राज ठाकरे का मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर तीखा हमला, बोले- आपकी चुप्पी नेताओं को बेशर्म बना रही है
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को सार्वजनिक पत्र लिखकर राज्य की राजनीतिक संस्कृति, सत्ता पक्ष के नेताओं के व्यवहार और बढ़ते राजनीतिक अहंकार पर सवाल उठाए। उन्होंने मुख्यमंत्री की चुप्पी पर भी निशाना साधते हुए जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की।
दि राइजिंग न्यूज़ | मुंबई | 4 जुलाई 2026
महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को संबोधित करते हुए एक सार्वजनिक पत्र जारी किया है, जिसमें उन्होंने राज्य की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों, सत्ता पक्ष के नेताओं के व्यवहार और सरकार की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। राज ठाकरे ने आरोप लगाया कि सत्ता में बैठे कुछ नेताओं का व्यवहार लगातार अहंकारी होता जा रहा है और मुख्यमंत्री की चुप्पी इस प्रवृत्ति को और बढ़ावा दे रही है। उनका कहना है कि यदि समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं किया गया तो महाराष्ट्र की राजनीतिक संस्कृति और लोकतांत्रिक मूल्यों को नुकसान पहुंच सकता है।राज ठाकरे ने अपने पत्र में यह भी कहा कि महाराष्ट्र हमेशा से देश के उन राज्यों में शामिल रहा है, जहां राजनीतिक मतभेद होने के बावजूद नेताओं के बीच मर्यादा, शालीनता और संवाद की परंपरा रही है। उन्होंने दावा किया कि पिछले कुछ वर्षों में यह परंपरा कमजोर होती दिखाई दे रही है और राज्य की राजनीति में ऐसा व्यवहार बढ़ रहा है, जो महाराष्ट्र की पहचान के अनुरूप नहीं माना जाता। उन्होंने मुख्यमंत्री से इस पूरे विषय पर गंभीरता से विचार करते हुए आवश्यक कदम उठाने की अपील की।
मुख्यमंत्री की चुप्पी पर उठाए गंभीर सवाल
अपने सार्वजनिक पत्र में राज ठाकरे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की कार्यशैली पर सीधे सवाल उठाते हुए कहा कि जब सत्ता पक्ष के कुछ नेता लगातार विवादों में घिरते हैं और उनके बयान या व्यवहार पर सरकार की ओर से कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं आती, तो इससे जनता के बीच गलत संदेश जाता है। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री राज्य के सर्वोच्च निर्वाचित पद पर हैं और ऐसे में उनकी जिम्मेदारी केवल प्रशासन चलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि राजनीतिक अनुशासन बनाए रखना भी उनकी जिम्मेदारी है।राज ठाकरे ने कहा कि यदि किसी जनप्रतिनिधि का आचरण सार्वजनिक जीवन की मर्यादाओं के अनुरूप नहीं है, तो उसके खिलाफ समय पर कार्रवाई होना आवश्यक है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री की चुप्पी के कारण कुछ नेताओं को यह संदेश मिल रहा है कि उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी। इससे राजनीतिक जवाबदेही कमजोर होती है और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
महाराष्ट्र की राजनीतिक संस्कृति में बदलाव पर जताई चिंता
राज ठाकरे ने अपने पत्र में महाराष्ट्र की राजनीतिक संस्कृति का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि यह राज्य हमेशा से विचार आधारित राजनीति, सभ्य संवाद और लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए जाना जाता रहा है। यहां राजनीतिक विरोध के बावजूद व्यक्तिगत मर्यादा बनाए रखने की परंपरा रही है, जिसकी पूरे देश में सराहना होती रही है।उन्होंने आरोप लगाया कि बीते कुछ वर्षों में राज्य की राजनीति का स्वरूप बदलता दिखाई दे रहा है। उनके अनुसार अब राजनीतिक भाषा अधिक आक्रामक होती जा रही है और विरोधियों के प्रति सम्मान का भाव कम होता दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि यदि यही स्थिति बनी रही तो महाराष्ट्र की विशिष्ट राजनीतिक पहचान धीरे-धीरे कमजोर हो सकती है।
केंद्र की राजनीति के प्रभाव का लगाया आरोप
राज ठाकरे ने अपने पत्र में दावा किया कि केंद्र की सत्ता में बैठे नेताओं का अहंकार लगातार बढ़ता जा रहा है और इसका प्रभाव अब राज्यों की राजनीति में भी दिखाई देने लगा है। उन्होंने कहा कि जब सत्ता का उद्देश्य जनता की सेवा के बजाय राजनीतिक वर्चस्व स्थापित करना बन जाता है, तब लोकतांत्रिक संस्थाएं भी प्रभावित होने लगती हैं।उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से सवाल किया कि क्या महाराष्ट्र भी अब उसी राजनीतिक दिशा में आगे बढ़ रहा है, जहां सत्ता के बल पर हर आलोचना को नजरअंदाज किया जाता है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को समय रहते इस स्थिति पर ध्यान देना चाहिए, ताकि राज्य की राजनीतिक गरिमा बनी रहे और लोकतांत्रिक परंपराओं की रक्षा हो सके।
विधायक से जुड़े विवाद का किया उल्लेख
राज ठाकरे ने अपने पत्र में एक विधायक से जुड़े हालिया विवाद का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि गंभीर घटनाओं के बावजूद संबंधित जनप्रतिनिधि के खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई नहीं की गई। उनका कहना है कि सार्वजनिक जीवन में रहने वाले नेताओं से संवेदनशीलता, जिम्मेदारी और मर्यादित व्यवहार की अपेक्षा की जाती है।उन्होंने कहा कि यदि ऐसे मामलों में सरकार निष्पक्ष कार्रवाई नहीं करती, तो जनता का शासन व्यवस्था पर विश्वास कमजोर होने लगता है। उनके अनुसार कानून और अनुशासन सभी पर समान रूप से लागू होना चाहिए, चाहे वह आम नागरिक हो या सत्ता पक्ष का कोई नेता।
'सत्ता भ्रष्ट करती है' कहावत का दिया उदाहरण
राज ठाकरे ने अपने पत्र में एक प्रसिद्ध कहावत का उल्लेख करते हुए कहा कि सत्ता व्यक्ति को भ्रष्ट करती है और निरंकुश सत्ता पूरी तरह भ्रष्ट कर देती है। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान समय में कुछ नेताओं का व्यवहार इस कहावत को सही साबित करता दिखाई दे रहा है।उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता जनता की सेवा करने का माध्यम होती है, न कि व्यक्तिगत अहंकार दिखाने का साधन। इसलिए सत्ता में बैठे सभी जनप्रतिनिधियों को अपने आचरण और भाषा पर विशेष ध्यान देना चाहिए, ताकि लोकतांत्रिक व्यवस्था मजबूत बनी रहे।
मुख्यमंत्री से की राजनीतिक मर्यादा बचाने की अपील
अपने पत्र के अंत में राज ठाकरे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से आग्रह किया कि वे राज्य की राजनीतिक गरिमा और लोकतांत्रिक परंपराओं की रक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाएं। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र की पहचान हमेशा सभ्य राजनीति और संतुलित नेतृत्व रही है, जिसे किसी भी परिस्थिति में कमजोर नहीं होने देना चाहिए।उन्होंने यह भी कहा कि सत्ता अस्थायी होती है, लेकिन जनता का विश्वास सबसे बड़ी पूंजी होता है। यदि सरकार पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्पक्षता के सिद्धांतों पर काम करेगी, तो लोकतंत्र और अधिक मजबूत होगा तथा जनता का भरोसा भी कायम रहेगा।