पाक के साथी तुर्की पर भारत की चौतरफा स्ट्राइक

दि राइजिंग न्यूज। नई दिल्ली। 16 मई 2025।  भारत और तुर्की के रिश्तों में बीते कुछ वर्षों से लगातार तल्खी देखी जा रही है, लेकिन अब यह तनाव खुलकर सामने आने लगा है। ताजा घटनाक्रम में भारत ने तुर्की के खिलाफ कूटनीतिक मोर्चे पर आक्रामक रुख अपना लिया है। इसका सीधा कारण तुर्की द्वारा पाकिस्तान को सैन्य सहायता और रक्षा साझेदारी को मजबूत करना है।

पाक के साथी तुर्की पर भारत की चौतरफा स्ट्राइक
एयरपोर्ट से सुरक्षा एजंसी को हटाता और तुर्की का ध्वज उतारता भारतीय अधिकारी

भारत ने तुर्की को देना शुरू किया कूटनीतिक झटका, एक के बाद एक कदमों से तुर्की पर बढ़ा दबाव

दि राइजिंग न्यूज। नई दिल्ली। 16 मई 2025। 

भारत और तुर्की के रिश्तों में बीते कुछ वर्षों से लगातार तल्खी देखी जा रही है, लेकिन अब यह तनाव खुलकर सामने आने लगा है। ताजा घटनाक्रम में भारत ने तुर्की के खिलाफ कूटनीतिक मोर्चे पर आक्रामक रुख अपना लिया है। इसका सीधा कारण तुर्की द्वारा पाकिस्तान को सैन्य सहायता और रक्षा साझेदारी को मजबूत करना है।

तुर्की-पाकिस्तान सैन्य गठजोड़

तुर्की ने हाल के वर्षों में पाकिस्तान को आधुनिक युद्धपोत, ड्रोन और मिसाइल तकनीक मुहैया कराई है। इसके अलावा, तुर्की पाकिस्तान के सैन्य अधिकारियों को ट्रेनिंग भी दे रहा है और साझा रक्षा अभ्यासों में भी भाग ले रहा है। यह साझेदारी भारत के लिए चिंताजनक मानी जा रही है, क्योंकि पाकिस्तान बार-बार सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देता है।

भारत की कूटनीतिक प्रतिक्रिया

तुर्की की इन गतिविधियों के बाद भारत ने अब एक-के-बाद-एक रणनीतिक फैसलों के जरिए तुर्की पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है:

  1. तुर्की के रक्षा उत्पादों को भारतीय रक्षा खरीद प्रक्रिया से बाहर रखना – भारत ने अब तक तुर्की से किसी बड़े रक्षा सौदे पर न तो हस्ताक्षर किए हैं और न ही तुर्की कंपनियों को प्राथमिकता दी है।

  2. तुर्की को मिलने वाले व्यापारिक प्रोत्साहनों में कटौती – भारत सरकार ने तुर्की को GSP (Generalised System of Preferences) जैसे विशेष व्यापार लाभों से बाहर कर दिया है।

  3. आर्मेनिया को सशक्त करना – तुर्की के कट्टर विरोधी आर्मेनिया को भारत ने हाल ही में पिनाका मल्टी बैरल रॉकेट सिस्टम और स्वदेशी हथियार प्रणाली निर्यात की है, जो तुर्की के लिए एक सीधा संदेश माना जा रहा है।

  4. तुर्की के कश्मीर पर बयान को सख्ती से खारिज करना – भारत ने हर अंतरराष्ट्रीय मंच पर तुर्की द्वारा कश्मीर पर दिए गए बयानों का कड़ा विरोध किया है और इसे भारत की संप्रभुता में हस्तक्षेप बताया है।

भारत के कदम:

1. हवाई अड्डों से तुर्की की कंपनी Çelebi की सुरक्षा मंजूरी रद्द:

भारत सरकार ने तुर्की की कंपनी Çelebi Airport Services India की सुरक्षा मंजूरी रद्द कर दी है, जो दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई, अहमदाबाद, गोवा, कोचीन और कन्नूर सहित नौ प्रमुख भारतीय हवाई अड्डों पर ग्राउंड हैंडलिंग सेवाएं प्रदान कर रही थी। इस निर्णय के पीछे राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताएं हैं, विशेष रूप से तुर्की द्वारा पाकिस्तान को ड्रोन और अन्य सैन्य सहायता प्रदान करने के बाद, जिनका उपयोग 8 मई को भारत पर ड्रोन हमलों में किया गया था। 

2. व्यापारिक प्रतिबंध और बहिष्कार:

  • उदयपुर के मार्बल व्यापारियों ने तुर्की से ₹3,000 करोड़ के मार्बल आयात को रोक दिया है, जो भारत के कुल मार्बल आयात का लगभग 70% था।

  • पुणे के व्यापारियों ने तुर्की से सेब के आयात को बंद कर दिया है।

  • ऑनलाइन ट्रैवल एजेंसियों जैसे MakeMyTrip और EaseMyTrip ने तुर्की और अज़रबैजान के लिए यात्रा बुकिंग में गिरावट और रद्दीकरण की सूचना दी है।

3. शैक्षणिक और सांस्कृतिक संबंधों का निलंबन:

जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय ने तुर्की की सरकारी संस्थाओं के साथ सभी समझौतों को निलंबित कर दिया है, जिससे शैक्षणिक सहयोग पर प्रभाव पड़ा है।

4. राजनीतिक प्रतिक्रियाएं:

शिवसेना ने मुंबई हवाई अड्डे से तुर्की की कंपनियों को हटाने की मांग की है, विशेष रूप से तुर्की द्वारा पाकिस्तान को ड्रोन आपूर्ति करने के बाद।

तुर्की को स्पष्ट संदेश

भारत का रुख अब यह स्पष्ट कर चुका है कि जो भी देश पाकिस्तान को सैन्य सहायता देकर भारत विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा देगा, उसे कूटनीतिक और रणनीतिक स्तर पर इसका जवाब मिलेगा। तुर्की, जो ओआईसी (OIC) में भी भारत विरोधी रुख अपनाता रहा है, अब भारत की नजरों में एक सावधानी से निपटने योग्य देश बन चुका है।


भारत और तुर्की के बीच हालिया तनाव के चलते भारत ने तुर्की के साथ कई व्यापारिक और सुरक्षा संबंधों को समाप्त कर दिया है। इसका मुख्य कारण तुर्की द्वारा पाकिस्तान को सैन्य समर्थन देना और भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल होना है। भारत ने तुर्की के पाकिस्तान समर्थक रुख के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापार, सुरक्षा और सांस्कृतिक संबंधों में गिरावट आई है। यह कदम भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। 

भारत अब न केवल आतंकवाद के समर्थकों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मुखर है, बल्कि वह रणनीतिक और आर्थिक मोर्चे पर भी सख्त फैसले ले रहा है। तुर्की को यह संकेत साफ मिल चुका है कि भारत अब "सॉफ्ट डिप्लोमेसी" से आगे बढ़ चुका है और "नए भारत" की विदेश नीति में राष्ट्रहित सर्वोपरि है।