेटी को लेकर भारत लौटे 2019 में तन्वी ने चीन में कई अच्छे टूर्नामेंट जीते। इससे रबिनारायण को लगा कि बेटी में आगे बढ़ने की क्षमता है। हालांकि, कुछ समय बाद उन्हें ट्रेनिंग में कमी महसूस होने लगी। उनके सामने दो विकल्प थे। पहला, चीन में नौकरी जारी रखना। दूसरा, बेटी के खेल को प्राथमिकता देना। उन्होंने दूसरा विकल्प चुना। 2020 में कोविड के दौरान वे परिवार के साथ भारत लौट आए। हालांकि, बाद में उन्होंने भारत से ही चीन की कंपनी के लिए काम करना जारी रखा। कोविड में सीनियर खिलाड़ियों के साथ अभ्यास का मौका पिता ने खुद संभाली ट्रेनिंग की जिम्मेदारी भारत लौटने के बाद रबिनारायण ने बेटी की ट्रेनिंग में खुद भी समय देना शुरू किया। उन्होंने प्राइवेट कोर्ट लेकर तन्वी के साथ अभ्यास किया। चीन में कोच से मिली तकनीकी ट्रेनिंग के आधार पर वे बेटी को खेल की बारीकियां समझाने लगे। उनका मानना है कि माता-पिता को बच्चे के खेल की बुनियादी समझ होनी चाहिए। फिलहाल तन्वी बेंगलुरु के सेंटर फॉर बैडमिंटन एक्सीलेंस (CBE) में अभ्यास करती हैं। पहले यह प्रकाश पादुकोण बैडमिंटन अकादमी के नाम से जाना जाता था। यहां उन्हें विमल कुमार, सागर और भास्कर जैसे कोच ट्रेनिंग दे रहे हैं। वीजा रिजेक्ट होने से पिछले साल अंडर-17 एशियन चैंपियनशिप नहीं खेल पाईं पिछले साल तन्वी का अंडर-17 एशियन चैंपियनशिप के लिए भारतीय टीम में चयन हुआ था। टूर्नामेंट चीन में होना था, लेकिन उनका वीजा रिजेक्ट हो गया। पिता रबिनारायण के मुताबिक, टीम के रवाना होने से ठीक पहले इसकी जानकारी मिली। वीजा मिलने तक टूर्नामेंट शुरू हो चुका था। तन्वी को बुधवार को वीजा मिला, जबकि मुकाबले मंगलवार से शुरू हो गए थे। इस घटना के बाद रबिनारायण ने चीन में तन्वी के पुराने कोचों से संपर्क किया और उनसे इनविटेशन लेटर मंगवाया। इसका मकसद आगे चीन जाने के लिए वीजा प्रक्रिया समय रहते पूरी करना था। सालाना 30-40 लाख रुपए तक का खर्च पिता बोले- यूथ ओलिंपिक सिर्फ एक पड़ाव ------------------------------------------------------ तन्वी से जुड़ी स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़ें… यूथ ओलिंपिक- 15 साल की तन्वी पात्री फाइनल में पहुंची:गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय बन सकती हैं; चीन की खिलाड़ी से मुकाबला 15 साल की भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी तन्वी पात्री यूथ ओलिंपिक गेम्स के फाइनल में पहुंच गई हैं। वे इस टूर्नामेंट में महिला सिंगल्स फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बन गईं। इसके साथ ही इस इवेंट में भारत का पहला महिला सिंगल्स मेडल भी पक्का हो गया है। पूरी खबर
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