भारत में फिर बढ़ने लगा कोरोना का खतरा: विशेषज्ञों ने बताया कितना गंभीर है मौजूदा संक्रमण
दि राइजिंग न्यूज। लखनऊ। 21 मई, 2025। दक्षिण-पूर्व एशिया में कोविड-19 मामलों में आई अचानक तेजी के बाद अब भारत में भी कोरोना वायरस फिर से पैर पसारने लगा है। केरल, महाराष्ट्र, गुजरात, तमिलनाडु और कर्नाटक जैसे राज्यों से नए मामलों की पुष्टि हुई है। मुंबई, चेन्नई और अहमदाबाद जैसे शहरों में संक्रमण के केस बढ़ते देखे गए हैं।
दि राइजिंग न्यूज। लखनऊ। 21 मई, 2025।
दक्षिण-पूर्व एशिया में कोविड-19 मामलों में आई अचानक तेजी के बाद अब भारत में भी कोरोना वायरस फिर से पैर पसारने लगा है। केरल, महाराष्ट्र, गुजरात, तमिलनाडु और कर्नाटक जैसे राज्यों से नए मामलों की पुष्टि हुई है। मुंबई, चेन्नई और अहमदाबाद जैसे शहरों में संक्रमण के केस बढ़ते देखे गए हैं।
स्वास्थ्य मंत्रालय और स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, ये मामले वर्तमान में गंभीर नहीं हैं लेकिन स्थिति पर बारीकी से नजर रखी जा रही है। तमिलनाडु और पुडुचेरी में हाल ही में 12-12 केस सामने आए हैं, जबकि कर्नाटक में 16 एक्टिव केस दर्ज किए गए हैं। गुजरात के अहमदाबाद में एक ही दिन में 7 नए पॉजिटिव केस सामने आए।
महामारी खत्म, लेकिन वायरस अभी भी मौजूद
हालांकि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने मई 2023 में कोविड-19 महामारी को समाप्त घोषित कर दिया था, लेकिन वायरस अभी भी दुनिया के विभिन्न हिस्सों में फैल रहा है। भारत में अब तक सामने आए केस ज़्यादातर हल्के लक्षणों वाले हैं और इनसे जुड़ी मौतों या ICU में भर्ती की दर बहुत कम है।
मुंबई में स्थिति कैसी है?
महाराष्ट्र स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, मुंबई में जनवरी 2024 से अब तक कोविड से जुड़ी दो मौतें हुई हैं, लेकिन ये मरीज पहले से अन्य गंभीर बीमारियों से ग्रस्त थे। मुंबई में इस साल 6,066 सैंपल की जांच में 106 लोग संक्रमित पाए गए, जिनमें से ज़्यादातर हल्के लक्षणों से ग्रस्त हैं। वर्तमान में केवल 16 मरीजों को अस्पताल में भर्ती किया गया है।
BMC (बृहन्मुंबई नगर निगम) का कहना है कि कोविड अब एक स्थानिक बीमारी (endemic) बन चुका है और इससे ज्यादा घबराने की जरूरत नहीं है। हालांकि सभी सावधानियां बरतना जरूरी है।
क्या कहते हैं मेडिकल एक्सपर्ट्स?
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डॉ. विकास मौर्य (फोर्टिस हॉस्पिटल, दिल्ली): “JN.1 वेरिएंट हल्के से मध्यम लक्षणों वाला है, गंभीर खतरे की बात नहीं है। फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन निगरानी जरूरी है।”
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डॉ. संदीप बुद्धिराजा (मैक्स हेल्थकेयर): “कोविड-19 पूरी तरह से गया नहीं है। यह एक स्थानिक वायरस बन गया है जो समय-समय पर उभार ले सकता है। टीकाकरण और बूस्टर की दर में गिरावट, कमजोर इम्यूनिटी के कारण मामलों में बढ़ोतरी हो सकती है।”
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डॉ. भरत अग्रवाल (अपोलो हॉस्पिटल, नवी मुंबई): “भारत की जनसंख्या में अब अच्छी इम्यूनिटी बन चुकी है, चाहे वह वैक्सीन से हो, नेचुरल इन्फेक्शन से या हाइब्रिड से। JN.1 वेरिएंट बहुत खतरनाक नहीं है। लेकिन सतर्क रहना जरूरी है।”
मानसिक स्वास्थ्य भी प्रभावित
कोविड-19 ने न सिर्फ शरीर बल्कि मानसिक स्वास्थ्य को भी गहरा नुकसान पहुंचाया है। एक रिपोर्ट के अनुसार महामारी के पहले वर्ष में भारत में मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं में 25% तक की बढ़ोतरी हुई, जिसमें शहरी आबादी सबसे ज्यादा प्रभावित रही।
कौन-से वेरिएंट बना रहे हैं चिंता का कारण?
मौजूदा संक्रमण की सबसे बड़ी वजह JN.1 वेरिएंट को माना जा रहा है, जो Omicron BA.2.86 का सब-वेरिएंट है। WHO के अनुसार इसमें लगभग 30 म्यूटेशन हैं, और हाल ही में LF.7 और NB.1.8 जैसे वेरिएंट भी मामलों में देखे गए हैं।
निष्कर्ष:
कोविड-19 का खतरा अभी टला नहीं है, लेकिन घबराने की आवश्यकता नहीं है। मास्क पहनना, हाथ धोना और भीड़ से दूरी जैसी सामान्य सावधानियां अपनाकर स्थिति को काबू में रखा जा सकता है। खासतौर पर बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और अन्य बीमारियों से जूझ रहे लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।