तुर्की का बहिष्कार शुरू: सेब से लेकर संगमरमर तक भारत में उठी आर्थिक जवाब की लहर
दि राइजिंग न्यूज। नई दिल्ली। 14 मई 2025। भारत और पाकिस्तान के बीच जारी तनाव में अब एक नया मोड़ आ गया है। पाकिस्तान के सबसे करीबी सहयोगी तुर्की को अब भारत में चौतरफा विरोध का सामना करना पड़ रहा है। वजह है — पाकिस्तान को तुर्की की खुली सैन्य मदद और भारत विरोधी रुख।
दि राइजिंग न्यूज। नई दिल्ली। 14 मई 2025।
भारत और पाकिस्तान के बीच जारी तनाव में अब एक नया मोड़ आ गया है। पाकिस्तान के सबसे करीबी सहयोगी तुर्की को अब भारत में चौतरफा विरोध का सामना करना पड़ रहा है। वजह है — पाकिस्तान को तुर्की की खुली सैन्य मदद और भारत विरोधी रुख।
ड्रोन हमलों में तुर्की की भूमिका
खुफिया सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान ने भारत पर ड्रोन हमले करने के लिए तुर्की के 350 से अधिक ड्रोन का इस्तेमाल किया। इतना ही नहीं, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तुर्की के सैन्य सलाहकार पाकिस्तान में मौजूद थे। दावा है कि इनमें से दो तुर्की ड्रोन ऑपरेटर भारत के जवाबी हमले में मारे गए, लेकिन पाकिस्तान ने इस बात को दबा लिया। ड्रोन के मलबे की फॉरेंसिक जांच में भी इस बात की पुष्टि हुई है कि भारत में घुसे UAV तुर्की निर्मित सोनगार ड्रोन्स थे — अत्याधुनिक हथियारबंद मानव रहित विमान।
आर्थिक मोर्चे पर भारत का जवाब
भारत अब केवल कूटनीतिक या सैन्य नहीं, बल्कि आर्थिक स्तर पर भी तुर्की को जवाब देने के लिए तैयार है:
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सेब का बहिष्कार: महाराष्ट्र के पुणे और उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जैसे बड़े बाजारों में तुर्की से आने वाले सेब की बिक्री पूरी तरह रोक दी गई है। हर साल करीब 1000-1200 करोड़ रुपये के सेब भारत में आते थे, लेकिन अब व्यापारी इनका आयात बंद कर रहे हैं।
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मार्बल कारोबार बंद: उदयपुर — एशिया का सबसे बड़ा मार्बल मार्केट — तुर्की से संगमरमर का आयात पूरी तरह रोक चुका है। उदयपुर मार्बल प्रोसेसर्स कमेटी ने साफ कहा है कि जब तक तुर्की पाकिस्तान का साथ देगा, उनसे कोई व्यापार नहीं होगा।
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पर्यटन में गिरावट: MakeMyTrip ने रिपोर्ट दी है कि तुर्की और अजरबैजान की बुकिंग में 60% की गिरावट, जबकि कैंसलेशन में 250% की बढ़ोतरी देखी गई है। कंपनी ने इन दोनों देशों के ऑफर्स और प्रचार बंद कर दिए हैं।
भारत ने दिया साथ, तुर्की ने किया विश्वासघात
यह वही तुर्की है, जिसे 2023 में जब विनाशकारी भूकंप ने हिला दिया था, तो भारत सबसे पहले मदद को पहुंचा। NDRF की टीम और मेडिकल सहायता तुर्की की धरती पर सबसे पहले भारत ने भेजी थी। लेकिन बदले में, तुर्की ने अपने सैन्य विमान C-130 हरक्यूलिस से पाकिस्तान को ऑपरेशन सिंदूर से ठीक पहले हथियार और ड्रोन भेजे।
युद्धपोत तक भेजा तुर्की ने
भारत-पाक तनाव के बीच तुर्की ने कराची बंदरगाह पर युद्धपोत भेजा। न सिर्फ ड्रोन, बल्कि सैन्य मदद भी खुलकर दी। तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन ने शहबाज शरीफ से फोन पर बातचीत की, लेकिन पहलगाम आतंकी हमले पर एक शब्द तक नहीं कहा।
क्या चाहते हैं एर्दोगन?
रेचेप तैय्यप एर्दोगन खुद को मुस्लिम दुनिया का नेता साबित करना चाहते हैं। कभी फिलिस्तीन, कभी कतर, और अब पाकिस्तान का साथ देकर वे इस्लामी छवि को चमकाना चाहते हैं। भारत की इजराइल, यूएई और सऊदी अरब से बढ़ती दोस्ती शायद तुर्की को नागवार गुजर रही है।
भारत का संकल्प: जो भारत के दुश्मनों के साथ, वो भारत का साझेदार नहीं
अब सवाल केवल व्यापार या पर्यटन का नहीं है। यह भारत की संप्रभुता, सुरक्षा और आत्मसम्मान का सवाल है। भारत अब हर उस देश को जवाब देगा जो भारत के खिलाफ खड़ा होगा — चाहे वो ड्रोन से हमला करे या दुश्मनों की खुलकर मदद।