17 साल पुराने हत्या के प्रयास में 3 को सजा:सात-सात साल का कारावास; एक पर 15 हजार और दो पर 10-10 हजार जुर्माना
मऊ के सरायलखंसी थाना क्षेत्र में 17 साल पुराने हत्या के प्रयास के मामले में बुधवार को अदालत ने तीन दोषियों को सात-सात साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश बाकर शमीम रिजवी की अदालत ने यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने एक दोषी पर 15 हजार और दो अन्य पर 10-10 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया। जुर्माना नहीं भरने पर तीनों को छह महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। मकान बनवाने के लिए मिस्त्री की तलाश में निकले थे सरायलखंसी थाना क्षेत्र के चकमेंहदी निवासी बालचंद ने पुलिस को बताया था कि 2 नवंबर 2009 की शाम करीब 7 बजे वह मकान बनवाने के लिए राजमिस्त्री की तलाश में गए थे। भलयां गांव से लौटते समय रमाकांत के खेत के पास चकरोड पर आरोपियों ने उन्हें घेर लिया। पीठ में लगी थी गोली आरोप था कि चकमेंहदी मंगलसराय निवासी रामविलास यादव ने विश्राम यादव और जयराम के ललकारने पर बालचंद पर कट्टे से गोली चलाई। गोली उनकी पीठ में लगी। शोर सुनकर वेद प्रकाश यादव और हरिश्चंद्र मौके पर पहुंचे। दोनों बालचंद को जीप से सरायलखंसी थाने ले गए। बालचंद की शिकायत पर रामविलास यादव और विश्राम यादव, दोनों पुत्र जगन्नाथ, तथा रामदेव के पुत्र जयराम निवासी चकमेंहदी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। जांच के बाद पुलिस ने अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया। आठ गवाहों की गवाही के बाद सुनाया फैसला अभियोजन पक्ष की ओर से एडीजीसी फौजदारी नंदलाल भारती ने पैरवी की। मामले में आठ गवाह पेश किए गए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और अभिलेखों का अवलोकन करने के बाद अदालत ने रामविलास यादव, विश्राम यादव और जयराम को दोषी ठहराया। अदालत ने तीनों को सात-सात साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। रामविलास पर 15 हजार रुपए और विश्राम व जयराम पर 10-10 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया। जुर्माना अदा नहीं करने पर उन्हें छह महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
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