13,150 वोटर्स की धांधली पकड़ने वाला कांग्रेसी कौन:पहला क्लू साइबर कैफे से मिला; 3.48 लाख रिकॉर्ड खंगालने पड़े

Oct 22, 2026 - 05:37
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13,150 वोटर्स की धांधली पकड़ने वाला कांग्रेसी कौन:पहला क्लू साइबर कैफे से मिला; 3.48 लाख रिकॉर्ड खंगालने पड़े
पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में 13,150 वोटरों के नाम बदलने का आरोप लगाकर कांग्रेस ने चुनाव आयोग पर सवाल उठाए हैं। पार्टी का दावा है कि 10 अप्रैल, 2026 को प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में जिन वोटरों के नाम सही थे, जुलाई से 15 अक्टूबर के बीच उनमें बदलाव किए गए। आरोप है कि वोटर का EPIC नंबर, उम्र और लिंग वही है, लेकिन नाम और पिता का नाम बदल गया। कांग्रेस के मुताबिक, प्रभावित सभी 13,150 मतदाता मुस्लिम हैं। इस कथित गड़बड़ी का खुलासा कैसे हुआ? इसकी शुरुआत 13 अक्टूबर को एक साइबर कैफे में हुई। इसके बाद 55 लोगों की टीम ने 96 घंटे तक लगातार काम किया। विधानसभा के सभी 419 बूथों पर दर्ज करीब 3.48 लाख वोटरों के EPIC नंबर जांचे। कांग्रेस के निवर्तमान महासचिव कुमुद गंगवार ने दैनिक भास्कर को दिए इंटरव्यू में जांच की पूरी कहानी बताई। साइबर कैफे में एक वोटर का कार्ड निकाला, तो खुला मामला कुमुद गंगवार के मुताबिक, 13 अक्टूबर को पीलीभीत के एक साइबर कैफे में एक व्यक्ति अपना EPIC नंबर बताकर वोटर आईडी कार्ड निकलवाने पहुंचा था। वहां कांग्रेस से जुड़े वकील रेहान मौजूद थे। व्यक्ति ने कई बार अपना EPIC नंबर बताया। लेकिन, कार्ड पर उसका और उसके पिता का नाम गलत दिखाई दिया। गंगवार ने बताया कि 10 अप्रैल को प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में उसी EPIC नंबर पर उस व्यक्ति का नाम सही दर्ज था। इस गड़बड़ी को देखकर रेहान को संदेह हुआ। उन्होंने अपने परिवार और दूसरे जानने वालों के EPIC नंबरों की जांच की। वहां भी इसी तरह की गड़बड़ियां सामने आईं। इसके बाद रेहान ने गंगवार से संपर्क किया। गंगवार ने उन्हें और नंबर जांचने के लिए कहा। उनके अनुसार, उसी रात करीब 60 लोगों के नाम में इस तरह का अंतर मिला। इसके बाद बड़े स्तर पर EPIC नंबरों के सत्यापन का फैसला लिया गया। 55 लोगों ने 419 बूथों के 3.48 लाख EPIC नंबर खंगाले गंगवार के मुताबिक, जांच के लिए 55 लोगों की टीम बनाई गई। टीम ने 96 घंटे तक लगातार काम करते हुए पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र के सभी 419 बूथों पर दर्ज 3,48,937 वोटरों के EPIC नंबर जांचे। उनका दावा है कि इस जांच में कुल 16,554 मतदाताओं से जुड़ी तीन तरह की विसंगतियां सामने आईं। इनमें सबसे बड़ा मामला 13,150 वोटरों का था, जिनके EPIC नंबर और मतदाता सूची में क्रम संख्या वही होने के बावजूद नाम और पिता का नाम अलग दिखाई दे रहा था। दूसरे और तीसरे मामलों में 804 वोटरों के नाम सूची से हटाए जाने और करीब 2,600 नए नाम जोड़े जाने की बात सामने आई। जबकि 10 अप्रैल के बाद से फार्म-6, 7 व 8 भरने की प्रक्रिया बंद है। 10 अप्रैल की सूची के बाद कब और कैसे बदले नाम? गंगवार ने बताया कि 10 अप्रैल को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद संबंधित वोटरों को भरोसा था कि उनके नाम और अन्य विवरण सही दर्ज हैं। बाद में जानबूझकर चुपके से ऑनलाइन उनके रिकॉर्ड में बदलाव किया गया। EPIC नंबर डालने पर ये बदलाव साफ दिख रहा है। गंगवार ने दावा किया कि कुछ रिकॉर्ड में 2 सितंबर, 2026 को रात 9:26 बजे बदलाव दर्ज होने का विवरण मिला। सवाल उठाया कि संबंधित मतदाताओं की जानकारी और सहमति के बिना ये संशोधन कैसे हुए? उनके अनुसार, प्रभावित वोटरों में 600 से ज्यादा ने शपथपत्र देकर कहा है कि उन्होंने नाम या अन्य विवरण बदलवाने के लिए फॉर्म-8 नहीं भरा। इसी तरह जिन लोगों के नाम हटाए गए, उन्होंने फॉर्म-7 के जरिए नाम हटाने का अनुरोध करने से इनकार किया है। मोबाइल नंबर भी बदलने का दावा, OTP पर उठाए सवाल कुमुद गंगवार ने दावा किया कि कुछ मामलों में EPIC नंबर से जुड़ा मोबाइल नंबर भी बदल गया है। उनके मुताबिक, EPIC नंबर डालने पर जो ब्योरा सामने आ रहा है, उसमें मोबाइल नंबर के अंतिम चार अंक बदले हुए मिले हैं। गंगवार ने सवाल उठाया कि अगर किसी मतदाता के विवरण में बदलाव के लिए मोबाइल पर OTP की जरूरत होती है, तो प्रभावित लोगों के फोन पर कोई संदेश क्यों नहीं आया। उन्होंने यह भी कहा कि अधिकारियों के पास उपलब्ध प्रशासनिक लॉगिन से रिकॉर्ड में बदलाव संभव है, लेकिन उन्होंने ऐसा कैसे किया? इसकी जांच होनी चाहिए। हालांकि, ऑनलाइन रिकॉर्ड में बदलाव के लिए किस खाते, लॉगिन या प्रक्रिया का इस्तेमाल किया गया, इसकी पुष्टि उपलब्ध विवरण से नहीं होती। इस बारे में चुनाव आयोग का आधिकारिक जवाब नहीं आया है। 804 नाम हटे, 2,600 जुड़े, कांग्रेस ने चुनावी लाभ का आरोप लगाया गंगवार ने आरोप लगाया कि जिन 804 लोगों के नाम हटाए गए, वो एक खास समुदाय के हैं और वे भाजपा को वोट नहीं देते हैं। जबकि जो करीब 2,600 नाम जोड़े गए, वे भाजपा समर्थक हैं। उनके नाम उन्हीं बूथों पर जोड़े गए हैं, जहां भाजपा समर्थक मतदाता अधिक संख्या में रहते हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि कुछ बूथों पर नए नाम जोड़ने की संख्या 100 से अधिक है। उनके मुताबिक, बूथ नंबर 57 पर अधिकतम 88 नए नाम जोड़े जाने का मामला सामने आया। हटाए गए नामों की संख्या कई बूथों पर औसतन करीब दो थी। 500 नए नामों की जांच की, गांव में नहीं मिले लोग गंगवार ने दावा किया कि करीब 2,600 जोड़े गए नामों में से 500 की जांच की गई, लेकिन संबंधित लोग बताए गए गांवों में नहीं मिले। वहीं, हटाए गए 804 नामों में से करीब 25% लोगों से संपर्क करने का दावा भी उन्होंने किया। उनके अनुसार, जिन लोगों के नाम हटाए गए, वे 10 अप्रैल की अंतिम सूची में दर्ज थे। उन्होंने नाम हटाने के लिए आवेदन भी नहीं किया था। गंगवार ने कहा कि यदि किसी अन्य व्यक्ति की आपत्ति पर नाम हटाया जाता है, तो संबंधित मतदाता को अपनी बात रखने का अवसर दिए जाने की प्रक्रिया का पालन होना चाहिए। मंत्री संजय गंगवार पर भी सवाल, चुनाव आयोग को दी चुनौती कुमुद गंगवार ने पीलीभीत के विधायक और गन्ना राज्य मंत्री संजय गंगवार का नाम लेते हुए कहा कि 2022 के विधानसभा चुनाव में मंत्री 6,930 वोटों के अंतर से जीते थे। पीलीभीत और आसपास क्षेत्रों में रहने वाले किसानों के करीब 485 करोड़ रुपए के गन्ना भुगतान बकाया होने के कारण बड़ी नाराजगी है। उन्होंने आशंका जताई कि आगामी चुनाव को देखते हुए कहीं उनके इशारे पर तो मतदाता सूची में बदलाव किए गए हैं। अगर मंत्री की इसमें कोई भूमिका नहीं है, तो उन्हें सामने आकर संबंधित अधिकारियों से इस तरह की धांधली पर जवाब मांगना चाहिए। गंगवार ने चुनाव आयोग पर भाजपा के पक्ष में काम करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने आयोग को चुनौती दी कि वह उनके खिलाफ मानहानि या गलत सूचना फैलाने का मामला दर्ज करे। अन्यथा संबंधित 13,150 मतदाताओं के नाम बदलने के लिए किए गए आवेदनों का रिकॉर्ड (फार्म-8) सामने रखे। FIR से लेकर हाईकोर्ट तक जाने की तैयारी गंगवार ने कहा कि कांग्रेस इस मामले में कानूनी लड़ाई लड़ेगी। उन्होंने तत्कालीन एसडीएम और जिलाधिकारी समेत संबंधित अधिकारियों के खिलाफ शिकायत करने की बात कही। उन्होंने कहा कि अगर पुलिस कार्रवाई नहीं करती, तो वो इस मामले को सत्र न्यायालय और हाईकोर्ट तक ले जाएंगे। उन्होंने यह भी बताया कि इस तरह की विसंगतियों की जांच के लिए कांग्रेस का संगठनात्मक स्तर पर अभियान बढ़ाया जाएगा। उनके मुताबिक, प्रदेश नेतृत्व को मामले की जानकारी दी गई है। 20 और विधानसभा क्षेत्रों की मतदाता सूचियों की भी जांच की जा रही है। इन विधानसभाओं में भाजपा 2022 के चुनाव में करीबी अंतर से ही जीत पाई थी। पीलीभीत के 2 कर्मचारियों को हटाया गया 21 अक्टूबर की देर रात यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) नवदीप रिणवा ने बताया कि पीलीभीत विधानसभा की मतदाता सूची में गड़बड़ी मिली है। विधानसभा क्षेत्र के निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी और वीआरसी ऑपरेटर को मतदाता सूची के काम से हटा दिया गया है। दोनों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। दोनों पर मुकदमा भी होगा। प्रदेश के सभी जिलों में भी इसी तरह की गड़बड़ियों की जांच कर दो दिन में रिपोर्ट मांगी गई है। -------------------------- यह खबर भी पढ़ें- कांग्रेस का दावा-पीलीभीत में 13,150 मुस्लिम वोटरों के नाम बदले, यूसुफ को असलम किया; सॉफ्टवेयर का एक्सेस DM को नहीं मिला कांग्रेस ने चुनाव आयोग पर बड़े पैमाने पर मुसलमानों के वोट काटने के आरोप लगाए हैं। कांग्रेस ने दावा किया कि अकेले पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र में 13,150 मुस्लिम वोटर के एपिक (EPIC) नंबर एक जैसे हैं। लेकिन, उनके नाम और पिता के नाम बदल दिए गए हैं। मतदाता का असली नाम हटाकर दूसरा नाम दर्ज कर दिया गया। उदाहरण के तौर पर 'मोहम्मद यूसुफ' की जगह 'असलम' नाम दर्ज कर दिया गया। पढ़ें पूरी रिपोर्ट…

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