रावण जलने के बाद लकड़ी-राख लेने उमड़े सैकड़ों लोग:गोरखपुर में लोग बोले- घर में रखने से आती हैं सुख-समृति, नहीं लगती नजर
गोरखपुर के बर्डघाट रामलीला मैदान में मंगलवार रात रावण दहन के बाद एक अनोखा नजारा देखने को मिला। जैसे ही श्रीराम ने रावण का वध किया और प्रतीकात्मक पुतले का दहन हुआ, वहां मौजूद सैकड़ों लोग जली हुई लकड़ियां और राख लेने के लिए टूट पड़े। कोई बांस की पतली लकड़ी लेकर घर जाता दिखा तो कोई पुतले की राख समेटता नजर आया। लोगों के बीच इसे घर ले जाने की ऐसी मान्यता है, जो कई सालों से चली आ रही है। मान्यता है कि रावण दहन के बाद बची लकड़ी और राख को घर में रखने से बुरी नजर से बचाव होता है और परिवार में सुख-समृद्धि आती है। दैनिक भास्कर के रिपोर्टर ने जब रामलीला मैदान में मौजूद लोगों से इस परंपरा के बारे में बात की, तो अधिकतर लोग इसके पीछे की वजह स्पष्ट नहीं बता सके। उनका कहना था कि वे बचपन से ही इस परंपरा को देखते आ रहे हैं। परिवार के बड़े-बुजुर्ग भी रावण दहन के बाद लकड़ी और राख घर ले जाते थे। इसी वजह से वे भी हर साल इस परंपरा को निभाते हैं। देखिए 2 तस्वीरें बुजुर्गों से सुनी मान्यता, घर में रखने से बुरी नजर नहीं लगती स्थानीय निवासी सूरज वर्मा ने बताया कि मेरे मोहल्ले के बुजुर्गों के कहते हैं कि रावण बहुत विद्वान था। श्रीराम के हाथों वध के बाद उसकी बुराइयों का अंत हो गया था। इसी मान्यता के आधार पर लोग रावण दहन के बाद बचे अवशेष को घर ले जाते हैं। इसे घर में टांगने या सुरक्षित रखने से बुरी नजर नहीं लगती और नकारात्मकता दूर रहती है। सूरज ने ये भी बताया कि यह परंपरा किसी एक परिवार तक सीमित नहीं है। इलाके के कई लोग वर्षों से इसका पालन करते आ रहे हैं। हालांकि, हर व्यक्ति को इस मान्यता के पीछे की पूरी कहानी पता हो, ऐसा नहीं है। 'परिवार की समृद्धि और बुद्धि के विकास के लिए ले जा रहे लकड़ी' रावण के जले हुए पुतले की लकड़ी लेकर जा रहे अनुज सोनकर ने बताया कि मैं खुद इस परंपरा का पालन करता हूं। उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म में रावण को महान विद्वान और पराक्रमी माना जाता है। उनके अनुसार, रावण जैसा विद्वान और पराक्रमी व्यक्ति आज तक नहीं हुआ। यही वजह है कि उसके दहन के बाद बची लकड़ी को घर ले जाने की मान्यता वर्षों से चली आ रही है। अनुज ने बताया कि लोग इस लकड़ी को घर में टांगकर या सुरक्षित रखकर शुभ मानते हैं। मान्यता है कि इससे परिवार की समृद्धि बढ़ती है और बुद्धि का विकास होता है। इसी विश्वास के चलते हर साल रावण दहन के बाद लोग पुतले के अवशेष लेने के लिए जुटते हैं। लोक मान्यता: राख और लकड़ी घर लाना शुभ दशहरे पर रावण दहन के बाद उसकी जली हुई लकड़ी और राख घर लाने को लेकर अलग-अलग लोक मान्यताएं प्रचलित हैं। लोगों का विश्वास है कि इन अवशेषों को घर में रखने से नकारात्मक ऊर्जा दूर रहती है, बुरी नजर से बचाव होता है और परिवार में सुख-समृद्धि आती है। कुछ लोग इसे धन में वृद्धि और घर में खुशहाली से भी जोड़कर देखते हैं। हालांकि, ये मान्यताएं लोकविश्वास और परंपराओं पर आधारित हैं। इनके प्रभाव का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इसके बावजूद लोगों की आस्था के कारण यह परंपरा आज भी जारी है। 162 साल से लग रहा बर्डघाट में मेला श्री श्री रामलीला समिति के अध्यक्ष गणेश वर्मा ने बताया कि बर्डघाट रामलीला मैदान में पिछले 162 साल से मेला लगता आ रहा है। हर साल रामलीला और रावण दहन देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। इस बार भी मैदान में खान-पान, खिलौने, सौंदर्य प्रसाधन और घरेलू सामान की दुकानें सजी रहीं। मेले में बच्चों की भीड़ खिलौनों की दुकानों पर लगी रही, वहीं महिलाओं ने सौंदर्य प्रसाधन और घरेलू सामान की खरीदारी की। लोगों ने मिठाइयां खरीदीं और भगवान राम को चढ़ाकर प्रसाद के रूप में घर ले गए। रावण दहन के बाद मैदान में उत्सव और उल्लास का माहौल रहा।
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