मेरठ में खादी को यूथ फैशन से जोड़ रहे शोएब:लंदन से पर्सनल स्टाइलिंग का कोर्स करने के बाद शुरू किया स्टार्टअप
खादी एवं ग्रामोद्योग महोत्सव में इस बार खादी को नए अंदाज में पेश करने की कोशिश भी देखने को मिल रही है। यहां युवा उद्यमी शोएब हुसैन अपने ब्रांड के जरिए खादी के कपड़ों को युवाओं तक पहुंचाने में जुटे हैं। उनका उद्देश्य खादी को केवल पारंपरिक पहनावे तक सीमित न रखकर युवाओं के फैशन का हिस्सा बनाना है। इसके लिए वह हैंडलूम फैब्रिक में रंगों और नए डिजाइन का इस्तेमाल कर रहे हैं। उनके डिजाइनर कपड़े सेल्फ हेल्प ग्रुप की महिलाएं तैयार कर रही हैं। शोएब ने बताया कि उन्होंने बीटेक की पढ़ाई करने के साथ लंदन से पर्सनल स्टाइलिंग का कोर्स किया है। इसके बाद उन्होंने अपना स्टार्टअप एस.एच एसेंशियल्स शुरू करने का फैसला लिया। उनका मानना है कि भारत की पारंपरिक कला, कपड़े और डिजाइन की दुनिया भर में पहचान है, लेकिन कई बार भारतीय पारंपरिक डिजाइनों की नकल भी दूसरे देशों में देखने को मिलती है। ऐसे में उन्होंने भारतीय विरासत और खादी को अपने ब्रांड का आधार बनाने का निर्णय लिया। रंगों और नए डिजाइन से खादी को दे रहे नया रूप शोएब के अनुसार, खादी को आमतौर पर पारंपरिक और उम्रदराज लोगों के पहनावे से जोड़कर देखा जाता है। वह इस सोच को बदलना चाहते हैं। इसके लिए खादी के हैंडलूम कपड़े में नए रंगों और डिजाइन का इस्तेमाल कर ऐसे कपड़े तैयार किए जा रहे हैं, जिन्हें युवा भी पसंद कर सकें। उनका प्रयास है कि खादी को स्टाइलिश और आरामदायक पहनावे के रूप में पहचान मिले। फिलहाल पुरुषों के कपड़े, फरवरी में महिलाओं की रेंज शोएब ने बताया कि फिलहाल उनका ब्रांड पुरुषों के कपड़ों पर केंद्रित है। फरवरी में महिलाओं के लिए भी खादी के कपड़े की नई रेंज लाने की तैयारी है। इसमें खादी ब्लेजर, पैंट और कुर्तियां शामिल होंगी। उनका कहना है कि इन कपड़ों को आरामदायक और त्वचा के अनुकूल बनाने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। लैक्मे फैशन वीक में डिजाइनर पीस पेश करने की तैयारी शोएब अपने डिजाइनर कपड़े को लैक्मे फैशन वीक में पेश करने के लिए पिच करने की तैयारी कर रहे हैं। इसके साथ ही उनके उत्पादों को सेल्फ हेल्प ग्रुप की महिलाएं तैयार कर रही हैं। इससे उनके स्टार्टअप के जरिए महिलाओं को काम से जोड़ने का अवसर भी मिल रहा है। शोएब का कहना है कि भारतीय पारंपरिक कपड़ों और शिल्प में काफी संभावनाएं हैं। जरूरत है उन्हें नए डिजाइन और आधुनिक फैशन के साथ पेश करने की, ताकि खादी को देश के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नई पहचान मिल सके।
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